मल्काजगिरि पुलिस की तेज़ कार्रवाई: 6 साइबर फ्रॉड मामलों में 7 गिरफ्तार
हैदराबाद, 28 फरवरी 2026 – मल्काजगिरि पुलिस के साइबर क्राइम विभाग ने पिछले हफ्ते एक व्यापक ऑपरेशन में छह अलग‑अलग साइबर धोखाधड़ी मामलों को सुलझाया और सात आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह कदम डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों के खिलाफ एक सख्त संदेश है।
मुख्य तथ्य: क्या हुआ?
पुलिस ने 22 से 28 फरवरी के बीच दर्ज किए गए मामलों की जाँच में चार प्रमुख प्रकार के धोखाधड़ी के नेटवर्क को उजागर किया:
- निवेश धोखाधड़ी – झूठे रिटर्न वादे के पीछे लाखों रुपये की हानि।
- मैत्री (मेट्रिमोनियल) धोखाधड़ी – सोशल मीडिया पर बनाये गए फर्जी प्रोफ़ाइल से भावनात्मक लालच।
- ऋण ऐप धोखाधड़ी – नकली लोन प्रोसेसिंग के नाम पर व्यक्तिगत डेटा और पैसा चुराया गया।
- डिजिटल गिरफ्तारी धोखाधड़ी – पीड़ितों को फर्जी पुलिस केस की धमकी देकर पैसे वसूले गए।
कैसे किया गया पता?
साइबर क्राइम यूनिट ने डिजिटल फॉरेंसिक, ट्रेसिंग टूल्स और साइबरक्राइम विशेषज्ञों की मदद से फर्जी खातों, व्हाट्सएप ग्रुप्स और सोशल मीडिया प्रोफ़ाइलों को ट्रैक किया। कई आरोपियों ने मुल अकाउंट (मध्यस्थ बैंक खाते) के रूप में काम किया, जिससे धनराशि कई राज्यों में बंट गई।
पुलिस की कार्रवाई और राहत
जांच के दौरान, पुलिस ने:
- सभी सात आरोपियों को हिरासत में लिया।
- पीड़ितों को ₹53.27 लाख की अदालत‑आदेशित वापसी सुनिश्चित की।
- साइबर अपराध के शिकारों को तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 या साइबरक्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करने का निर्देश दिया।
“हमारा लक्ष्य है कि साइबर अपराधियों को उनके डिजिटल निशान पर पकड़ कर न्याय दिलाना और पीड़ितों को उनका पैसा वापस दिलाना,” कहा गया डिप्टी कमिश्नर (साइबर) एस.वी. नागा लक्ष्मी ने।
विस्तृत केस‑बाय‑केस झलक
निवेश धोखाधड़ी: एक समूह ने व्हाट्सएप ग्रुप में झूठे स्टॉक टिप्स और ट्रेडिंग ऐप्स का प्रचार किया, जिससे कई निवेशकों ने कुल मिलाकर ₹87.65 लाख खो दिए।
मैत्री धोखाधड़ी: फर्जी फेसबुक प्रोफ़ाइल ‘सोनिया’ के माध्यम से एक व्यक्ति ने भावनात्मक भरोसा बनाकर ₹32.36 लाख की वसूली की, फिर एक नकली मृत्यु का डर पैदा करके अतिरिक्त धन माँगा।
ऋण ऐप धोखाधड़ी: एक स्थानीय ऐप के नाम पर पीड़ितों से व्यक्तिगत जानकारी और अग्रिम शुल्क ले लिया गया, जिससे कुल ₹2.04 लाख की हानि हुई।
डिजिटल गिरफ्तारी धोखाधड़ी: अपराधियों ने पीड़ितों को फर्जी पुलिस केस की धमकी देकर ₹5 लाख तक की रकम वसूली।
साइबर सुरक्षा के लिए विशेषज्ञों की सलाह
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि:
- किसी भी अनजान लिंक या ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी प्रामाणिकता जांचें।
- व्यक्तिगत जानकारी, विशेषकर बैंक विवरण, केवल आधिकारिक पोर्टल्स पर ही साझा करें।
- संदेहास्पद कॉल या संदेशों को तुरंत 1930 पर रिपोर्ट करें।
निष्कर्ष
मल्काजगिरि पुलिस की इस कार्रवाई ने न केवल एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क को तोड़ा, बल्कि पीड़ितों को वित्तीय राहत भी प्रदान की। यह घटना डिजिटल जागरूकता की आवश्यकता को दोहराती है और दिखाती है कि सख्त कानून प्रवर्तन और जनता की सतर्कता मिलकर साइबर अपराध को रोक सकती है।
साइबर सुरक्षा के इस दौर में, हर नागरिक को सतर्क रहना और समय पर रिपोर्ट करना ही सबसे बड़ा बचाव है।
अधिक जानकारी के लिए The Hindu और Telangana Today देखें।













