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उत्तर प्रदेश मतदाता सूची: 2.4 करोड़ नाम हटे, 13 करोड़ के करीब पहुंची मतदाता संख्

उत्तर प्रदेश मतदाता सूची में बड़े फेरबदल: 2.4 करोड़ नाम हटे, मतदाता संख्या 13 करोड़ के करीब

उत्तर प्रदेश, भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य, जल्द ही 13 करोड़ मतदाताओं के आंकड़े को छूने वाला है। इस बीच, राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) का कार्य अपने अंतिम चरण में है। इस प्रक्रिया के तहत, लाखों मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए और उनकी सुनवाई की गई, जिसके परिणामस्वरूप 2.4 करोड़ से अधिक नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। यह बड़े पैमाने पर संशोधन राज्य में चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

मतदाता सूची संशोधन: एक विस्तृत अवलोकन

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) की प्रक्रिया, जो 27 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई थी, अब अपने निष्कर्ष की ओर बढ़ रही है। इस प्रक्रिया के दौरान, मतदाताओं के नामों को सत्यापित करने, डुप्लिकेट प्रविष्टियों को हटाने और प्रवास या अन्य कारणों से अनुपस्थित मतदाताओं के नामों को सूची से हटाने पर विशेष ध्यान दिया गया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि इस अभ्यास का उद्देश्य एक स्वच्छ और अद्यतन मतदाता सूची तैयार करना है।

प्रमुख चरण और आंकड़े:

  • नोटिस जारी करना: 27 अक्टूबर 2025 से 6 मार्च 2026 तक, राज्य में कुल 86,69,073 फॉर्म-6 (नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए) आवेदन प्राप्त हुए। इसके साथ ही, 32.6 मिलियन (3.26 करोड़) मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए, जिनके विवरणों को सत्यापन की आवश्यकता थी। इनमें 10.4 मिलियन (1.04 करोड़) मतदाता शामिल थे जिनका विवरण 2003 के SIR से मैप नहीं किया गया था, और 20.2 मिलियन (2.02 करोड़) मतदाता थे जिनमें नामों या पारिवारिक सदस्यों के बीच आयु के अंतर जैसी विसंगतियां पाई गईं।
  • दावे और आपत्तियां: 6 जनवरी से 6 मार्च 2026 तक, मतदाता सूची में नामों को शामिल करने के लिए 70 लाख से अधिक (7.06 मिलियन) फॉर्म-6 आवेदन प्राप्त हुए। वहीं, नामों को हटाने के लिए फॉर्म-7 के तहत 2.68 लाख से अधिक आपत्तियां दर्ज की गईं।
  • सुनवाई प्रक्रिया: 14 जनवरी को पहले नोटिस जारी किए गए और 21 जनवरी से सुनवाई शुरू हुई। 6 मार्च 2026 तक, 100% नोटिस तैयार कर लिए गए थे, जिनमें से लगभग 93.8% (3.06 करोड़) तामील किए जा चुके थे। लगभग 2.8 करोड़ (85.8%) मतदाताओं के मामलों में सुनवाई पूरी हो चुकी है, और शेष सुनवाई 27 मार्च तक पूरी होने की उम्मीद है।
  • नामों का विलोपन: अब तक, मतदाता सूची से 44,952 नामों को हटा दिया गया है। इनमें से 37,132 मामलों में मतदाताओं ने स्वयं हटाने का अनुरोध किया था, जबकि शेष नामों को मृत्यु, प्रवास या डुप्लिकेट नामांकन जैसे कारणों से हटाया गया है। 2,73,188 फॉर्म-7 आवेदन अभी भी सत्यापन के विभिन्न चरणों में लंबित हैं।
  • सुधार और अद्यतन: फॉर्म-8 (सुधार, पते में बदलाव, या मतदाता पहचान पत्र बदलने के लिए) के तहत 22.55 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए।

प्रवास और मतदाता सूची से नाम हटना: एक गंभीर चिंता

मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नामों का हटना, विशेष रूप से प्रवासी श्रमिकों के संदर्भ में, एक गंभीर चिंता का विषय है। भारत में, मतदाता पंजीकरण मुख्य रूप से स्थायी निवास के प्रमाण पर आधारित है, जो प्रवासी श्रमिकों के लिए एक बड़ी बाधा है। कई प्रवासी श्रमिक अस्थायी आवासों में रहते हैं और उनके पास आवश्यक दस्तावेज़ नहीं होते हैं, जिसके कारण वे मतदाता सूची से बाहर हो जाते हैं। बिहार जैसे राज्यों में, जहाँ से बड़े पैमाने पर प्रवासी श्रमिक पलायन करते हैं, विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान लाखों प्रवासियों के नाम हटा दिए गए हैं। यह स्थिति न केवल उनके मतदान के अधिकार को प्रभावित करती है, बल्कि उन्हें उनके मूल और गंतव्य दोनों राज्यों की मतदाता सूचियों से स्थायी रूप से बाहर कर सकती है।

“भारत की मतदाता पंजीकरण प्रणाली अभी भी एक स्थिर नागरिक के आधार पर डिज़ाइन की गई है। प्रवासी श्रमिक, जो अक्सर किराए के कमरों, निर्माण स्थलों या झुग्गियों में रहते हैं, उनके पास ऐसे दस्तावेज़ नहीं होते हैं। नतीजतन, चुनावी प्रक्रियाएं मोबाइल और कमजोर आबादी को बाहर कर देती हैं।”

– एक विश्लेषण के अनुसार

यह स्थिति भारत जैसे सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए एक चुनौती पेश करती है, जहां हर वोट मायने रखता है। प्रवासियों के लिए मतदान की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए मतदाता पहचान पत्र की पोर्टेबिलिटी और अंतर-राज्यीय समन्वय जैसे उपायों पर विचार करने की आवश्यकता है।

आगे की राह: अंतिम प्रकाशन और भविष्य की तैयारी

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) का अंतिम प्रकाशन 10 अप्रैल 2026 को अपेक्षित है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी चुनावों में केवल पात्र और वास्तविक मतदाता ही मतदान कर सकें। चुनाव आयोग ने यह भी बताया है कि फ़रवरी 2026 में, नागरिक रेटिंग के आधार पर, उत्तर प्रदेश को नागरिक सेवा पोर्टल पर प्रथम स्थान प्राप्त हुआ, जहाँ 99.24% शिकायतों का समाधान किया गया।

इस व्यापक संशोधन से मतदाता सूची की सटीकता और निष्पक्षता में वृद्धि होने की उम्मीद है। यह सुनिश्चित करेगा कि चुनावी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो और प्रत्येक पात्र नागरिक को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अवसर मिले।

मुख्य बातें:

  • उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के तहत 2.4 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं।
  • राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या 13 करोड़ के आंकड़े के करीब पहुंच रही है।
  • प्रवास और अन्य कारणों से बड़ी संख्या में नामों को सूची से हटाया गया है।
  • प्रवासी श्रमिकों के मतदाता सूची से नाम हटने का मुद्दा चिंता का विषय है, जो उनके मतदान अधिकारों को प्रभावित करता है।
  • सुधार और अद्यतन के लिए भी लाखों आवेदन प्राप्त हुए हैं।
  • अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 10 अप्रैल 2026 को अपेक्षित है।
  • चुनाव आयोग ने मतदाता पंजीकरण और सत्यापन के लिए ऑनलाइन (फॉर्म 6) और ऑफलाइन दोनों माध्यमों की सुविधा प्रदान की है।

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