सरकार का बड़ा कदम: कल्याण योजनाओं में फोर्टिफाइड चावल का वितरण अब रोका गया
नई दिल्ली (27 फ़रवरी 2026) – भारत सरकार ने पीआईबी के माध्यम से एक आधिकारिक बयान जारी किया, जिसमें बताया गया कि प्रधाण मंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और अन्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)‑आधारित कल्याण योजनाओं में फोर्टिफाइड चावल (संतृप्त चावल) का वितरण अस्थायी रूप से रोका गया है। यह निर्णय विकिपीडिया पर उपलब्ध फोर्टिफाइड चावल की अवधारणा से जुड़ी शेल्फ‑लाइफ़ (संग्रहण अवधि) की समस्याओं के कारण लिया गया है।
फोर्टिफाइड चावल क्या है?
फोर्टिफाइड चावल वह चावल है जिसमें आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे आवश्यक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स को विशेष तकनीक से मिलाया जाता है। इस पहल का मूल उद्देश्य भारत के गरीब और कमजोर वर्गों को पोषण‑संकट से बचाना, विशेषकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और वृद्धों को आयरन‑डिफिशिएंसी (एनीमिया) से मुक्त रखना था।
क्यों आया यह रोक?
सरकार ने इस कदम का कारण आईआईटी खरगपुर द्वारा किए गए विस्तृत अध्ययन में पाया गया कि फोर्टिफाइड चावल के पोषक तत्वों की स्थिरता समय के साथ घटती है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- संग्रहण के दौरान नमी, तापमान और आर्द्रता के कारण आयरन और विटामिन की मात्रा में 30‑40% तक कमी।
- औसत शेल्फ‑लाइफ़ 12‑18 महीने के बजाय 6‑9 महीने तक घट गई।
- भंडारण अवधि 2‑3 साल तक बढ़ने पर पोषक तत्वों की प्रभावशीलता गंभीर रूप से घटती है।
- वर्तमान में केंद्र में 674 लाख टन चावल का भंडारण है, जिसमें से अधिकांश दो‑तीन साल तक रखे जाने की संभावना है।
“फोर्टिफाइड चावल के पोषक तत्वों की कमी और शेल्फ‑लाइफ़ की कमी को देखते हुए, हमने इस वितरण को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया है,” कहा एक सरकारी प्रवक्ता ने।
क्या होगा लाभार्थियों पर असर?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस निर्णय से भोजन‑अनाज की कुल मात्रा में कोई कमी नहीं आएगी. लाभार्थियों को सामान्य (नॉन‑फोर्टिफाइड) चावल उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उनकी अनाज‑भुगतान में कोई बाधा नहीं होगी। प्रमुख कल्याण योजनाओं जैसे PMGKAY, PDS, ICDS, और मिड‑डे मील पर इस बदलाव का प्रभाव न्यूनतम रहेगा।
आगे की योजना क्या है?
वर्तमान रोक का उद्देश्य एक बेहतर पोषक‑तत्व वितरण तंत्र विकसित करना है, जिसमें:
- नयी पैकेजिंग तकनीक (हाई‑बारियर पैकेजिंग) का परीक्षण।
- भंडारण के लिए नियंत्रित तापमान और नमी‑नियंत्रित गोदामों की स्थापना।
- स्थानीय स्तर पर माइक्रोन्यूट्रिएंट‑सुरक्षित चावल के उत्पादन को बढ़ावा देना।
- विज्ञान‑आधारित निगरानी प्रणाली के माध्यम से निरंतर गुणवत्ता जांच।
इन उपायों के सफल कार्यान्वयन के बाद ही फोर्टिफाइड चावल का पुनः वितरण शुरू किया जाएगा।
सम्पूर्ण परिप्रेक्ष्य
फोर्टिफाइड चावल की पहल 2019 में पायलट रूप में शुरू हुई, 2022 में इसे सभी कल्याण योजनाओं में विस्तारित किया गया, और 2024 तक इसे सभी सार्वजनिक वितरण प्रणाली में अनिवार्य बनाने का लक्ष्य था। लेकिन लगातार आए वैज्ञानिक चेतावनियों और उद्योग‑सेवा प्रदाताओं की शिकायतों ने इस दिशा में पुनर्विचार को मजबूर किया।
इस निर्णय के बाद, कई राज्य सरकारें और निजी मिलर अपने मौजूदा स्टॉक को सामान्य चावल में बदलने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं। पंजाब के चावल उद्योग ने कहा कि यह कदम उन्हें तकनीकी और आर्थिक बोझ से राहत देगा।
अधिक जानकारी के लिए
फोर्टिफाइड चावल, उसकी तकनीकी और नीति‑परिवर्तन के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए आप The Week और Devdiscourse पर प्रकाशित रिपोर्ट पढ़ सकते हैं।
निष्कर्ष
सरकार का यह कदम दर्शाता है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में वैज्ञानिक प्रमाणों को प्राथमिकता देना आवश्यक है। जबकि फोर्टिफाइड चावल का वितरण अभी रोक दिया गया है, यह निर्णय भविष्य में अधिक टिकाऊ और प्रभावी पोषण‑सुरक्षा उपायों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।













