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संसद का विशेष सत्र: 28-29 मार्च को होगी बैठक, जानिए कारण

संसद का विशेष सत्र: 28-29 मार्च को होगी बैठक, जानिए कारण

नई दिल्ली: भारत की संसद के बजट सत्र के बीच, सरकार ने 28 और 29 मार्च को, यानी महीने के आखिरी सप्ताहांत में, संसद की बैठकें आयोजित करने का सुझाव दिया है। इस कदम का उद्देश्य सप्ताह के दिनों में पड़ने वाली छुट्टियों के कारण हुए विधायी कार्य के नुकसान की भरपाई करना है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब बजट सत्र का दूसरा चरण कई मुद्दों पर हंगामे के कारण बाधित हुआ है।

सत्र की आवश्यकता क्यों पड़ी?

संसदीय कार्य मंत्री, श्री किरेन रिजिजू ने विभिन्न विपक्षी दलों से संपर्क कर इस प्रस्ताव पर चर्चा की है। सूत्रों के अनुसार, इस अतिरिक्त बैठक का मुख्य कारण सरकार के विधायी एजेंडे को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय सुनिश्चित करना है। इसके अतिरिक्त, यह भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि सरकार महिलाओं के आरक्षण कानून को परिसीमन से अलग करके उसके त्वरित कार्यान्वयन के लिए संशोधन ला सकती है।

बजट सत्र 2026 का संक्षिप्त विवरण

संसद का बजट सत्र 28 जनवरी 2026 को शुरू हुआ और 2 अप्रैल 2026 तक चलने वाला है। यह सत्र दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहले चरण की शुरुआत 28 जनवरी को हुई और यह 13 फरवरी तक चला। इसके बाद एक अवकाश रहा, और सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च को फिर से शुरू हुआ। इस सत्र में कुल 30 बैठकें निर्धारित हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 28 जनवरी को संसद के दोनों सदनों को संबोधित किया था। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26, 29 जनवरी को और केंद्रीय बजट 2026-27, 1 फरवरी को प्रस्तुत किया गया। सत्र के एजेंडे में मुख्य रूप से वित्त विधेयक, 2026 का परिचय, विचार और पारित होना शामिल है।

सप्ताहांत सत्र के पीछे के कारण

सरकार ने विपक्षी दलों को सूचित किया है कि इस महीने कई सार्वजनिक छुट्टियां जैसे गुड़ी पड़वा, उगादी, ईद और राम नवमी सप्ताह के दिनों में पड़ रही हैं। इन छुट्टियों के कारण विधायी कार्यों के कैलेंडर में संपीड़न हुआ है, जिससे लंबित विधेयकों को निपटाने के लिए 28-29 मार्च को शनिवार-रविवार को बैठकें आवश्यक हो गई हैं।

संभावित महत्वपूर्ण विधेयक

सूत्रों के अनुसार, एक महत्वपूर्ण विधेयक महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से अलग करने से संबंधित हो सकता है। इस विधेयक का उद्देश्य विधानसभाओं और संसद सीटों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करना है, और यह उम्मीद की जाती है कि इसे इस सत्र में पेश किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 को भी पारित कराने की सरकार की मंशा है, जिसे पिछले साल अगस्त में लोकसभा में पेश किया गया था।

सत्र में व्यवधान और विपक्ष की मांगें

बजट सत्र के दूसरे चरण में विपक्षी विरोध प्रदर्शनों के कारण बार-बार व्यवधान देखा गया है। इस बीच, विपक्ष पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा की मांग कर रहा है। हालांकि सरकार ने इस पर तत्काल कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि वे इस पर विचार कर सकते हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी व्यवधानों के कारण प्रश्नकाल को बाधित करने वाले विपक्षी सांसदों से सदन की कार्यवाही में सहयोग करने की अपील की है।

संसद की बैठकें: एक नजर

भारतीय संसद का एक सत्र वह अवधि होती है जिसके दौरान सदन लगभग हर दिन निर्बाध रूप से बैठता है। भारत में संसद का कोई निश्चित कैलेंडर नहीं है। परंपरा के अनुसार, साल में तीन सत्र होते हैं: बजट सत्र (फरवरी से मई), मानसून सत्र (जुलाई से सितंबर), और शीतकालीन सत्र (नवंबर से दिसंबर)। बजट सत्र सबसे लंबा होता है और इसमें आमतौर पर राष्ट्रपति का अभिभाषण, केंद्रीय बजट की प्रस्तुति और उस पर चर्चा शामिल होती है। संसद के दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतराल नहीं हो सकता है।

संसदीय कार्यप्रणाली और नियम

संसद के सत्र बुलाने का अधिकार सरकार के पास होता है। यह निर्णय संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति द्वारा लिया जाता है, और राष्ट्रपति द्वारा इसे औपचारिक रूप दिया जाता है। सत्र के दौरान, प्रश्नकाल, विधेयकों पर चर्चा और पारित होना, तथा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस जैसे कार्य किए जाते हैं। किसी भी विधेयक को पारित करने के लिए, उसे दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक है।

मुख्य बातें (Key Takeaways)

  • सरकार ने बजट सत्र के दौरान छुट्टियों के कारण हुए विधायी कार्य के नुकसान की भरपाई के लिए 28-29 मार्च को संसद की बैठकें आयोजित करने का प्रस्ताव दिया है।
  • यह कदम सत्र के दूसरे चरण में व्यवधानों और कई लंबित विधेयकों को देखते हुए उठाया गया है।
  • संभावित महत्वपूर्ण विधेयकों में महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से अलग करने वाला विधेयक और दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक शामिल हैं।
  • विपक्ष ने पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा की मांग की है, जिस पर सरकार विचार कर सकती है।
  • बजट सत्र 28 जनवरी से 2 अप्रैल 2026 तक दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें कुल 30 बैठकें होंगी।
  • संसद के दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतराल नहीं हो सकता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि वर्ष में कम से कम दो बैठकें हों।
  • भारत में संसद का कोई निश्चित कैलेंडर नहीं है, और सत्रों का निर्धारण सरकार द्वारा किया जाता है।

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