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संसदीय पैनल ने MoSPI को फंड का बेहतर उपयोग करने की सलाह दी

संसदीय पैनल ने सांख्यिकी मंत्रालय को दिए महत्वपूर्ण निर्देश

भारत की सांख्यिकी प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, संसद की स्थायी समिति ने सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) को आवंटित बजट का अनुकूलतम उपयोग करने का निर्देश दिया है। मंत्रालय को वित्तीय कमी की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जो राष्ट्रीय डेटा संग्रह और सांख्यिकीय प्रणाली को प्रभावित कर रही है।

संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने अपनी 35वीं रिपोर्ट में MoSPI के 2026-27 के बजट मांगों की समीक्षा करते हुए यह महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। समिति ने मंत्रालय को आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त बजट की मांग करने की भी सलाह दी है।

बजटीय संकट: आवश्यकता और आवंटन में बड़ा अंतर

MoSPI को एक गंभीर वित्तीय चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। मंत्रालय को केवल 4,522.25 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जबकि इसकी वास्तविक मांग 5,826.11 करोड़ रुपये है। यह लगभग 1,300 करोड़ रुपये की कमी का प्रतिनिधित्व करता है।

यह कमी विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं को प्रभावित कर रही है:

  • Support for Statistical Strengthening (SSS) Scheme – राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सांख्यिकीय क्षमता बढ़ाने के लिए
  • 8वीं आर्थिक जनगणना की तैयारी और प्रशिक्षण कार्यक्रम
  • आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS), घरेलू आय सर्वेक्षण, और अन्य महत्वपूर्ण सर्वेक्षण
  • सभी भारत ऋण और निवेश सर्वेक्षण (AIDIS)

SSS योजना: सांख्यिकीय ढांचे को मजबूत करने का प्रयास

Support for Statistical Strengthening (SSS) योजना एक महत्वपूर्ण केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जिसका कुल आवंटन 650.43 करोड़ रुपये है।यह योजना राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को महत्वपूर्ण सांख्यिकीय गतिविधियों को संचालित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

SSS योजना के नौ मुख्य घटक हैं:

  • सांख्यिकीय अनुप्रयोग और आईटी समर्थन (हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर सहित)
  • राज्य रणनीतिक सांख्यिकीय योजना (SSSP) की तैयारी
  • तकनीकी समूहों की सिफारिशों का कार्यान्वयन
  • डेटा संग्रह और प्रसार में सुधार

योजना के क्रियान्वयन के लिए विभिन्न राज्यों ने भारत सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। उदाहरण के लिए, मेघालय ने 24 जुलाई, 2018 को MoU पर हस्ताक्षर किए थे।

वित्तीय कमी के गंभीर परिणाम

MoSPI ने संसदीय समिति को सूचित किया है कि कम बजट के कारण कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित होंगे। विशेषकर 2026-27 की पहली दो तिमाहियों में:

  • आईटी बुनियादी ढांचे (टैबलेट, लैपटॉप) के लिए अग्रिम लागत को वित्तपोषित करने में असमर्थता
  • क्षेत्रीय कार्य के लिए कर्मचारियों को जुटाने में कठिनाई
  • क्षेत्र कर्मचारियों और अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय (DES) के कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण और कार्यशालाओं का संचालन न हो पाना

ये कमियां राष्ट्रीय स्तर के डेटा की गुणवत्ता में कमी और सांख्यिकीय प्रणालियों के डिजिटल रूपांतरण में बाधा डाल सकती हैं।

संसदीय पैनल की सिफारिशें

MoSPI के लिए संसद की स्थायी समिति की प्रमुख सिफारिशें इस प्रकार हैं:

  • अनुकूलतम फंड उपयोग: आवंटित बजट का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना
  • अतिरिक्त बजट की मांग: यदि आवश्यक हो तो पूरक बजट की मांग करना
  • डिजिटल डैशबोर्ड: समेकित डेटा के लिए एक एकीकृत डिजिटल डैशबोर्ड विकसित करना
  • राष्ट्रीय बाल सर्वेक्षण: इस महत्वपूर्ण सर्वेक्षण को तेजी से पूरा करना
  • MPLAD पोर्टल में सुधार: सदस्य-क्षेत्र विकास योजना के पोर्टल को बेहतर बनाना

डिजिटल रूपांतरण की चुनौती

विश्व बैंक की सहायता से National Program for Improving the Quality of Statistics in India (NPIQSI) भारत की सांख्यिकीय आईटी आर्किटेक्चर को मजबूत करने और केंद्र-राज्य समन्वय में सुधार के लिए काम कर रहा है।

यह कार्यक्रम भारत के सांख्यिकीय पारिस्थितिकी तंत्र को आधुनिकीकरण करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। हालांकि, अपर्याप्त वित्तपोषण इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धीमा कर सकता है।

भविष्य की दिशा

संसदीय समिति की सिफारिशें MoSPI के लिए एक स्पष्ट संदेश हैं कि भारत की सांख्यिकीय प्रणाली को मजबूत करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन आवश्यक हैं। मंत्रालय को न केवल वर्तमान बजट का सर्वोत्तम उपयोग करना चाहिए, बल्कि अपनी वास्तविक आवश्यकताओं को स्पष्ट करते हुए अतिरिक्त बजट की मांग भी करनी चाहिए।

एक मजबूत सांख्यिकीय प्रणाली नीति निर्माण, विकास योजना और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए, इस क्षेत्र में निवेश केवल एक खर्च नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास में एक महत्वपूर्ण निवेश है।

मुख्य बातें (Key Takeaways)

  • संसद की स्थायी समिति ने MoSPI को बजट का अनुकूलतम उपयोग करने का निर्देश दिया है
  • मंत्रालय को 5,826.11 करोड़ की जरूरत है, लेकिन केवल 4,522.25 करोड़ आवंटित हुए हैं
  • Support for Statistical Strengthening योजना महत्वपूर्ण है, लेकिन अपर्याप्त वित्तपोषण से प्रभावित है
  • डिजिटल डैशबोर्ड विकास और राष्ट्रीय बाल सर्वेक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए
  • भारत की सांख्यिकीय प्रणाली को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त बजट आवश्यक है
  • सांख्यिकीय क्षमता में सुधार राष्ट्रीय विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है

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