बीजेपी ने असम से दो प्रमुख नेताओं को राज्यसभा के लिए नामांकित किया, ST दर्जे की मांग वाली समुदायों को साधने का दांव
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए असम से दो प्रमुख नेताओं, मंत्री जोगीन मोहन और विधायक टेरश गोवाला के नामों की घोषणा की है। यह निर्णय असम के पूर्वी क्षेत्र से आता है और इसे उन समुदायों के बीच पार्टी की स्थिति को मजबूत करने के एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है जो अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। यह नामांकन न केवल पार्टी के संगठनात्मक विस्तार को दर्शाता है, बल्कि असम की जटिल सामाजिक और राजनीतिक गतिशीलता को भी उजागर करता है।
पृष्ठभूमि: एसटी दर्जे की मांग और राजनीतिक समीकरण
असम में कई समुदायों, जैसे ताई-अहोम, चूतिया, कोच-राजबंशी, मटक, मोरान और चाय जनजाति (आदिवासी), लंबे समय से अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा प्राप्त करने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। इन समुदायों का दावा है कि वे ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहे हैं और अपनी विशिष्ट पहचान, संस्कृति और भाषा के संरक्षण के लिए संवैधानिक मान्यता चाहते हैं। वे वर्तमान में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची में शामिल हैं और उनका मानना है कि एसटी का दर्जा उन्हें बेहतर सामाजिक-आर्थिक अवसर और राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रदान करेगा।
यह मुद्दा असम की राजनीति में एक संवेदनशील विषय रहा है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दल इन समुदायों से समर्थन प्राप्त करने के लिए इस मांग का उपयोग करते रहे हैं। हालांकि, एसटी दर्जे की मांग को लेकर राज्य के भीतर विरोध भी है, खासकर उन समुदायों से जो पहले से ही एसटी सूची में शामिल हैं। उनका तर्क है कि इन ‘विकसित’ समुदायों को एसटी का दर्जा देने से मौजूदा एसटी आबादी के अधिकारों और लाभों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस जटिल परिदृश्य में, भाजपा का यह कदम इन समुदायों को लुभाने और राज्य में अपनी चुनावी पकड़ मजबूत करने का एक प्रयास माना जा रहा है।
जोगीन मोहन और टेरश गोवाला: एक रणनीतिक चयन
जोगीन मोहन, जो वर्तमान में असम सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और महामरा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, अहोन समुदाय से आते हैं। उन्हें परिवहन, पहाड़ी क्षेत्र विकास, सहयोग और स्वदेशी और आदिवासी आस्था और संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विभागों का जिम्मा सौंपा गया है। मोहन 2016 में पहली बार विधायक चुने गए थे और 2021 में फिर से निर्वाचित हुए। उनकी पृष्ठभूमि और मंत्री के रूप में उनका अनुभव उन्हें पार्टी के लिए एक मूल्यवान संपत्ति बनाता है।
दूसरी ओर, टेरश गोवाला, जो डुलियाजान निर्वाचन क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके हैं, चाय जनजाति समुदाय से हैं। गोवाला को पार्टी के संगठनात्मक विस्तार में एक प्रमुख व्यक्ति माना जाता है, खासकर ऊपरी असम क्षेत्र में। 2018 में, उन्होंने कुछ पार्टी कार्यों से असंतोष व्यक्त करते हुए विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन बाद में सक्रिय राजनीतिक ड्यूटी पर लौट आए। उनका नामांकन चाय जनजाति समुदाय के बीच भाजपा की पकड़ को मजबूत करने का एक प्रयास है, जो ऊपरी असम में एक महत्वपूर्ण चुनावी समूह है।
एसटी दर्जे का मुद्दा: एक जटिल विरासत
असम में एसटी दर्जे की मांग कोई नई बात नहीं है। पिछले कई वर्षों से, छह प्रमुख समुदाय एसटी दर्जे की मांग कर रहे हैं। 2019 में, केंद्र सरकार ने इन समुदायों को एसटी सूची में शामिल करने के लिए एक विधेयक पेश किया था, लेकिन यह पारित नहीं हो सका। हाल ही में, असम कैबिनेट ने मंत्रियों के एक समूह (GoM) की रिपोर्ट को मंजूरी दी है, जिसमें इन छह समुदायों को एसटी का दर्जा देने की सिफारिश की गई है। इस रिपोर्ट में एसटी (मैदानी), एसटी (पहाड़ी) और एसटी (घाटी) नामक एक तीन-स्तरीय वर्गीकरण का भी प्रस्ताव है, ताकि मौजूदा एसटी समुदायों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर विरोध भी जारी है। विभिन्न आदिवासी छात्र संगठन और समुदाय एसटी दर्जे की मांग का विरोध कर रहे हैं, उनका तर्क है कि यह असम की मूल जनजातियों की पहचान और अधिकारों को कमजोर करेगा। समन्वय समिति के आदिवासी संगठनों, असम (CCTOA) ने इस कदम को ‘अवैध और असंवैधानिक’ बताया है, यह कहते हुए कि यह राजनीतिक आरक्षण के लिए एक चाल है। उनका मानना है कि इन समुदायों के पास पहले से ही अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के रूप में पर्याप्त आरक्षण है।
भाजपा का दांव: वोट बैंक को मजबूत करना
भाजपा द्वारा जोगीन मोहन (अहोन समुदाय) और टेरश गोवाला (चाय जनजाति) को राज्यसभा के लिए नामांकित करना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यह कदम ऊपरी असम में पार्टी के वोट बैंक को मजबूत करने और एसटी दर्जे की मांग करने वाले समुदायों के बीच समर्थन हासिल करने का एक प्रयास है। चाय जनजाति समुदाय ऊपरी असम के कई निर्वाचन क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण चुनावी शक्ति है, जबकि अहोन समुदाय भी इस क्षेत्र की चुनावी गतिशीलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नामांकन 2026 के असम विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया है। इन समुदायों को प्रतिनिधित्व देकर, भाजपा इन समुदायों से समर्थन की उम्मीद कर रही है। यह उन वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करने का भी संकेत देता है, जिन्हें राज्यसभा सीटों के लिए प्रमुख दावेदार माना जा रहा था, जैसे कि पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेशेश्वर तेली और भाजपा के वरिष्ठ नेता पुलक गोहिन।
आगे क्या?
यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा का यह दांव कितना सफल होता है। एसटी दर्जे का मुद्दा असम की राजनीति में एक लंबे समय से चला आ रहा मुद्दा है, और इसका समाधान अभी भी अनिश्चित है। राज्यसभा के लिए इन दो नेताओं का नामांकन निश्चित रूप से इन समुदायों के बीच राजनीतिक चर्चा को तेज करेगा। भाजपा का लक्ष्य इन समुदायों को अपने पाले में लाना है, लेकिन उन्हें विरोध और आंतरिक पार्टी की राजनीति से भी निपटना होगा।
मुख्य बातें
- भाजपा ने असम से जोगीन मोहन और टेरश गोवाला को राज्यसभा के लिए नामांकित किया है।
- यह कदम एसटी दर्जे की मांग करने वाले समुदायों, विशेष रूप से अहोन और चाय जनजाति समुदायों के बीच पार्टी की स्थिति को मजबूत करने के लिए है।
- जोगीन मोहन असम सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और महामरा से विधायक हैं, जबकि टेरश गोवाला डुलियाजान से दो बार विधायक रह चुके हैं।
- असम में ताई-अहोम, चूतिया, कोच-राजबंशी, मटक, मोरान और चाय जनजाति (आदिवासी) जैसे छह समुदाय एसटी दर्जे की मांग कर रहे हैं।
- एसटी दर्जे के मुद्दे पर असम में विरोध भी है, खासकर मौजूदा एसटी समुदायों से, जो अधिकारों के क्षरण की चिंता व्यक्त करते हैं।
- भाजपा का यह नामांकन 2026 के असम विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर एक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
- इस नामांकन से पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करने के संकेत भी मिले हैं।
- यह निर्णय ऊपरी असम में भाजपा के वोट बैंक को मजबूत करने और इन समुदायों से समर्थन हासिल करने का प्रयास है।













