सरवेपल्ली में जल संकट: काकानी और सोमिरेड्डी के बीच आरोप‑प्रत्यारोप का नया अध्याय
नेल्लोर जिले के सरवेपल्ली विधानसभा क्षेत्र में जल की टपकती बूंदें अब राजनीति की आग में घुली हुई हैं। येसआरसीपी के नेल्लोर जिला अध्यक्ष काकानी गोवर्धन रेड्डी और तद्प (TDP) के विधायक सोमिरेड्डी चंद्र मोहन रेड्डी के बीच सिंचाई पानी की कमी को लेकर तीखे आरोप‑प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। यह टकराव न केवल स्थानीय किसानों की पीड़ा को उजागर करता है, बल्कि राज्य‑स्तर की जल‑नीति पर भी सवाल उठाता है।
पृष्ठभूमि: जल‑स्रोत और वर्तमान स्थिति
सरवेपल्ली क्षेत्र मुख्यतः सोमसिला जलाशय और कंडलेरु जलाशय पर निर्भर करता है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, सोमसिला में लगभग 68 टीएमसी और कंडलेरु में 52 टीएमसी पानी उपलब्ध है, जो आयाकुट (आधारभूत सिंचाई क्षेत्र) को पर्याप्त रूप से जल प्रदान करने के लिए पर्याप्त माना जाता है। फिर भी, कई ऊँचे पहाड़ी गांवों में जल‑संचालन और रख‑रखाव की समस्याओं के कारण पानी की कमी महसूस की जा रही है।
काकानी के आरोप
काकानी ने कहा कि सरकार ने जल‑संचालन में लापरवाही बरती है, जिससे किसानों को गंभीर नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा:
“सरवेपल्ली में जल‑संकट केवल तकनीकी समस्या नहीं, यह प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। हमें तुरंत कार्यवाही चाहिए,”
और उन्होंने द हिन्दू में प्रकाशित अपने बयान का हवाला दिया।
- काकानी ने कहा कि कई तालाब और नहरें बंद या क्षतिग्रस्त हैं।
- कृषि उत्पादन में गिरावट के कारण किसानों की आय में 30% तक कमी आई है।
- सरकार को जल‑संचालन के लिए एक विशेष टास्क‑फोर्स बनानी चाहिए।
सोमिरेड्डी का जवाब
सोमिरेड्डी ने इन आरोपों को “राजनीतिक चाल” कहा और कहा कि जल‑संकट का मूल कारण राज्य‑स्तर की नीतियों में असंगतता है। उन्होंने कहा:
“हमारी मांग सिर्फ जल नहीं, बल्कि जल‑संचालन की पारदर्शिता और समय पर रख‑रखाव है,”
और उन्होंने सरवेपल्ली रिज़र्वॉयर की आधिकारिक वेबसाइट का उल्लेख किया, जहाँ जल‑स्तर की वास्तविक जानकारी उपलब्ध है।
- सोमिरेड्डी ने कहा कि जल‑संकट का समाधान केवल जलाशयों में पानी बढ़ाने से नहीं होगा, बल्कि नहरों की सफाई और जल‑संचालन की निगरानी से होगा।
- उन्होंने राज्य सरकार को जल‑संसाधन विभाग (AP Water Resources Department) के साथ मिलकर एक दीर्घकालिक योजना बनाने का आग्रह किया।
- किसानों को तत्काल राहत के लिए बीज और उर्वरक सब्सिडी की व्यवस्था की जानी चाहिए।
मुख्य बिंदु: जल‑संकट के कारण और संभावित समाधान
- भौगोलिक कारण: ऊँचे पहाड़ी क्षेत्रों में जल‑संचालन की कठिनाई।
- तकनीकी कारण: नहरों की जंग, अवरुद्ध जल‑गेट, और पुरानी पाइपलाइन।
- प्रशासनिक कारण: जल‑संचालन के लिए स्पष्ट जिम्मेदारी का अभाव।
- संभावित समाधान:
- नहरों की नियमित सफाई और मरम्मत।
- डिजिटल जल‑संचालन मॉनिटरिंग सिस्टम की स्थापना।
- किसानों को जल‑संकट बीमा और सब्सिडी प्रदान करना।
समापन: इस टकराव का भविष्य में क्या असर होगा?
सरवेपल्ली में जल‑संकट पर काकानी और सोमिरेड्डी के बीच चल रहा यह विवाद न केवल स्थानीय किसानों की जीविका को प्रभावित कर रहा है, बल्कि राज्य‑स्तर की जल‑नीति पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है। यदि दोनों पक्ष मिलकर एक ठोस जल‑संचालन योजना तैयार करते हैं, तो यह क्षेत्र के कृषि उत्पादन को पुनर्जीवित कर सकता है और भविष्य में समान समस्याओं से बचा सकता है। अन्यथा, राजनीतिक टकराव जल‑संकट को और बढ़ा सकता है, जिससे किसानों की निराशा और आर्थिक नुकसान में इजाफा होगा।













