ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026: केरल के लिए एक चुनौती
भारत सरकार ने हाल ही में ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी (NEP) 2026 जारी किया, जिसमें बिजली क्षेत्र के भविष्य को आकार देने के लिए कई बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं। जबकि यह पॉलिसी राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार और वित्तीय स्थिरता को लक्ष्य बनाती है, केरल के बिजली मंत्री के. कृष्णनकुट्टी ने इस दस्तावेज़ के कुछ प्रमुख बिंदुओं को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
पॉलिसी के प्रमुख प्रस्ताव
- बिजली आपूर्ति में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और ओपन एक्सेस को आसान बनाना।
- क्रॉस‑सब्सिडी और अतिरिक्त सरचार्ज को घटाकर बड़े उपभोक्ताओं को रियायती दरें देना।
- नवीकरणीय ऊर्जा (RE) के बड़े पैमाने पर एकीकरण के लिए ग्रिड स्थिरता को सुदृढ़ करना।
- डिस्कॉम्स की वित्तीय स्वास्थ्य में सुधार के लिए स्वचालित टैरिफ इंडेक्सेशन का प्रस्ताव।
केरल में संभावित प्रतिकूल प्रभाव
केरल की अनूठी ऊर्जा संरचना और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए, मंत्री कृष्णनकुट्टी ने निम्नलिखित बिंदुओं को जोखिम के रूप में उजागर किया है:
“ड्राफ्ट NEP के कुछ प्रावधान, विशेषकर प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने और क्रॉस‑सब्सिडी को घटाने वाले, केरल की मौजूदा वितरण मॉडल को अस्थिर कर सकते हैं और आम जनता के लिए बिजली की कीमतें बढ़ा सकते हैं,”
उनके अनुसार, केरल में पहले से ही उच्च AT&C (एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल) नुकसान हैं, और नई नीति के तहत इन नुकसानों को कम करने के लिए लागू किए जाने वाले कठोर मानक राज्य की वित्तीय स्थिति को और तनावपूर्ण बना सकते हैं।
मुख्य चिंताएँ – बुलेट पॉइंट में
- क्रॉस‑सब्सिडी में कटौती: ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में बिजली की लागत बढ़ेगी, जिससे सामाजिक असमानता बढ़ सकती है।
- ओपन एक्सेस का विस्तार: बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं को डिस्कॉम से बाहर कर दिया जाएगा, जिससे राज्य की राजस्व धारा घटेगी।
- स्वचालित टैरिफ इंडेक्सेशन: टैरिफ में समय पर वृद्धि न होने पर इंडेक्सेशन लागू होगा, जिससे उपभोक्ताओं पर अचानक मूल्य वृद्धि का बोझ पड़ेगा।
- नवीकरणीय ऊर्जा के लिए नई ग्रिड मानक: केरल की पहाड़ी भौगोलिक स्थिति में ग्रिड अपग्रेड की लागत अत्यधिक होगी।
- डिस्कॉम के वित्तीय दबाव: मौजूदा ऋण बोझ पर अतिरिक्त नियामक दायित्वों से दिवालिया होने का जोखिम बढ़ेगा।
सरकारी दस्तावेज़ और विस्तृत विश्लेषण
नीति के पूर्ण विवरण के लिए मंत्रालय की आधिकारिक PDF देखें। इसके अलावा, The Hindu ने इस ड्राफ्ट पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें विभिन्न राज्यों की प्रतिक्रियाओं को भी कवर किया गया है।
केरल सरकार की संभावित प्रतिक्रिया
केरल सरकार ने पहले ही इस ड्राफ्ट पर सार्वजनिक टिप्पणी देने का आह्वान किया है। मंत्री कृष्णनकुट्टी ने कहा है कि राज्य की विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, नीति में आवश्यक संशोधनों की मांग की जाएगी। संभावित कदमों में शामिल हैं:
- क्रॉस‑सब्सिडी को पुनः मूल्यांकन कर स्थानीय स्तर पर विशेष छूट देना।
- डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति को स्थिर करने के लिए केंद्र से अतिरिक्त सहायता की मांग।
- ग्रिड अपग्रेड के लिए राज्य‑केंद्र साझेदारी मॉडल का प्रस्ताव।
निष्कर्ष
ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 भारत के ऊर्जा भविष्य को दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है, परंतु इसके कुछ प्रमुख प्रावधान केरल जैसे विशेष राज्य के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। के. कृष्णनकुट्टी की चेतावनी इस बात का संकेत देती है कि नीति निर्माण में राज्य‑स्तर की विविधताओं को पर्याप्त रूप से शामिल करना आवश्यक है। सार्वजनिक टिप्पणी अवधि के दौरान केरल की आवाज़ को सुनना, नीति को संतुलित और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।













