शर्टलेस विरोध केस में कोर्ट का अहम फैसला: कांग्रेस युवा विंग के महासचिव को मिली अंतरिम जमानत
एक तेज़ी से बदलते राजनीतिक परिदृश्य में, दिल्ली के पाटीला हाउस कोर्ट ने भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के महासचिव निगम भंडारी को 24 मार्च तक की अंतरिम जमानत दे दी है। यह फैसला AI इम्पैक्ट समिट के दौरान हुए शर्टलेस विरोध प्रदर्शन से जुड़ी जाँच के बीच आया, जहाँ कार्यकर्ताओं ने anti‑PM नारे वाले टी‑शर्ट्स दिखाए थे।
विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
20 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit के दौरान, भारतीय युवा कांग्रेस के कई सदस्य शर्ट उतारकर अपने हाथों में टी‑शर्ट्स पकड़े, जिन पर प्रधानमंत्री के खिलाफ नारे लिखे थे। पुलिस ने इसे “सामान्य उद्देश्य” (common intention) के साथ आयोजित किया बताया।
- प्रदर्शन में लगभग 10‑12 IYC कार्यकर्ता शामिल थे।
- कार्यकर्ताओं ने “देश को नुकसान” और “डेमोक्रेसी को खतरा” जैसे नारे लगाए।
- पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज कर कई लोगों को हिरासत में लिया।
कोर्ट की सुनवाई और अंतरिम जमानत
निगम भंडारी ने अग्रिम (anticipatory) जमानत की याचिका दायर की, यह तर्क देते हुए कि वह गंभीर बीमारी (जॉ इंटर्नल) से ग्रस्त हैं और उन्हें कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन ने कोर्ट में कहा कि भंडारी ने कभी स्थल पर उपस्थित नहीं हुए और वह जांच में सहयोग करने को तैयार हैं।
“सहयोगी साक्ष्य के बिना किसी को जमानत से वंचित नहीं किया जा सकता,” कोर्ट ने अपने आदेश में कहा।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने अंतरिम जमानत देते हुए शर्तें लगाईं कि भंडारी को किसी भी समय पुलिस को सहयोग देना होगा और यदि गिरफ्तार होते हैं तो 25,000 रुपये की बांड जमा करनी होगी।
पुलिस का रुख और आगे की जाँच
दिल्ली पुलिस ने कहा कि भंडारी ने विरोध की योजना बनाने में मुख्य भूमिका निभाई थी, इसलिए उनके बंधक में पूछताछ आवश्यक है। पुलिस ने यह भी बताया कि अन्य कई IYC कार्यकर्ता अभी भी पुलिस हिरासत में हैं और उनके खिलाफ कई सेक्शन के तहत मामला चल रहा है।
विस्तृत जानकारी के लिए Bar & Bench और Times of India की रिपोर्ट देखें।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
यह मामला केवल एक विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा; इसने राष्ट्रीय स्तर पर लोकतांत्रिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन पर बहस को जन्म दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना को “गंदा और नग्न राजनीति” कहा, जबकि कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के दुरुपयोग के रूप में खारिज किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में कोर्ट का संतुलित फैसला भविष्य में समान घटनाओं के निपटारे में एक मानक स्थापित कर सकता है।
भविष्य की दिशा
अगले सुनवाई की तिथि 24 मार्च तय की गई है, जहाँ कोर्ट यह तय करेगा कि भंडारी को स्थायी जमानत दी जाए या नहीं। इस बीच, IYC ने सभी कार्यकर्ताओं को सहयोग करने और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करने का आह्वान किया है।
समग्र रूप से, यह निर्णय भारतीय लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी प्रक्रिया के बीच के जटिल संबंधों को उजागर करता है, और यह देखना बाकी है कि आगे की जाँच और कोर्ट के निर्णय इस संघर्ष को कैसे सुलझाते हैं।













