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ईरान-इजराइल युद्ध का गाजा संकट पर गहराता प्रभाव

ईरान पर अमेरिका-इजराइल युद्ध का गाजा संकट पर बढ़ता असर

मध्य पूर्व में संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए युद्ध ने पहले से ही गंभीर गाजा संकट को और अधिक जटिल बना दिया है। इस विस्तारित क्षेत्रीय संघर्ष ने वैश्विक ध्यान को इस ओर मोड़ दिया है, जबकि गाजा पट्टी में सीमा बंद, बढ़ती महंगाई और युद्धविराम के उल्लंघन की घटनाओं ने वहां की दो मिलियन आबादी की दुर्दशा को और बढ़ा दिया है। यह युद्ध न केवल क्षेत्र की राजनीतिक और सैन्य संरचना को बदल रहा है, बल्कि गाजा के लोगों को पहले से कहीं अधिक अकेला, कमजोर और दबाव में डाल रहा है।

बढ़ता क्षेत्रीय तनाव और गाजा पर उसका प्रभाव

28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए हमलों के बाद से, मध्य पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया है। इस क्षेत्रीय तनाव ने कम से कम 12 देशों को प्रभावित किया है, जिसमें प्रत्यक्ष हमले, हवाई क्षेत्र का बंद होना और आर्थिक प्रभाव शामिल हैं। गाजा, जो पहले से ही गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा है, इस नई उथल-पुथल से अछूता नहीं है। इजराइल ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए गाजा में प्रवेश करने वाले सभी सीमा पारगमन को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया है, जिसमें राफा सीमा पारगमन भी शामिल है। केवल केरेम शालोम सीमा पारगमन को सीमित मानवीय कार्गो और ईंधन के लिए आंशिक रूप से फिर से खोला गया है।

  • सीमा बंद का असर: इन सीमा बंदों के कारण मानवीय सहायता के प्रवाह में भारी व्यवधान उत्पन्न हुआ है। कई मानवीय संगठनों ने अपने संचालन को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है क्योंकि उनके गोदामों की आपूर्ति कम हो रही है। उदाहरण के लिए, वर्ल्ड सेंट्रल किचन ने भोजन वितरण को निलंबित कर दिया है, और EUBAM राफा ने अपनी सभी गतिविधियों को रोक दिया है। संयुक्त राष्ट्र के कई अभियानों के भी जल्द ही निलंबित होने का खतरा है।
  • ईंधन की कमी: सीमा बंद के कारण ईंधन की कमी हो गई है, जिससे ठोस अपशिष्ट संग्रह जैसी आवश्यक सेवाएं भी निलंबित हो गई हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया: संयुक्त राष्ट्र ने मानवीय सहायता को बढ़ाने के लिए अधिक सीमा पारगमन खोलने का आह्वान किया है।

गाजा में बढ़ती महंगाई और खाद्य असुरक्षा

ईरान पर अमेरिका-इजराइल युद्ध के शुरू होने और गाजा के सीमा पारगमन के बंद होने के साथ ही, घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में घबराहट फैल गई है, जिससे अकाल के फिर से लौटने का डर बढ़ गया है। फिलिस्तीनी आवश्यक वस्तुओं के लिए बाजारों की ओर भागे, क्योंकि बढ़ती कीमतें और प्रमुख वस्तुओं, विशेष रूप से सब्जियों की कमी, इन बंदों के प्रभाव को दर्शाती है। गाजा लगभग पूरी तरह से भोजन और आवश्यक वस्तुओं के प्रवेश के लिए सीमा पारगमन पर निर्भर करता है, जिसका अर्थ है कि किसी भी अचानक बंद का स्थानीय बाजारों और घरेलू बजट पर तुरंत असर पड़ता है।

उदाहरण के लिए, एक किलोग्राम प्याज जिसकी कीमत पहले तीन शेकेल (लगभग $1) थी, अब 15 शेकेल (लगभग $5) में बिक रहा है। खाना पकाने के तेल की कीमत 5 शेकेल (लगभग $1.5) से बढ़कर 13 शेकेल (लगभग $4) हो गई है, जबकि अजमोद (parsley) की कीमत आठ गुना बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि कीमतें इसलिए बढ़ रही हैं क्योंकि सीमाएं बंद हैं और आपूर्ति खत्म हो रही है।

यह स्थिति पहले से ही गंभीर मानवीय संकट को और बढ़ा रही है। 7 अक्टूबर 2023 से 5 मार्च 2026 तक, फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, गाजा में कम से कम 72,120 लोग मारे गए हैं, जिनमें 20,179 बच्चे शामिल हैं, और 171,802 लोग घायल हुए हैं।

युद्धविराम का उल्लंघन और मानवीय सहायता पर असर

इस बीच, युद्धविराम समझौतों का उल्लंघन जारी है, जिससे गाजा में स्थिति और खराब हो रही है। अक्टूबर 2025 में एक युद्धविराम लागू होने के बाद से, इजराइल द्वारा सैकड़ों उल्लंघन की सूचना मिली है, जिसमें नागरिकों पर हमले और हवाई हमले शामिल हैं। अल-जज़ीरा के विश्लेषण के अनुसार, इजराइल ने युद्धविराम के पिछले 148 दिनों में से 126 दिनों में गाजा पर हमला किया है, जिसका मतलब है कि केवल 22 दिन ऐसे थे जब कोई हिंसक हमला, मौत या चोट की रिपोर्ट नहीं की गई थी।

  • उल्लंघनों की संख्या: 10 अक्टूबर 2025 से 10 फरवरी 2026 तक, इजराइल ने हवा, तोपखाने और सीधी गोलीबारी से कम से कम 1,620 बार युद्धविराम का उल्लंघन किया है, जिससे सैकड़ों लोग मारे गए हैं। गाजा में सरकारी मीडिया कार्यालय के अनुसार, इजराइल ने 560 बार नागरिकों पर गोलीबारी की, “पीली रेखा” से परे आवासीय क्षेत्रों में 79 बार छापे मारे, गाजा पर 749 बार बमबारी की, और 232 मौकों पर लोगों की संपत्ति ध्वस्त कर दी।
  • मानवीय सहायता में बाधा: युद्धविराम में “पूरी सहायता को तुरंत गाजा पट्टी में भेजा जाएगा” का प्रावधान था। हालांकि, जमीनी हकीकत बहुत अलग है। नवंबर 2025 तक, केवल 4,453 ट्रकों ने गाजा में प्रवेश किया था, जो अपेक्षित 15,600 से बहुत कम है। यह औसतन लगभग 171 ट्रक प्रतिदिन है, जो प्रतिदिन 600 ट्रकों के अपेक्षित आंकड़े से काफी कम है।

ईरान-इजराइल युद्ध का व्यापक क्षेत्रीय प्रभाव

यह संघर्ष केवल गाजा तक ही सीमित नहीं है। अमेरिका-इजराइल युद्ध ने ईरान के साथ-साथ लेबनान, सीरिया, यमन और इराक जैसे देशों को भी प्रभावित किया है। इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी असर पड़ रहा है, जिससे ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि का खतरा है। फारस की खाड़ी के देशों को भी तेहरान के जवाबी हमलों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिरता और प्रतिष्ठा को खतरा है।

अंतर्राष्ट्रीय संकट समूह के अनुसार, मिस्र और जॉर्डन जैसे देश फिलिस्तीनी शरणार्थियों के अपने क्षेत्रों में निष्कासन से डरते हैं। ईरान के नेतृत्व वाले “प्रतिरोध की धुरी” के गैर-राज्य अभिनेताओं ने हमास और व्यापक फिलिस्तीनी कारण के समर्थन में हमले किए हैं। यह क्षेत्रीय अस्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा खतरा है, जिससे मुद्रास्फीति, ब्याज दरों में वृद्धि और मंदी के जोखिम बढ़ रहे हैं।

“गाजा पर अमेरिका-इजराइल युद्ध ने मध्य पूर्व में तनाव को काफी बढ़ा दिया है। लोकप्रिय गुस्सा बढ़ रहा है। मिस्र और जॉर्डन फिलिस्तीनी क्षेत्रों में उनके निष्कासन से डरते हैं। ईरान के नेतृत्व वाली “प्रतिरोध की धुरी” के गैर-राज्य अभिनेताओं ने हमास और फिलिस्तीनी कारण के समर्थन में हमले किए हैं।” – अंतर्राष्ट्रीय संकट समूह

मुख्य बातें (Key Takeaways)

  • ईरान पर अमेरिका-इजराइल युद्ध ने गाजा संकट को और गहरा कर दिया है, जिससे वैश्विक ध्यान बंट गया है।
  • इजराइल ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए गाजा में प्रवेश करने वाले सभी सीमा पारगमन बंद कर दिए हैं, जिससे मानवीय सहायता के प्रवाह में गंभीर बाधा उत्पन्न हुई है।
  • सीमा बंद के कारण गाजा में आवश्यक वस्तुओं की कमी हो गई है, जिससे कीमतें आसमान छू रही हैं और खाद्य असुरक्षा का खतरा बढ़ गया है।
  • युद्धविराम समझौतों का उल्लंघन जारी है, जिससे गाजा में मौतों और चोटों की संख्या बढ़ रही है।
  • यह संघर्ष केवल गाजा तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य पूर्व के कई देशों को प्रभावित कर रहा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है।
  • ईरान पर युद्ध के कारण क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं, ऊर्जा और खाद्य कीमतों पर असर पड़ने की आशंका है।
  • गाजा की दो मिलियन आबादी पहले से कहीं अधिक अकेली, कमजोर और दबाव में है, और मानवीय संकट बढ़ने का खतरा है।

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