लोकसभा में गूंजी ‘धुरंधर’ कव्वाली: शंभवी चौधरी का विपक्ष पर तीखा तंज
नई दिल्ली: संसद के गलियारों में अक्सर गंभीर चर्चाएं होती हैं, लेकिन कभी-कभी कुछ ऐसे पल भी आते हैं जब संस्कृति और राजनीति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। हाल ही में, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की युवा सांसद शंभवी चौधरी ने लोकसभा में वित्त विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान विपक्ष पर एक अनूठी और धारदार शैली में निशाना साधा। उन्होंने एक पुरानी कव्वाली के बोलों को, जिन्हें हाल ही में ‘धुरंधर’ फिल्म में नया जीवन मिला था, का इस्तेमाल करते हुए विपक्ष की नकारात्मक राजनीति पर कटाक्ष किया। शंभवी, जो सबसे युवा सांसदों में से एक हैं, ने अपनी बातों से सदन में एक यादगार पल जोड़ा।
सांस्कृतिक तड़के के साथ राजनीतिक वार
शंभवी चौधरी ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि वे केवल नकारात्मक राजनीति करते हैं, जिसे जनता पहले ही नकार चुकी है। उन्होंने प्रसिद्ध कव्वाली के बोलों को उद्धृत किया: “नाज़ो अंदाज़ से कहते हैं कि जीना होगा, ज़हर भी देते हैं तो कहते हैं कि पीना होगा, जब मैं पीता हूँ तो कहते हैं कि मरता भी नहीं, जब मैं मरता हूँ तो कहते हैं कि जीना होगा।” यह कव्वाली मूल रूप से 1960 की फिल्म ‘बरसात की रात’ में दिखाई गई थी और पिछले साल ‘धुरंधर’ फिल्म में इसके रीमिक्स ने इसे फिर से लोकप्रिय बना दिया था। शंभवी ने इस शेर के माध्यम से विपक्ष के चरित्र पर टिप्पणी की, जो उनके अनुसार, रोज झूठ, फरेब और अफवाहों का जहर फैलाने का प्रयास करता है, लेकिन देश ने उनकी नकारात्मक राजनीति को बहुत पहले ही अस्वीकार कर दिया है।
विपक्ष की ‘मृत’ अर्थव्यवस्था पर सवाल
सांसद शंभवी चौधरी ने विपक्ष के उन बुद्धिजीवियों पर भी निशाना साधा जो भारत की अर्थव्यवस्था को ‘मृत’ बताते हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “मजाक की बात तो यह है सर कि जो खुद इलेक्टोरली डेड हो गए हैं, वे हमारी अर्थव्यवस्था को डेड कहते हैं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अर्थव्यवस्था को ‘मृत’ कहना केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपमान नहीं है, बल्कि यह किसानों, मजदूरों, वैज्ञानिकों और स्टार्टअप संस्थापकों का भी अपमान है। यह बयानबाजी ऐसे समय में आई है जब देश की अर्थव्यवस्था विभिन्न वैश्विक और घरेलू कारकों के कारण चर्चा का विषय बनी हुई है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और अन्य वैश्विक संस्थाएं भारत की अर्थव्यवस्था को एक ‘ब्राइट स्पॉट’ के रूप में देख रही हैं, ऐसे में विपक्ष का यह रवैया सवालों के घेरे में है।
लोकसभा में 18वीं बार राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा
यह घटना लोकसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हो रही चर्चा के दौरान हुई। 18वीं लोकसभा, जिसका गठन 2024 के आम चुनावों के बाद हुआ है, पहली बार इस तरह के महत्वपूर्ण विधायी सत्रों का अनुभव कर रही है। इस सत्र में, विभिन्न महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा की जा रही है, जिसमें वित्त विधेयक 2026 भी शामिल है। लोकसभा, भारत की संसद का निचला सदन, देश की विधायी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। 543 सदस्यों वाली यह सभा, भारत के लोगों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुनी जाती है और पांच साल के कार्यकाल के लिए काम करती है। 2024 के चुनावों के बाद, 18वीं लोकसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को बहुमत मिला, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) प्रमुख सहयोगी है।
शंभवी चौधरी: एक युवा आवाज़
शंभवी चौधरी, जो 2024 के लोकसभा चुनावों में बिहार की समस्तीपुर सीट से जीतकर संसद पहुंचीं, सबसे युवा सांसदों में से एक हैं। 25 साल की उम्र में, उन्होंने राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। वह एक तीसरी पीढ़ी की राजनेता हैं; उनके पिता, अशोक चौधरी, जदयू के एक प्रमुख नेता हैं और बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं। शंभवी ने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है, और उनका मानना है कि उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को समझने और हल करने में मदद करेगी। उनकी संसद में उपस्थिति युवा पीढ़ी के राजनीति में बढ़ते जुड़ाव का प्रतीक है।
संसद में विपक्ष की भूमिका और चुनौतियां
लोकसभा में विपक्ष की भूमिका सरकार पर अंकुश रखने और जनता की आवाज को उठाने की होती है। हालांकि, हाल के वर्षों में, विपक्ष के सामने कई चुनौतियां आई हैं। 2024 के आम चुनावों में, भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (INDIA) ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन सत्तारूढ़ NDA को स्पष्ट बहुमत मिला। विपक्ष, जिसका नेतृत्व कांग्रेस पार्टी कर रही है, अक्सर सरकार की नीतियों और आर्थिक प्रबंधन पर सवाल उठाता रहा है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी संसद में विपक्ष की ओर से मुखर रहे हैं। इस तरह के माहौल में, शंभवी चौधरी जैसे युवा सांसदों द्वारा अपनाई गई रचनात्मक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शैली, राजनीतिक चर्चाओं में एक नया आयाम जोड़ती है।
“विपक्ष का काम केवल आलोचना करना नहीं, बल्कि रचनात्मक सुझाव देना भी है। नकारात्मकता से देश आगे नहीं बढ़ता, बल्कि सकारात्मक सोच और ठोस नीतियों से प्रगति होती है।”
आर्थिक विकास और ‘विकसित भारत’ का एजेंडा
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान, सरकार ने ‘विकसित भारत’ के अपने दृष्टिकोण को दोहराया, जिसका लक्ष्य 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। इस एजेंडे में आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय, और समावेशी प्रगति पर जोर दिया गया है। सरकार का दावा है कि विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, और अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। वहीं, विपक्ष आर्थिक विकास की गति, रोजगार सृजन, और मुद्रास्फीति जैसी चिंताओं को उठाता रहा है। इस तरह के वाद-विवाद संसद की कार्यप्रणाली का एक अभिन्न अंग हैं, जो सरकार को जवाबदेह ठहराने और जनहित के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करते हैं।
मुख्य बातें (Key Takeaways)
- लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद शंभवी चौधरी ने लोकसभा में वित्त विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान विपक्ष पर एक पुरानी कव्वाली के बोलों का उपयोग करके निशाना साधा।
- उन्होंने विपक्ष पर केवल नकारात्मक राजनीति करने का आरोप लगाया, जिसे जनता ने नकार दिया है।
- शंभवी ने विपक्ष के उन लोगों पर भी कटाक्ष किया जो भारत की अर्थव्यवस्था को ‘मृत’ बताते हैं, और कहा कि यह किसानों, मजदूरों और वैज्ञानिकों का भी अपमान है।
- यह घटना राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हो रही चर्चा के दौरान हुई, जो 18वीं लोकसभा का एक महत्वपूर्ण सत्र है।
- शंभवी चौधरी 2024 में निर्वाचित सबसे युवा सांसदों में से एक हैं और एक राजनीतिक परिवार से आती हैं।
- संसद में विपक्ष की भूमिका सरकार पर अंकुश रखना है, लेकिन वर्तमान में विपक्ष को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
- सरकार ‘विकसित भारत’ के अपने एजेंडे पर जोर दे रही है, जबकि विपक्ष आर्थिक चिंताओं को उठा रहा है।
- सांसद शंभवी चौधरी का यह अनूठा अंदाज राजनीतिक चर्चाओं में एक नया आयाम जोड़ता है, जो संस्कृति और राजनीति के संगम को दर्शाता है।













