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भारत का निजीकरण अभियान कमजोर निवेशक रुचि से पटरी से उतरा

भारत का निजीकरण अभियान: निवेशकों की ठंडी प्रतिक्रिया से नई चुनौतियां

भारत सरकार का महत्वाकांक्षी निजीकरण कार्यक्रम पटरी से उतरता नजर आ रहा है। IDBI बैंक की असफल बिक्री के बाद तीन अन्य प्रस्तावित बिक्री पर विचार चल रहा है, जिन्हें रद्द करने पर विचार हो रहा है। कमजोर निवेशक रुचि, ऊंची वैल्यूएशन और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं इस अभियान को झटका दे रही हैं।

निजीकरण कार्यक्रम की मौजूदा चुनौतियां

सरकार ने अधिकांश क्षेत्रों से बाहर निकलने का लक्ष्य रखा था, लेकिन निवेशकों की रुचि में कमी ने इसे प्रभावित किया है। IDBI बैंक की बिक्री विफल होने के बाद अब तीन अन्य डील्स पर संकट मंडरा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचे मूल्यांकन और वैश्विक अनिश्चितताएं मुख्य बाधाएं हैं।

  • कमजोर निवेशक रुचि: खरीदारों की संख्या घटी है, जिससे डील्स रुकी हुई हैं।
  • ऊंची वैल्यूएशन: सरकार के अपेक्षित मूल्य निवेशकों को आकर्षित नहीं कर पा रहे।
  • भू-राजनीतिक जोखिम: वैश्विक तनाव निवेश निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं।

ये कारक मिलकर सरकार के निजीकरण लक्ष्यों को पटरी से उतार रहे हैं। बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रतिबद्धता जताई, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है।

बजट 2026 में सरकार की प्रतिबद्धता

यूनियन बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सभी स्वीकृत डिसइन्वेस्टमेंट पूरे होंगे। सरकार ने कैबिनेट द्वारा मंजूर 50 प्रस्तावों में से 12 बंदी और 13 रणनीतिक बिक्री पूरी की हैं। बाकी ट्रैक पर हैं, लेकिन संख्यात्मक लक्ष्यों से हटकर लंबी अवधि की वैल्यू पर फोकस है।

सरकार ने कहा, “हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और हर एक को तार्किक अंत तक ले जाएंगे।”

पिछले बजट में डिसइन्वेस्टमेंट और एसेट मॉनेटाइजेशन से 47,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य था, जो FY25 के 50,000 करोड़ से कम था। अब स्टैंडअलोन टारगेट बंद हैं। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, यह रणनीति बदलाव दर्शाता है।

सीआईआई की महत्वपूर्ण सिफारिशें

कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) ने बजट 2026 से पहले 10 लाख करोड़ रुपये का निजीकरण प्लान प्रस्तावित किया। 78 लिस्टेड PSEs में सरकार की हिस्सेदारी को चरणबद्ध तरीके से 51% तक कम करने का सुझाव दिया। पहले चरण में 55 PSEs से 4.60 लाख करोड़ और दूसरे में 23 से 5.40 लाख करोड़ जुट सकते हैं।

चरणलक्षित उद्यमसरकारी हिस्सेदारीसंभावित राजस्व
चरण 155 PSEs75% या कम₹4.60 लाख करोड़
चरण 223 PSEsउच्च हिस्सेदारी₹5.40 लाख करोड़
कुल78 PSEs51% तक₹10 लाख करोड़

सीआईआई का चार-स्तरीय फ्रेमवर्क निवेशक-आधारित दृष्टिकोण, 3-वर्षीय पाइपलाइन और संस्थागत ढांचे पर जोर देता है। सीआईआई रिपोर्ट में चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि यह विकास को गति देगा।

लंबी अवधि की रणनीति

मनीकंट्रोल के अनुसार, 10-वर्षीय कैलेंडर की जरूरत है। वर्ष 1-3 में 25-30 छोटे CPSUs से 1.5-2 लाख करोड़, वर्ष 4-7 में 40-50 मध्यम से 3-4 लाख करोड़, और वर्ष 8-10 में 15-20 बड़े से 5-6 लाख करोड़। निजीकरण से 30-40% दक्षता वृद्धि होती है।

  • गैर-रणनीतिक क्षेत्र: हॉस्पिटैलिटी, ट्रेडिंग।
  • मध्यम क्षेत्र: टेलीकॉम, फार्मा।
  • रणनीतिक: ऊर्जा, बंदरगाह।

राज्य स्तरीय चुनौतियां

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, 308 राज्य PSUs निष्क्रिय हैं। CPSEs में 17 लिक्विडेशन, 24 बंद स्वीकृत, 31 गैर-सक्रिय। निजीकरण में देरी दक्षता हानि का कारण है। पीई सर्वे 2023-24 यह दर्शाता है।

सरकार कुशलता सुधार और निजी भागीदारी बढ़ाने पर फोकस कर रही है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद प्रतिबद्धता बरकरार है।

प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं

निजीकरण से अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, लेकिन निवेशक विश्वास बहाल करना जरूरी। सीआईआई का 10 लाख करोड़ प्लान विकास को गति दे सकता है। सरकार को मूल्यांकन यथार्थवादी रखना होगा।

1999-2004 के अनुभव से सबक लेते हुए गति बढ़ानी होगी। वर्तमान में 78 PSEs में हिस्सेदारी कम करने से बाजार में मूल्य मुक्ति होगी।

मुख्य आंकड़े

  • स्वीकृत: 50 प्रस्ताव, 25 पूर्ण (12 बंदी, 13 बिक्री)।
  • सीआईआई लक्ष्य: ₹10 लाख करोड़ से 78 PSEs।
  • दक्षता लाभ: निजीकरण के 3 वर्षों में 30-40%।
  • राज्य PSUs: 308 निष्क्रिय।

Key Takeaways

  • निजीकरण तीन प्रस्तावित बिक्री रद्द हो सकती हैं, IDBI फेलियर के बाद।
  • बजट 2026 में सरकार प्रतिबद्ध, लेकिन टारगेट हटाए गए।
  • सीआईआई: 10 लाख करोड़ प्लान, 51% हिस्सेदारी तक कमी।
  • 10-वर्षीय रोडमैप से 10 लाख करोड़+ जुट सकते हैं।
  • निजीकरण दक्षता बढ़ाएगा, निवेशक रुचि बहाल जरूरी।

यह अभियान भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। सरकार और उद्योग को मिलकर चुनौतियों का सामना करना होगा। (शब्द संख्या: 950+)

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