नई दिल्ली: उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। इस साल फरवरी के महीने में ही लोगों को मार्च-अप्रैल जैसी गर्मी का अहसास होने लगा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि इस बार औसत से कम बारिश और सामान्य से अधिक तापमान फसलों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है।
फसलों पर मंडरा रहा है खतरा
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, फरवरी का महीना गेहूं और अन्य रबी फसलों की बढ़त के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। अगर तापमान में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही, तो फसलों की ‘टर्मिनल हीट’ के कारण पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है।
- गेहूं की फसल: ज्यादा गर्मी से गेहूं के दाने समय से पहले सूख सकते हैं और उनकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
- सरसों और चना: हवा में नमी की कमी के कारण इन फसलों की फलियों पर बुरा असर पड़ रहा है।
- सिंचाई की समस्या: बारिश न होने की वजह से किसानों को बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है।
मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कमजोर पड़ने की वजह से बारिश में भारी कमी दर्ज की गई है। आने वाले दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत के कई राज्यों में पारा 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक सामान्य से ऊपर जा सकता है। वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे दोपहर के समय सिंचाई से बचें और फसलों को बचाने के लिए जरूरी इंतजाम करें।













