कर्नाटक बजट 2026: सीएम सिद्धारमैया के सामने वित्तीय संतुलन की कड़ी चुनौती
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया शुक्रवार को राज्य का 2026-27 का बजट पेश करेंगे, जो उनके लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय संतुलन साधने का कार्य होगा। यह बजट ऐसे समय में आ रहा है जब राज्य को अपनी महत्वाकांक्षी गारंटी योजनाओं के लिए ₹50,000 करोड़ से अधिक के वार्षिक व्यय को पूरा करना है, साथ ही केंद्र सरकार से राजस्व में कटौती और जीएसटी दर के युक्तिकरण जैसे अन्य वित्तीय दबावों का भी सामना करना पड़ रहा है। इस बजट को “तंग रस्सी पर चलने” जैसा बताया जा रहा है, जहाँ मुख्यमंत्री को विकास पहलों और कल्याणकारी कार्यक्रमों के बीच सावधानीपूर्वक तालमेल बिठाना होगा।
गारंटी योजनाओं का भारी बोझ और राजस्व की चिंताएँ
कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई पांच प्रमुख गारंटी योजनाएँ, जैसे कि 200 यूनिट मुफ्त बिजली (गृह ज्योति), महिलाओं के लिए ₹2,000 मासिक सहायता (गृह लक्ष्मी), बीपीएल परिवारों के लिए 10 किलो चावल (अन्न भाग्य), बेरोजगार स्नातकों के लिए ₹3,000 और डिप्लोमा धारकों के लिए ₹1,500 (युवा निधि), और महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा (शक्ति), राज्य के खजाने पर एक बड़ा बोझ डाल रही हैं। इन योजनाओं के लिए वार्षिक व्यय ₹50,000 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है, जो राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती पेश करता है। 2023-24 के लिए, इन गारंटी योजनाओं पर ₹36,497.96 करोड़ खर्च किए गए थे, जिसमें गृह लक्ष्मी के लिए ₹16,964.40 करोड़ और गृह ज्योति के लिए ₹8,900 करोड़ शामिल थे। इस बढ़ते खर्च के कारण राज्य को उधार पर अधिक निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे उसका वित्तीय घाटा भी बढ़ रहा है।
राजस्व में गिरावट और केंद्रीय अनुदानों में कमी
वित्तीय दबावों को और बढ़ाने वाली एक प्रमुख चिंता जीएसटी दर के युक्तिकरण के कारण राजस्व में आई कमी है। अनुमान है कि इस कारण राज्य को ₹12,000 करोड़ का राजस्व नुकसान हुआ है। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार से प्राप्त होने वाले अनुदानों और करों में हिस्सेदारी में भी कमी देखी गई है। 16वें वित्त आयोग ने राज्य के करों में हिस्सेदारी को 4.13% पर तय किया है, जो कर्नाटक के लिए ₹10,000 से ₹15,000 करोड़ के वार्षिक नुकसान का कारण बन सकता है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्रीय बजट 2026-27 में कर्नाटक के लिए पर्याप्त आवंटन न होने पर निराशा व्यक्त की है, यह कहते हुए कि राज्य को “कुछ नहीं मिला”।
वित्तीय घाटे और ऋण का बढ़ता बोझ
कैग (Comptroller and Auditor General) की रिपोर्टों ने भी गारंटी योजनाओं के कारण बढ़ते वित्तीय तनाव पर चिंता जताई है। 2023-24 में, राज्य का राजस्व घाटा ₹9,271 करोड़ था, जो पिछले वर्ष के अधिशेष के विपरीत था। राज्य का कुल ऋण भी बढ़कर ₹8.14 लाख करोड़ हो गया है, जो सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का 26.5% है, जो अनुमत सीमा 25% का उल्लंघन करता है। इस बढ़ते ऋण का बोझ भविष्य में राज्य के पुनर्भुगतान और ब्याज भुगतान पर भारी पड़ेगा, जिससे दीर्घकालिक विकास परियोजनाओं में निवेश की क्षमता सीमित हो सकती है।
बजट में संभावित उपाय और आगे की राह
इन वित्तीय चुनौतियों का सामना करने के लिए, सरकार कुछ कड़े निर्णय लेने पर विचार कर रही है। ऐसी अटकलें हैं कि मुख्यमंत्री अपेक्षाकृत समृद्ध परिवारों से कुछ गारंटी योजनाओं के लाभों को स्वेच्छा से छोड़ने की अपील कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सरकार कर संग्रह बढ़ाने और गैर-कर राजस्व स्रोतों का पता लगाने के उपायों पर भी विचार कर रही है। इसमें संपत्ति पंजीकरण, स्टाम्प शुल्क, और ईंधन की कीमतों में वृद्धि जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं, हालांकि ये कदम जनता के बीच असंतोष पैदा कर सकते हैं।
बुनियादी ढांचा और विकास पर प्रभाव
वित्तीय दबावों के कारण, पूंजीगत व्यय में भी कमी आने की आशंका है। 2023-24 में, पूंजीगत व्यय पिछले वर्ष की तुलना में ₹5,229 करोड़ कम हो गया था, जिससे अधूरे परियोजनाओं की संख्या में 68% की वृद्धि हुई। यह प्रवृत्ति कर्नाटक के भविष्य के विकास की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकती है। बजट में बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देने के लिए ₹80,000 करोड़ के पूंजीगत व्यय का अनुमान लगाया गया है, लेकिन वित्तीय बाधाएं इस लक्ष्य को प्राप्त करना कठिन बना सकती हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कर्नाटक का 2026-27 का बजट मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय संतुलन साधने का कार्य है, जिसमें ₹50,000 करोड़ से अधिक की गारंटी योजनाओं के व्यय को पूरा करना है।
- जीएसटी दर युक्तिकरण और केंद्रीय अनुदानों में कमी के कारण राजस्व में गिरावट राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चिंता है।
- कैग की रिपोर्टों ने गारंटी योजनाओं के कारण बढ़ते वित्तीय तनाव, राजस्व घाटे और ऋण के बोझ पर प्रकाश डाला है।
- सरकार को कल्याणकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं के बीच सावधानीपूर्वक तालमेल बिठाना होगा।
- संभावित उपायों में समृद्ध परिवारों से लाभ छोड़ने की अपील और कर/गैर-कर राजस्व बढ़ाने के उपाय शामिल हो सकते हैं।
- वित्तीय दबावों के कारण पूंजीगत व्यय और बुनियादी ढांचे के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
- राजस्व संग्रह में कमी और उधार पर बढ़ती निर्भरता राज्य की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए चुनौतियां पेश करती है।
- स्थानीय निकाय चुनावों में देरी से केंद्रीय अनुदानों में भारी नुकसान का खतरा है, जिससे बजट पर और दबाव पड़ेगा।













