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कर्नाटक: कल्याणकारी योजनाओं के लिए विकास कार्यों में कटौती, CAG की रिपोर्ट में ख

कर्नाटक: कल्याणकारी योजनाओं पर फोकस, विकास कार्यों में कटौती? CAG की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

कर्नाटक सरकार की महत्वाकांक्षी कल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव अब राज्य के विकास कार्यों पर दिखने लगा है। हाल ही में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि कैसे ‘गारंटी’ योजनाओं के लिए बढ़ते खर्च ने राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य पर दबाव डाला है, जिसके चलते कुछ महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं के लिए धन में कटौती की गई है। यह स्थिति ‘पहले फ्रीबीज़, फिर विकास’ की बहस को फिर से हवा दे रही है।

‘गारंटी’ योजनाओं का बढ़ता बोझ

CAG की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 वित्तीय वर्ष में कर्नाटक सरकार ने पांच प्रमुख ‘गारंटी’ योजनाओं – शक्ति, गृह लक्ष्मी, गृह ज्योति, युवा निधि और अन्न भाग्य – पर ₹52,525 करोड़ खर्च किए। यह राशि राज्य के कुल राजस्व प्राप्तियों का लगभग 20% और राज्य के अपने राजस्व का 27% है। यह दर्शाता है कि ये योजनाएं राज्य के बजट पर कितना भारी बोझ डाल रही हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि राज्य का राजस्व स्थिर रूप से बढ़ रहा है (10.63%), यह इन योजनाओं की आवर्ती लागतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है। नतीजतन, सरकार को इन योजनाओं को फंड करने के लिए उधार लेने पर निर्भर रहना पड़ रहा है। 2024-25 में, राज्य के राजस्व में 10.63% की वृद्धि हुई, जबकि व्यय 14.99% बढ़ गया, जिसका मुख्य कारण ये कल्याणकारी योजनाएं थीं।

विकास कार्यों पर असर और बढ़ता घाटा

CAG ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि बढ़ते सब्सिडी खर्च के कारण सरकार को कुछ अन्य चल रही परियोजनाओं के लिए धन कम करना पड़ा है। इनमें पोषण कार्यक्रम, स्थानीय निकायों को सहायता, ग्रामीण विकास कार्यक्रम और शहरी विकास पहलें शामिल हैं। इस वित्तीय असंतुलन के कारण ₹20,834 करोड़ का राजस्व घाटा हुआ है।

इसके अलावा, राज्य का राजकोषीय घाटा भी 2023-24 में ₹65,522 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹85,030 करोड़ हो गया है। इस अंतर को पाटने के लिए, राज्य ने ₹71,525.15 करोड़ का शुद्ध बाजार उधार लिया, जो पिछले वर्ष की तुलना में ₹8,525.15 करोड़ अधिक है।

पूंजीगत व्यय में कमी और भविष्य की चिंताएं

CAG की रिपोर्ट में यह भी उजागर किया गया है कि इन कल्याणकारी योजनाओं पर बढ़ते खर्च का असर पूंजीगत व्यय पर भी पड़ रहा है। हालांकि 2024-25 में समग्र पूंजीगत व्यय में ₹5,786 करोड़ की वृद्धि हुई, लेकिन केंद्रीय सहायता, निवेश और ऑफ-बजट उधार को समायोजित करने के बाद, बुनियादी ढांचे में वास्तविक निवेश केवल ₹3,284 करोड़ बढ़ा।

CAG ने चेतावनी दी है कि “सकल पूंजी निर्माण में यह संपीड़न भविष्य के विकास की संभावनाओं के लिए हानिकारक हो सकता है।” रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्च उधार से ऋण सेवा दायित्वों में वृद्धि होगी, जो विकासात्मक, बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी उपायों पर खर्च को कम कर सकता है।

कर्नाटक सरकार का पक्ष

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इन चिंताओं का खंडन किया है। उन्होंने विधानसभा में बजट का बचाव करते हुए कहा कि राज्य का राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमा के भीतर है और दक्षिण भारत के अन्य राज्यों की तुलना में कर्नाटक की स्थिति बेहतर है। उन्होंने तर्क दिया कि उधार विकास के उद्देश्यों के लिए आवश्यक है और राज्य का कुल ऋण निर्धारित सीमा के भीतर है।

सिद्धारमैया ने यह भी कहा कि कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवंटन के बावजूद, सामाजिक कल्याण विभाग के लिए ₹16,954 करोड़ और शिक्षा क्षेत्र के लिए ₹65,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर जीएसटी दरों में कटौती और मुआवजे में कटौती के लिए भी आलोचना की, जिससे राज्य के राजस्व पर असर पड़ा।

प्रमुख निष्कर्ष (Key Takeaways)

  • बढ़ता कल्याणकारी व्यय: कर्नाटक सरकार ने 2024-25 में पांच ‘गारंटी’ योजनाओं पर ₹52,525 करोड़ खर्च किए, जो राज्य के राजस्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • वित्तीय दबाव: इन योजनाओं के कारण राज्य के राजस्व और व्यय के बीच एक बड़ा अंतर पैदा हुआ है, जिससे राजस्व घाटा ₹20,834 करोड़ तक पहुंच गया है।
  • राजकोषीय घाटे में वृद्धि: राज्य का राजकोषीय घाटा 2023-24 में ₹65,522 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹85,030 करोड़ हो गया है।
  • विकास कार्यों में कटौती: CAG की रिपोर्ट के अनुसार, कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन जुटाने हेतु पोषण, ग्रामीण विकास और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में कटौती की गई है।
  • पूंजीगत व्यय पर असर: बुनियादी ढांचे में निवेश धीमा हो गया है, जिससे भविष्य के विकास की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है।
  • बढ़ता उधार: घाटे को पूरा करने के लिए राज्य ने ₹71,525.15 करोड़ का शुद्ध बाजार उधार लिया है, जो पिछले वर्ष से अधिक है।
  • सरकार का बचाव: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का कहना है कि राज्य का वित्तीय घाटा नियंत्रण में है और ये उधार विकासात्मक उद्देश्यों के लिए आवश्यक हैं।
  • केंद्र की आलोचना: मुख्यमंत्री ने केंद्रीय नीतियों, जैसे जीएसटी दरों में बदलाव और मुआवजा बंद होने को भी राज्य के वित्तीय दबाव का कारण बताया है।
  • ऋण का दुष्चक्र: CAG ने चेतावनी दी है कि निरंतर उधार भविष्य के विकास और कल्याणकारी उपायों पर खर्च को सीमित कर सकता है, जिससे ऋण का एक दुष्चक्र बन सकता है।

यह स्थिति कर्नाटक के लिए एक नाजुक संतुलन साधने की चुनौती पेश करती है, जहां एक ओर सामाजिक कल्याण के वादे पूरे करने हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक विकास को सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। CAG की रिपोर्ट इस संतुलन को बनाए रखने की आवश्यकता पर एक महत्वपूर्ण प्रकाश डालती है।

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