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सोने की कीमत में आया भूचाल! जानें क्यों $4,480 के पार पहुंचा सोना, क्या है आगे की राह?

सोने की कीमत में आया भूचाल! जानें क्यों $4,480 के पार पहुंचा सोना, क्या है आगे की राह?

साल 2025 खत्म होने को है और सोने ने इस साल जो रिकॉर्ड बनाए हैं, उन्हें देखकर निवेशक हैरान हैं। सोमवार, 22 दिसंबर 2025 को सोना 4,480 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया, जो इस साल 50वीं बार एक नया सर्वकालिक उच्च स्तर है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों का सीधा परिणाम है। सोने की यह चमक अचानक नहीं आई है; इसके पीछे कई बड़े कारण हैं जो निवेशकों को इस पीली धातु की ओर आकर्षित कर रहे हैं। आइए जानते हैं क्या हैं वे प्रमुख कारक जिन्होंने सोने को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचाया है और आने वाले समय में इसके लिए क्या संभावनाएं हैं।

भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश

सोने की इस रिकॉर्ड तोड़ रैली का एक बड़ा कारण गहराता भू-राजनीतिक तनाव है, खासकर संयुक्त राज्य अमेरिका और वेनेजुएला के बीच। सीबीएस न्यूज और ब्लूमबर्ग जैसे प्रमुख मीडिया आउटलेट्स के अनुसार, अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल टैंकरों, जैसे कि टैंकर स्किपर, को जब्त करना शुरू कर दिया है और प्रतिबंधों को कड़ा कर दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल टैंकरों की “पूर्ण और कुल नाकेबंदी” की घोषणा की है, जिससे इस तेल-निर्भर अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। अमेरिकी नौसेना ने दक्षिणी कैरेबियन में अपनी संपत्ति तैनात की है, जिसका उद्देश्य कथित तौर पर ड्रग कार्टेल का मुकाबला करना है। इसके साथ ही, अमेरिकी ट्रेजरी ने 10 दिसंबर को छह तेल टैंकरों और कई शिपिंग कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए, और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के परिवार के सदस्यों पर भी अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए गए। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, निवेशक अक्सर ऐसी अनिश्चितता के समय में सोने को एक सुरक्षित निवेश (safe-haven asset) मानते हैं, जिससे इसकी मांग में भारी उछाल आया है।

अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें

भू-राजनीतिक जोखिमों के अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों ने भी सोने की कीमतों को बढ़ावा दिया है। साल 2025 में, फेडरल रिजर्व ने तीन बार ब्याज दरों में कटौती की है, जिससे संघीय कोष दर (federal funds rate) दिसंबर की बैठक तक 3.5% से 3.75% की सीमा में आ गई है। इन्वेस्टोपीडिया के अनुसार, कम ब्याज दरें सोने जैसे गैर-उपज वाले (non-yielding) परिसंपत्तियों को रखने की अवसर लागत (opportunity cost) को कम करती हैं, जिससे वे निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो जाते हैं। 2026 में और अधिक दरों में कटौती की उम्मीदें भी सोने की तेजी को समर्थन दे रही हैं। इसके अलावा, कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी विदेशी खरीदारों के लिए सोने को अधिक किफायती बना दिया है। इकोनॉमिक टाइम्स जैसे भारतीय समाचार पत्रों में भी इन रुझानों पर व्यापक रिपोर्टिंग की गई है।

केंद्रीय बैंकों की बढ़ती सोने की खरीद

सिर्फ व्यक्तिगत निवेशक ही नहीं, बल्कि केंद्रीय बैंक भी सोने के प्रति अपना रुझान बढ़ा रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अक्टूबर में केंद्रीय बैंकों ने अकेले 53 टन सोना खरीदा, जो इस वर्ष की सबसे बड़ी मासिक मांग थी। कुल मिलाकर, अक्टूबर तक केंद्रीय बैंकों की कुल खरीद 254 टन तक पहुंच गई है, जिसमें नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड जैसे संस्थानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बढ़ती सरकारी ऋण स्तरों और फिएट मुद्राओं के मूल्यह्रास की चिंताओं ने “डिबेसमेंट ट्रेड” को बढ़ावा दिया है, जहां निवेशक फिएट मुद्राओं से बाहर निकलकर सोने जैसी ठोस परिसंपत्तियों की ओर बढ़ रहे हैं। गोल्ड-बैक्ड ईटीएफ (Exchange Traded Funds) में भी मजबूत प्रवाह देखा गया है, जिसमें मई को छोड़कर इस साल हर महीने होल्डिंग्स बढ़ी हैं, यह भी इसकी बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है।

2025 का ऐतिहासिक प्रदर्शन

सोने ने 2025 में वास्तव में एक ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है, इस साल इसकी कीमत में लगभग 70% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह 1979 के बाद से सोने का सबसे मजबूत वार्षिक प्रदर्शन है। ब्लूमबर्ग और नेशनथाईलैंड ने बताया कि यह इस साल 50वीं बार था जब कीमती धातु ने एक नया रिकॉर्ड बनाया। सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि चांदी ने भी इस तेजी में भागीदारी की। ट्रेडिंग डेटा के अनुसार, सोमवार को स्पॉट गोल्ड 4,480.25 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जबकि चांदी भी रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई, जो 69.71 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। इन्वेस्टिंग.कॉम जैसे प्लेटफॉर्म भी इन तेजी के रुझानों की पुष्टि करते हैं।

आगे की राह: 2026 में सोने का भविष्य

आगे 2026 को देखते हुए, सोने की रैली की गति पर विश्लेषकों के विचार भिन्न हैं। जबकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान गति धीमी हो सकती है और कीमतों में सुधार देखा जा सकता है, वहीं गोल्डमैन सैक्स जैसे प्रतिष्ठित वित्तीय संस्थानों ने 2026 तक $4,900 प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान लगाया है। कुछ तो $5,000 प्रति औंस तक पहुंचने की भी संभावना देख रहे हैं। यह सब आगामी भू-राजनीतिक परिदृश्य और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति निर्णयों पर निर्भर करेगा। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता पर पहले की धमकियां और संप्रभु ऋण स्तरों के बारे में चल रही चिंताएं भी इस धातु की सुरक्षित-हेवन अपील को बढ़ाती रहेंगी।

सारांश

सारांश में, 2025 सोने के लिए एक अभूतपूर्व वर्ष रहा है, जिसमें भू-राजनीतिक उथल-पुथल, विशेष रूप से अमेरिका-वेनेजुएला तनाव, और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा लगातार ब्याज दरों में कटौती ने इसकी कीमतों को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। केंद्रीय बैंकों की बढ़ती खरीद और निवेशकों के सुरक्षित-हेवन परिसंपत्तियों की ओर बढ़ने की प्रवृत्ति ने भी इस तेजी को बल दिया है। हालांकि भविष्य के अनुमान अलग-अलग हैं, पर सोने का आकर्षण वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बरकरार रहने की संभावना है।

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