इज़रायल के विपक्षी नेता का Netanyahu सरकार पर जोरदार प्रहार
इज़रायल के प्रमुख विपक्षी नेता यैर लैपिड ने बहु-मोर्चा युद्ध की आलोचना करते हुए कहा है कि देश की सेना ‘अधिकतम सीमा से परे तनावग्रस्त’ हो चुकी है। ईरान और लेबनान पर इज़रायली हमलों के बीच लैपिड ने सरकार पर ‘रणनीति के बिना युद्ध’ चलाने का आरोप लगाया है। यह बयान इज़रायल की सुरक्षा चुनौतियों के बीच राजनीतिक तनाव को उजागर करता है।
‘सेना अधिकतम सीमा से परे तनावग्रस्त है,’ – यैर लैपिड
यैर लैपिड कौन हैं?
यैर लैपिड येश अतीद पार्टी के प्रमुख हैं और जनवरी 2023 से इज़रायल के विपक्ष के नेता हैं। पूर्व पत्रकार लैपिड ने 2020 में भी विपक्ष की कमान संभाली थी। विकिपीडिया के अनुसार, वे मध्यमार्गी राजनीतिज्ञ हैं जो राष्ट्रीय एकता पर जोर देते हैं।
- जन्म: 5 नवंबर 1963
- पार्टी: येश अतीद (केंद्रवादी)
- वर्तमान पद: विपक्ष के नेता (2023 से)
हालांकि लैपिड ने ईरान युद्ध के दौरान एकता का संदेश दिया, लेकिन अब वे सरकार की रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं।
बहु-मोर्चा युद्ध का संदर्भ
इज़रायल वर्तमान में ईरान और लेबनान के खिलाफ युद्ध लड़ रहा है। फरवरी 2026 में ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद लैपिड ने एकता की अपील की थी। JNS के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को उन्होंने ट्वीट किया: ‘हम एक साथ खड़े हैं और जीतेंगे।’
लेकिन हालिया बयान में वे सरकार की आलोचना कर रहे हैं। ईरानी खतरों से निपटने में इज़रायल एकजुट है, लेकिन रणनीति की कमी से सेना पर बोझ बढ़ रहा है।
- ईरान मोर्चा: फरवरी 2026 से चल रहा युद्ध, अमेरिकी समर्थन के साथ।
- लेबनान मोर्चा: हिजबुल्लाह के साथ तनाव।
- प्रभाव: सेना की संसाधन सीमित हो गए।
आंकड़ों की झलक
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इज़रायली सेना पर दबाव चरम पर है। फरवरी 2026 से ईरान युद्ध में 100+ हमले हुए हैं। लेबनान सीमा पर दैनिक झड़पें जारी हैं। ये आंकड़े सेना की थकान को दर्शाते हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और राजनीतिक संकट
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार पर अविश्वास प्रस्ताव का दबाव है। लैपिड ने हाल ही में येश अतीद पार्टी के सदस्यों को अविश्वास मत न देने का निर्देश दिया। i24News रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध के दौरान पार्टी ने अविश्वास से पीछे हट लिया।
फिर भी, लैपिड बहु-मोर्चा युद्ध की रणनीति पर असंतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि सेना ‘लिमिट से परे’ है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।
- 2 फरवरी 2026: लैपिड का नेतन्याहू से मिलन, ईरान के खिलाफ एकता।
- 28 फरवरी: ‘कोई गठबंधन-विपक्ष नहीं, केवल एक IDF।’
- वर्तमान: रणनीति की कमी पर हमला।
इज़रायल की सीमा नीति पर लैपिड का रुख
लैपिड ने ‘बाइबिलिकल बॉर्डर्स’ का समर्थन किया है। Middle East Eye के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘यहूदियों के लिए बड़ा, मजबूत देश।’ हालांकि, वे दो-राज्य समाधान के समर्थक रहे हैं।
यह बयान सुरक्षा और विस्तारवाद के बीच संतुलन दिखाता है। ईरान युद्ध के बीच यह विवादास्पद है।
राष्ट्रीय एकता बनाम आलोचना
लैपिड की आलोचना राजनीतिक है, लेकिन युद्धकालीन एकता को चुनौती दे रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि सेना पर बहु-मोर्चा दबाव से थकान बढ़ रही है। अमेरिका का समर्थन मजबूत है, लेकिन घरेलू असंतोष बढ़ सकता है।
इज़रायल की वायुसेना ने ईरान पर सटीक हमले किए हैं। लेबनान में हिजबुल्लाह ठिकानों को निशाना बनाया गया। फिर भी, लैपिड का मानना है कि रणनीति की कमी घातक साबित हो सकती है।
- सकारात्मक: विपक्ष ने अविश्वास रोक दिया।
- नकारात्मक: सेना की स्थिति चिंताजनक।
- भविष्य: रणनीतिक पुनर्विचार जरूरी।
Key Takeaways
- यैर लैपिड ने इज़रायली सेना को ‘अधिकतम से परे तनावग्रस्त’ बताया।
- ईरान और लेबनान पर बहु-मोर्चा युद्ध बिना रणनीति चल रहा है।
- फरवरी 2026 से ईरान युद्ध, लैपिड ने शुरुआत में एकता दिखाई।
- येश अतीद ने अविश्वास प्रस्ताव रोका, लेकिन आलोचना जारी।
- लैपिड ‘बाइबिलिकल बॉर्डर्स’ समर्थक, सुरक्षा पर जोर।
- सेना पर दबाव: 100+ ईरानी हमले, सीमाई झड़पें।
यह संकट इज़रायल की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है। लैपिड की चेतावनी राष्ट्रीय बहस छेड़ रही है।













