भारत सरकार ने पीएमजीकेवाई में चावल फोर्टिफिकेशन को अस्थायी रूप से रोका
एक आश्चर्यजनक कदम के साथ केंद्र ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और अन्य कल्याण योजनाओं के तहत चावल के फोर्टिफिकेशन को रोक दिया है। यह निर्णय Observer Voice की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर द्वारा किए गए विस्तृत अध्ययन के बाद आया है, जिसमें पोषक तत्वों की कमी और शेल्फ‑लाइफ़ की समस्याओं को उजागर किया गया।
परिप्रेक्ष्य: क्यों हुआ फोर्टिफिकेशन का विराम?
चावल फोर्टिफिकेशन का उद्देश्य आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स को गरीब वर्ग तक पहुँचाना था। लेकिन कई राज्यों में भंडारण के दौरान नमी, तापमान और आर्द्रता के कारण इन पोषक तत्वों की मात्रा घटती पाई गई।
“फोर्टिफाइड चावल के दीर्घकालिक भंडारण में पोषक तत्वों की गिरावट स्पष्ट है, इसलिए हम एक अधिक विश्वसनीय डिलीवरी तंत्र विकसित होने तक इस प्रक्रिया को रोक रहे हैं,” कहा मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में।
मुख्य निष्कर्ष – आसान बुलेट पॉइंट्स
- भंडारण में आर्द्रता (30‑35%) और तापमान (25‑30°C) पोषक तत्वों को 20‑30% तक घटा देते हैं।
- फोर्टिफाइड चावल की औसत शेल्फ‑लाइफ़ 12‑18 महीने है, जबकि भारत में कई बार 24‑36 महीने तक भंडारण होता है।
- राज्य‑स्तर पर फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति में लॉजिस्टिक चुनौतियाँ और मिलर‑संकट (कच्चे माल की कमी) सामने आए।
- सरकार ने कहा कि इस निर्णय से भोजन की मात्रा या भोजन‑सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
- अस्थायी रूप से राज्य को फोर्टिफाइड या नॉन‑फोर्टिफाइड चावल चुनने की स्वतंत्रता दी गई है।
क्या बदल रहा है? राज्य‑स्तर की प्रतिक्रियाएँ
पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख चावल उत्पादन वाले राज्यों ने इस निर्णय को मिश्रित प्रतिक्रिया के साथ स्वीकार किया। कुछ मिलर संघों ने कहा कि फोर्टिफाइड चावल के उत्पादन में निवेश किया गया था, इसलिए अचानक रोक से आर्थिक नुकसान हो सकता है। वहीं, कई स्वास्थ्य विभागों ने कहा कि यह कदम दीर्घकालिक पोषण सुरक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में है।
विस्तृत जानकारी के लिए The New Indian Express और The Economic Times की रिपोर्ट देखें।
आगे की राह – सरकार की योजना
केंद्र ने कहा कि यह विराम केवल अस्थायी है और एक अधिक प्रभावी पोषक तत्व वितरण तंत्र विकसित होने तक जारी रहेगा। संभावित विकल्पों में शामिल हैं:
- नए पैकेजिंग तकनीक जो नमी को नियंत्रित करे।
- भंडारण के दौरान स्मार्ट सेंसर द्वारा तापमान‑आर्द्रता की निगरानी।
- फोर्टिफाइड चावल के बजाय मिलेट‑आधारित पोषण किट का परीक्षण।
समापन
चावल फोर्टिफिकेशन का यह अस्थायी विराम भारत की पोषण सुरक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ दर्शाता है। जबकि तत्काल में लाभार्थियों को मिलने वाले अनाज की मात्रा नहीं घटेगी, दीर्घकालिक समाधान के लिए तकनीकी और लॉजिस्टिक चुनौतियों को सुलझाना अनिवार्य होगा। यह कदम सरकार की साक्ष्य‑आधारित नीति‑निर्माण की प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है, जिससे भविष्य में अधिक स्थायी और प्रभावी पोषण कार्यक्रमों की उम्मीद की जा सकती है।













