कन्नूर निगम मेयर का मंत्री पर तीखा प्रहार: विकास में बाधा का आरोप
कन्नूर, केरल: कन्नूर निगम की मेयर पी. इंदिरा ने राज्य के मंत्री रामचन्द्रन कደንपल्ली पर विकास कार्यों में अक्षमता और राजनीतिक दोषारोपण का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। मेयर ने दावा किया कि निगम के खिलाफ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) का विरोध केवल एक राजनीतिक नौटंकी है, जिसका उद्देश्य मंत्री की विफलताओं और विकास पहलों में उनकी कथित निष्क्रियता को छिपाना है। यह आरोप-प्रत्यारोप कन्नूर जिले में चल रही विकास परियोजनाओं पर राजनीतिक तनाव और विवादों के बीच आया है।
मेयर इंदिरा के गंभीर आरोप
मेयर पी. इंदिरा ने कहा कि निगम के खिलाफ एलडीएफ का विरोध मंत्री कደንपल्ली की कथित अक्षमता और उनके मंत्रिस्तरीय कर्तव्यों में प्रगति की कमी से ध्यान भटकाने के लिए एक राजनीतिक रूप से प्रेरित चाल है। मेयर ने इस बात पर जोर दिया कि निगम विकास के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है, लेकिन मंत्री की निष्क्रियता और राजनीतिक दांव-पेंच इन प्रयासों में बाधा डाल रहे हैं।
मेयर ने कई विकास संबंधी मुद्दों को उजागर किया, जो उनके अनुसार मंत्री की कथित उपेक्षा के कारण बढ़ रहे हैं। इनमें शामिल हैं:
- 37 करोड़ रुपये की परियोजना में देरी: मेयर ने आरोप लगाया कि 37 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित एक कार्यालय भवन अभी तक निगम को नहीं सौंपा गया है, जिससे देरी हो रही है और प्रशासनिक कार्यों में बाधा आ रही है।
- अनधिकृत निर्माण: कलेक्टर के स्वामित्व वाले टाउन स्क्वायर पार्किंग क्षेत्र में निगम की अनुमति के बिना निर्माण गतिविधियां शुरू की गईं, जिसके कारण निगम को एक ‘स्टॉप मेमो’ जारी करना पड़ा।
- PWD की उपेक्षा: कन्नूर शहर के सौंदर्यीकरण में देरी को लोक निर्माण विभाग (PWD) की विफलताओं के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है, फिर भी निगम को इन देरी के लिए दोषी ठहराया जा रहा है।
- धन आवंटन और पुरस्कार: मेयर ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार विकास के लिए धन रोककर और निगम की कचरा प्रबंधन में शीर्ष रैंकिंग को स्वीकार न करके राजनीति कर रही है, भले ही इसे ‘सुचितवा मिशन’ से पहचान मिली हो।
मेयर ने आगे कहा कि एलडीएफ निगम के विकास पहलों को बाधित करने की कोशिश कर रहा है, भले ही एलडीएफ ने निगम की स्थापना के शुरुआती चार वर्षों तक शासन किया हो। यह बयान कन्नूर में विकास नियंत्रण और निष्पादन पर एक लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक संघर्ष का संकेत देता है।
मंत्री रामचन्द्रन कደንपल्ली का पोर्टफोलियो
मंत्री रामचन्द्रन कደንपल्ली वर्तमान में केरल सरकार में पंजीकरण, संग्रहालय, पुरातत्व और अभिलेखागार विभागों के मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पहले बंदरगाहों, संग्रहालयों और पुरातत्व के मंत्री के रूप में भी कार्य किया है। मेयर का आलोचनात्मक रुख यह दर्शाता है कि मंत्री की कथित अक्षमताएं कन्नूर के विकास को प्रभावित कर रही हैं, जो जिले वह विधानसभा में प्रतिनिधित्व करते हैं।
कन्नूर में विकास संबंधी मुद्दे
मेयर इंदिरा ने मंत्री कደንपल्ली पर आरोप लगाया कि वह विकास के लिए अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं और निगम पर अनुचित आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि निगम, जिसका नेतृत्व वह करती हैं, जनता के कल्याण और क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री द्वारा कथित तौर पर विकास परियोजनाओं को जानबूझकर बाधित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को नुकसान हो रहा है।
“मंत्री का विरोध केवल निगम को बदनाम करने और उनकी अपनी विफलताओं को छिपाने का एक प्रयास है। हमने विकास के लिए कई प्रस्ताव भेजे हैं, लेकिन हमें या तो उपेक्षा मिली है या जानबूझकर बाधाएं पैदा की गई हैं।”
यह आरोप-प्रत्यारोप कन्नूर निगम और राज्य सरकार के बीच विकास संबंधी मुद्दों पर चल रहे राजनीतिक संघर्ष को उजागर करता है। मेयर ने मंत्री पर आरोप लगाया कि वे केवल राजनीतिक लाभ के लिए निगम को निशाना बना रहे हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कन्नूर निगम की मेयर पी. इंदिरा ने मंत्री रामचन्द्रन कደንपल्ली पर राजनीतिक दोषारोपण और विकास में अक्षमता का आरोप लगाया है।
- मेयर का दावा है कि एलडीएफ का विरोध मंत्री की विफलताओं को छिपाने की एक राजनीतिक चाल है।
- मंत्री कደንपल्ली के पास पंजीकरण, संग्रहालय, पुरातत्व और अभिलेखागार जैसे विभाग हैं।
- विकास संबंधी मुद्दों में परियोजना सौंपने में देरी, अनधिकृत निर्माण और पीडब्ल्यूडी की उपेक्षा शामिल है।
- मेयर का आरोप है कि राजनीतिक कारणों से राज्य सरकार धन रोक रही है और निगम की उपलब्धियों को स्वीकार नहीं कर रही है।
- कन्नूर में विकास को लेकर निगम और मंत्री/राज्य सरकार के बीच एक लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक संघर्ष के संकेत हैं।













