राजस्थान में कांग्रेस कल्याणकारी योजनाओं की बहाली: गहलोत ने पीएम को लिखा पत्र
जैपुर – पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक औपचारिक पत्र लिखकर राजस्थान में कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई कई प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं को मूल रूप में बहाल करने की मांग की है। यह पत्र प्रधानमंत्री की 2 अक्टूबर 2023 को चित्तौड़गढ़ में दी गई सार्वजनिक आश्वासन के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा सरकार के अधीन भी पिछले सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रम बंद नहीं किए जाएंगे।
पत्र का मुख्य संदेश
“आपके चित्तौड़गढ़ के आश्वासन को जनता ने ‘मोदी की गारंटी’ के रूप में स्वीकार किया है। कृपया इन वादों को पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाएँ,” गहलोत ने लिखा।
गहलोत ने इस पत्र में कई विशिष्ट योजनाओं का उल्लेख किया, जिनमें से कई या तो बंद कर दी गई हैं, नाम बदल दिया गया है या बजट कटौती के कारण कमजोर हो गई हैं। नीचे इन योजनाओं का संक्षिप्त सारांश दिया गया है:
मुख्य कल्याणकारी योजनाएँ जिनकी बहाली की मांग
- स्वास्थ्य अधिकार अधिनियम (Right to Health Act) – मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक कवरेज, लेकिन कार्यान्वयन में देरी।
- गिग वर्कर्स कल्याण अधिनियम (Gig Workers Welfare Act) – अस्थायी श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, परंतु कई राज्यों में लागू नहीं हुआ।
- राजीव गांधी छात्रवृत्ति योजना – उत्कृष्ट छात्रों को आर्थिक सहायता, अब नाम बदल कर राजीव गांधी के नाम पर जारी नहीं।
- इंदिरा रसोई योजना – गरीब परिवारों को सस्ती भोजन सुविधा, कई जिलों में बंद।
- इंदिरा गांधी स्मार्टफोन योजना – ग्रामीण युवाओं को स्मार्टफोन प्रदान करना, अब केवल चयनित क्षेत्रों में सीमित।
- इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना – शहरी बेरोजगारों को रोजगार, लेकिन फंड कटौती के कारण कार्यक्षमता घट गई।
विकास परियोजनाओं की स्थिति
गहलोत ने यह भी उजागर किया कि कई बुनियादी ढांचा परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं, परंतु संचालन में नहीं लाई गईं। प्रमुख बिंदु:
- जयपुर के शिवदासपुरा और बालमुकुंदपुरा में निर्मित अस्पताल अभी भी बंद हैं।
- जोधपुर में चौपासनी हाउसिंग बोर्ड अस्पताल, प्रताप नगर अस्पताल, दिगारी अस्पताल, राजस्थान राज्य खेल संस्थान और सुमेर पुस्तकालय – सभी तैयार, परंतु संचालन नहीं हुआ।
- राज्य भर में कई नए स्कूलों का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण वे खुल नहीं पाए हैं।
गहलोत की प्रमुख मांगें
- सभी बंद या कमजोर हुई कल्याणकारी योजनाओं को मूल रूप में पुनर्स्थापित करना।
- बनाए गए अस्पतालों, स्कूलों और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तुरंत चालू करना।
- वित्तीय सहायता और प्रशासनिक समर्थन सुनिश्चित करना ताकि योजनाएँ प्रभावी रूप से कार्यान्वित हो सकें।
- भविष्य में ऐसी किसी भी नीति परिवर्तन से पहले जनता को पर्याप्त सूचना देना।
प्रतिक्रिया और संभावित प्रभाव
यदि प्रधानमंत्री मोदी इन मांगों को स्वीकार करते हैं, तो यह न केवल राजस्थान के सामाजिक-आर्थिक विकास को तेज करेगा, बल्कि भाजपा सरकार की वादे‑पर‑आधारित राजनीति की विश्वसनीयता को भी मजबूत करेगा। दूसरी ओर, यदि इन मांगों को नज़रअंदाज़ किया गया, तो राज्य में सामाजिक असंतोष बढ़ सकता है और आगामी चुनावों में विपक्षी दलों को लाभ मिल सकता है।
राज्य के कई नागरिक समूह और सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर गहलोत के साथ खड़े होकर सरकार से त्वरित कार्रवाई की माँग की है।
निष्कर्ष
अशोक गहलोत का पत्र राजस्थान में कांग्रेस‑शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं की बहाली के लिए एक स्पष्ट संकेत है। यह न केवल पिछले वादों की पूर्ति की माँग है, बल्कि राज्य के विकास के लिए एक रणनीतिक कदम भी है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया इस बात का निर्धारण करेगी कि भविष्य में राजस्थान में सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचा कितना मजबूत होगा।













