कर्नाटक सरकार एससी आंतरिक कोटा पर पुनर्विचार कर रही है
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार 56,432 सरकारी पदों को भरने के अपने फैसले पर पुनर्विचार कर रही है, जिसमें अनुसूचित जातियों (एससी) के लिए आंतरिक आरक्षण को शामिल नहीं किया गया था। एससी समुदायों और मंत्रियों के दबाव के बाद, कैबिनेट अब मौजूदा 15% एससी कोटे के भीतर आनुपातिक आंतरिक आरक्षण शुरू करने पर चर्चा करेगी। यह कदम राज्य में भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर चल रही अटकलों और विरोध के बीच आया है।
पृष्ठभूमि: आरक्षण का इतिहास और वर्तमान स्थिति
कर्नाटक में आरक्षण नीति का एक लंबा और जटिल इतिहास रहा है। 2022 में, राज्य सरकार ने एससी के लिए आरक्षण को 15% से बढ़ाकर 17% और एसटी के लिए 3% से 7% कर दिया था, जिससे कुल आरक्षण 56% तक पहुंच गया था। यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50% की सीमा से अधिक था। इस वृद्धि को अदालतों में चुनौती दी गई थी।
इस बीच, सरकार ने एससी के लिए 17% कोटे के भीतर आंतरिक आरक्षण का प्रस्ताव भी दिया था। इस आंतरिक आरक्षण को तीन श्रेणियों में विभाजित करने की योजना थी: एससी लेफ्ट (6%), एससी राइट (6%), और एससी स्पर्श्य (5%). हालांकि, इस बढ़ी हुई सीमा और आंतरिक आरक्षण के कार्यान्वयन में कानूनी बाधाओं के कारण, भर्ती प्रक्रिया नवंबर 2024 से रुकी हुई थी.
कानूनी देरी से बचने के लिए, सरकार ने हाल ही में 56,432 पदों के लिए भर्ती को मौजूदा 50% आरक्षण सीमा के तहत आगे बढ़ाने का फैसला किया था, जिसमें एससी के लिए 15% आरक्षण शामिल था। इस निर्णय ने एससी लेफ्ट समुदायों से तत्काल प्रतिक्रिया प्राप्त की, जिन्होंने विरोध की धमकी दी.
आंतरिक आरक्षण की मांग और सरकारी प्रतिक्रिया
एससी लेफ्ट समुदायों ने तर्क दिया है कि मौजूदा 15% एससी कोटे के भीतर भी, आरक्षण का वितरण सभी उप-समूहों के लिए समान नहीं है। उन्होंने लंबे समय से अपने लिए एक ‘कोटा के भीतर कोटा’ की मांग की है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आरक्षण का लाभ सभी संबंधित समुदायों तक पहुंचे.
मंत्रियों, विशेष रूप से एससी समुदाय से आने वाले मंत्रियों के दबाव के बाद, सरकार ने इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने का फैसला किया है। आबकारी मंत्री आर.बी. थिम्मापुर, जो एससी लेफ्ट समुदाय से हैं, ने कहा कि कैबिनेट बैठक में आंतरिक आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी और आनुपातिक आंतरिक आरक्षण लागू किया जाएगा.
आनुपातिक आंतरिक आरक्षण का मतलब
यदि 15% एससी कोटे के भीतर आनुपातिक आंतरिक आरक्षण लागू किया जाता है, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि:
- एससी लेफ्ट और एससी राइट समुदायों को लगभग 5.29% आरक्षण मिल सकता है।
- एससी स्पर्श्य समूहों को शेष 4.42% आरक्षण मिल सकता है.
यह व्यवस्था तब तक लागू रह सकती है जब तक कि 17% एससी कोटा और उसके आंतरिक विभाजन पर अदालतों का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता.
भर्ती प्रक्रिया में देरी और कानूनी चुनौतियाँ
कर्नाटक में इन 56,432 सरकारी पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से रुकी हुई है। इसका मुख्य कारण आरक्षण नीति में बार-बार हो रहे बदलाव और उनसे जुड़ी कानूनी चुनौतियाँ हैं.
सुप्रीम कोर्ट की 50% की सीमा का पालन करने के लिए, सरकार ने पहले 50% आरक्षण मैट्रिक्स (जिसमें एससी के लिए 15% शामिल है) के अनुसार भर्ती करने का फैसला किया था. हालांकि, यह निर्णय सभी हितधारकों को संतुष्ट नहीं कर सका।
“हम एससी वर्ग के लोगों को दिए गए आंतरिक आरक्षण की समीक्षा करेंगे क्योंकि भाजपा सरकार ने कानून के प्रावधानों के अनुसार आंतरिक आरक्षण प्रदान नहीं किया। हमने एससी श्रेणी के अंतर्गत आने वाले विभिन्न समुदायों को दिए गए आंतरिक आरक्षण पर पुनर्विचार करने का निर्णय लिया है।” – डॉ. जी. परमेश्वर, कर्नाटक के गृह मंत्री
राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने हाल ही में कर्नाटक अनुसूचित जाति उप-वर्गीकरण विधेयक, 2025 को अपनी मंजूरी दे दी है, जो एससी समुदायों के बीच आंतरिक कोटा प्रदान करता है. यह विधेयक एससी के लिए समग्र आरक्षण को 15% से बढ़ाकर 17% करने और इसे 101 एससी समुदायों के बीच विभाजित करने का प्रस्ताव करता है. हालांकि, इस 17% कोटे का कार्यान्वयन अभी भी अदालती फैसले पर निर्भर है क्योंकि यह 50% की समग्र सीमा को पार करता है.
आगे की राह
कर्नाटक सरकार अब 56,432 सरकारी पदों को भरने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने का प्रयास कर रही है। कैबिनेट बैठक में 15% एससी कोटे के भीतर आनुपातिक आंतरिक आरक्षण लागू करने पर निर्णय लिया जाएगा। यह कदम एससी समुदायों के बीच बढ़ती नाराजगी को शांत करने और भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह नया निर्णय कानूनी चुनौतियों का सामना कैसे करता है और क्या यह अंततः राज्य में हजारों लंबित सरकारी नौकरियों को भरने का मार्ग प्रशस्त करता है। इस मुद्दे पर विभिन्न समुदायों की प्रतिक्रियाएं और अदालतों के फैसले आगे की दिशा तय करेंगे।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कर्नाटक सरकार 56,432 सरकारी पदों की भर्ती में एससी के लिए आंतरिक आरक्षण के मुद्दे पर पुनर्विचार कर रही है।
- एससी समुदायों और मंत्रियों के दबाव के कारण, कैबिनेट 15% एससी कोटे के भीतर आनुपातिक आंतरिक आरक्षण पर चर्चा करेगी।
- 2022 में एससी के लिए आरक्षण 15% से बढ़ाकर 17% किया गया था, लेकिन यह 50% की समग्र सीमा से अधिक होने के कारण कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहा है।
- भर्ती प्रक्रिया नवंबर 2024 से रुकी हुई थी, और सरकार ने पहले 50% सीमा के तहत भर्ती करने का फैसला किया था।
- राज्यपाल ने हाल ही में एससी आंतरिक आरक्षण विधेयक, 2025 को मंजूरी दी है, लेकिन इसका कार्यान्वयन अदालती फैसले पर निर्भर है।
- आनुपातिक आंतरिक आरक्षण के तहत, एससी लेफ्ट और राइट को लगभग 5.29% और स्पर्श्य समूहों को 4.42% मिल सकता है।
- यह निर्णय लंबित भर्तियों को आगे बढ़ाने और सामाजिक असंतोष को कम करने के सरकार के प्रयास को दर्शाता है।













