न्याय अनप्लग्ड 2026 लाइव: ‘सभी समाज कानून के शासन पर निर्मित होते हैं’ – एक अभूतपूर्व मंच
नई दिल्ली में 28 फरवरी 2026 को आयोजित Justice Unplugged 2026 ने भारतीय कानूनी परिदृश्य में नई ऊर्जा का संचार किया। द हिन्दू और VIT स्कूल ऑफ़ लॉ, चेन्नई के संयुक्त प्रयास से तैयार यह राष्ट्रीय सम्मेलन छात्रों, युवा वकीलों और नीति निर्माताओं को सीधे न्यायपालिका के दिग्गजों से जोड़ने का लक्ष्य रखता है। इस कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण थे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश उज्जल भुयान, वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंहवी और द हिन्दू के संपादक सुरेश नंबाथ।
कार्यक्रम की प्रमुख थीम और सत्र
सुरेश नंबाथ ने उद्घाटन में कहा, “
सभी समाज कानून के शासन पर निर्मित होते हैं।” यह विचार मंच के सभी संवादों का आधार बना। नीचे प्रमुख सत्रों और उनके मुख्य बिंदुओं का सारांश दिया गया है:
- कानूनी शिक्षा का भविष्य: VIT के उपाध्यक्ष जी.वी. सेल्वम और द हिन्दू के सीईओ एल.वी. नवनीत ने भारतीय लॉ कॉलेजों में पाठ्यक्रम सुधार, प्रैक्टिकल प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा की।
- जनरेटिव एआई और न्याय: तकनीकी विशेषज्ञों ने एआई‑आधारित शोध, डेटा प्राइवेसी और न्यायिक निर्णयों में संभावित पक्षपात के मुद्दों को उजागर किया।
- डिजिटल युग में मौलिक अधिकार: अभिषेक मनु सिंहवी ने डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, डेटा सुरक्षा और ऑनलाइन सिविल लिटिगेशन के नए आयामों पर प्रकाश डाला।
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता: उज्जल भुयान ने न्यायिक स्वतंत्रता, सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और संवैधानिक नैतिकता पर अपने अनुभव साझा किए।
मुख्य वक्ता और उनके प्रमुख बिंदु
उज्जल भुयान (न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट) ने कहा कि “कानून का शासन ही सामाजिक स्थिरता का मूल स्तम्भ है” और न्यायिक प्रक्रिया में तकनीकी नवाचार को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
अभिषेक मनु सिंहवी (वरिष्ठ अधिवक्ता) ने डिजिटल युग में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सशक्त नियामक ढांचे की माँग की, साथ ही न्यायिक समीक्षा की तेज़ी को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
सुरेश नंबाथ (संपादक, द हिन्दू) ने मंच को “एक विचार‑उत्तेजक संवाद” बताया, जहाँ बहसें केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि वास्तविक नीति‑निर्माण के लिए प्रेरणा बनें।
भविष्य के लिए प्रमुख निष्कर्ष
समग्र रूप से, Justice Unplugged 2026 ने निम्नलिखित प्रमुख निष्कर्ष निकाले:
- कानून के शासन को सुदृढ़ करने के लिए तकनीकी शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करना आवश्यक है।
- डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट नियामक दिशा‑निर्देशों की आवश्यकता है।
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रियाएँ और सार्वजनिक जवाबदेही अनिवार्य हैं।
- छात्र‑पहला दृष्टिकोण अपनाकर भविष्य के वकीलों को व्यावहारिक अनुभव और नेटवर्किंग के अवसर प्रदान किए जा सकते हैं।
अधिक जानकारी के लिए
इवेंट की विस्तृत जानकारी, समय‑सारिणी और पंजीकरण विवरण के लिए आप द हिन्दू इवेंट्स की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं। साथ ही, द हिन्दू द्वारा प्रकाशित विस्तृत रिपोर्ट यहाँ उपलब्ध है।
निष्कर्ष
‘Justice Unplugged 2026’ ने न केवल कानूनी शिक्षा में बदलाव की दिशा तय की, बल्कि यह स्पष्ट किया कि कानून के शासन के बिना कोई भी समाज स्थायी नहीं हो सकता। इस मंच ने युवा वकीलों को प्रेरित किया कि वे भविष्य के चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहें, और नीति निर्माताओं को यह याद दिलाया कि न्याय की नींव हमेशा समाज की प्रगति की कुंजी रहेगी।










