डिजिटल युग में बच्चों की नई चुनौती: महाराष्ट्र सरकार ने टास्क फोर्स का गठन किया
डिजिटल स्क्रीन के आकर्षण से बच्चों का जीवन बदल रहा है—परन्तु इस परिवर्तन के साथ जुड़ी हैं गंभीर स्वास्थ्य और सामाजिक समस्याएँ। महाराष्ट्र सरकार ने इस समस्या को सुलझाने के लिए एक बहु‑विषयक टास्क फोर्स गठित की है, जिसका लक्ष्य डिजिटल एडिक्शन के प्रभावों को गहराई से समझना और ठोस समाधान प्रस्तुत करना है।
टास्क फोर्स की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अशिष शेलार ने 2 फरवरी को निर्देश जारी किया, जिसमें बताया गया कि लगभग 4 करोड़ बच्चों (15 वर्ष से कम) के मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर यह पहल आवश्यक है। टास्क फोर्स के प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं:
- डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण का मूल्यांकन
- स्क्रीन टाइम, ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभावों का विश्लेषण
- शिक्षा, सामाजिक विकास और परिवारिक माहौल पर डिजिटल उपयोग के परिणामों की जांच
- राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय नियमों की तुलना और राज्य‑स्तर पर लागू करने योग्य नीतियों का प्रस्ताव
टास्क फोर्स में शामिल विशेषज्ञों की विविधता
यह टास्क फोर्स एक बहु‑विषयक टीम है, जिसमें शामिल हैं:
- शिक्षा विशेषज्ञ और स्कूल प्रशासनिक अधिकारी
- मनोचिकित्सक, बाल मनोवैज्ञानिक और परामर्शदाता
- प्रौद्योगिकी एवं साइबर‑सुरक्षा विशेषज्ञ
- कानूनी सलाहकार और नीति‑निर्माता
- स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ
इन विविध विशेषज्ञों के सहयोग से टास्क फोर्स एक समग्र दृष्टिकोण अपनाएगी, जिससे न केवल समस्या की पहचान होगी बल्कि समाधान के लिए व्यावहारिक कदम भी तय किए जा सकेंगे।
डिजिटल एडिक्शन के प्रमुख संकेत और आँकड़े
“डिजिटल एडिक्शन अब केवल एक व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक स्वास्थ्य का बड़ा मुद्दा बन चुका है,” टास्क फोर्स के एक सदस्य ने कहा।
वर्तमान में उपलब्ध डेटा के अनुसार:
- लगभग 30% क्लिनिकल केस में बच्चों को गेमिंग डिसऑर्डर का निदान मिला है।
- सर्वेक्षण में 40% स्कूल‑उम्र के बच्चों में मध्यम से गंभीर स्क्रीन‑टाइम लक्षण देखे गए।
- डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर अत्यधिक निर्भरता से नींद में बाधा, तकनीकी गर्दन (टेक‑नेक), और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याएँ बढ़ रही हैं।
इन आँकड़ों को देखते हुए, टास्क फोर्स ने तुरंत कुछ प्रारम्भिक उपायों की रूपरेखा तैयार की है।
प्रस्तावित उपाय और नीति‑सिफ़ारिशें
टास्क फोर्स ने निम्नलिखित प्रमुख सिफ़ारिशें प्रस्तुत की हैं:
- आयु‑सत्यापन (e‑KYC) प्रणाली को सभी गेमिंग और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर अनिवार्य करना।
- स्क्रीन‑फ्री शनिवार (Screen‑Free Saturday) जैसी पहल को सरकारी स्कूलों में लागू करना।
- डिजिटल हाइजीन को SCERT महाराष्ट्र के पाठ्यक्रम में शामिल करना।
- ‘टाइम‑आउट’ फीचर और दैनिक खेलने की सीमा (उदा. 2 घंटे) को लागू करने के लिए तकनीकी मानक बनाना।
- ‘लूट बॉक्स’ (loot boxes) जैसे जुए‑समान तत्वों पर प्रतिबंध लगाना।
- साइबर‑वेलनेस सेंटर की स्थापना, जहाँ बच्चों को परामर्श और उपचार मिल सके।
इन उपायों को लागू करने के लिए राज्य सरकार ने पहले ही केंद्रीय सरकार को रिपोर्ट भेजी है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर भी समान नीतियों को अपनाने की संभावना बढ़ेगी।
भविष्य की दिशा और अपेक्षित प्रभाव
टास्क फोर्स की रिपोर्ट अगले विधानसभा सत्र से पहले प्रस्तुत की जाएगी। यह रिपोर्ट न केवल महाराष्ट्र में बल्कि पूरे भारत में डिजिटल सुरक्षा नीति के निर्माण में एक मानक स्थापित कर सकती है। यदि सफल रही, तो यह पहल:
- बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाएगी
- शिक्षा में डिजिटल डिस्ट्रैक्शन को कम करेगी
- परिवारों को डिजिटल उपयोग के संतुलन को समझने में मदद करेगी
- डिजिटल उद्योग को जिम्मेदार प्रथाओं की ओर प्रेरित करेगी
जैसे-जैसे डिजिटल उपकरण हमारे जीवन में गहराई से प्रवेश कर रहे हैं, इस तरह की सक्रिय नीति‑निर्माण प्रक्रिया अत्यंत आवश्यक है।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र सरकार की यह पहल बच्चों में डिजिटल एडिक्शन को रोकने और उनके समग्र विकास को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। टास्क फोर्स के विस्तृत अध्ययन और सिफ़ारिशें न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी डिजिटल स्वास्थ्य नीति को सुदृढ़ करने में मददगार सिद्ध होंगी।













