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ईरान पर अमेरिका-इज़राइल हमले: नौवें दिन ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया गया

ईरान पर अमेरिका-इज़राइल हमले: नौवें दिन ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया गया

ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों का नौवां दिन है, और युद्ध अब ऊर्जा बुनियादी ढांचे तक फैल गया है। सोमवार को, दोनों देशों ने ईरान के तेल भंडारण डिपो और शोधन सुविधाओं को पहली बार निशाना बनाया, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी घटनाओं में वृद्धि हुई। इज़राइली सेना ने कहा कि उसने शनिवार शाम को राजधानी तेहरान में ईंधन वितरण स्थलों पर हमला किया, जो ईरान में विभिन्न उपभोक्ताओं, विशेष रूप से सैन्य इकाइयों को आपूर्ति करते हैं।

इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि इज़राइल और अमेरिका ने ईरानी हवाई क्षेत्र पर “लगभग पूर्ण नियंत्रण” हासिल कर लिया है। उन्होंने आगे कहा कि “और भी कई लक्ष्य और आश्चर्य तैयार हैं,” जो भविष्य में और अधिक अभियानों का संकेत देते हैं।

ईरान के तेल बुनियादी ढांचे पर हमले

शनिवार शाम को तेहरान के आसपास के तेल भंडारण डिपो पर हुए हमलों के कारण ईंधन वितरण “अस्थायी रूप से बाधित” हो गया था। तेहरान के गवर्नर, मोहम्मद सादिक मोतामेदियान ने कहा कि ईंधन आपूर्ति नेटवर्क को हुए नुकसान के कारण वितरण में बाधा आई, लेकिन समस्या का समाधान किया जा रहा है। इन हमलों ने ईरान की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर तत्काल प्रभाव डाला है, जिससे देश के भीतर और क्षेत्रीय स्तर पर चिंताएं बढ़ गई हैं।

ईरान की कुल शोधन क्षमता 2.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक है, जिसमें अब्दना, बंदर अब्बास और फारस की खाड़ी स्टार रिफाइनरी जैसे प्रमुख परिसर शामिल हैं। फारस की खाड़ी स्टार रिफाइनरी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उच्च-गुणवत्ता वाले गैसोलीन का उत्पादन करती है, जिससे ईरान हाल के वर्षों में गैसोलीन का शुद्ध निर्यातक बन गया है। तेल और गैस सुविधाओं पर लक्षित हमलों से वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

क्षेत्रीय हमले और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने खाड़ी देशों से पिछले सप्ताह हुए हमलों के लिए माफी मांगी थी, जिसमें अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। उन्होंने कहा कि जब तक ईरान पर हमला नहीं होता, तब तक वह पड़ोसी देशों पर हमला नहीं करेगा। इसके बावजूद, रविवार की सुबह क्षेत्र भर में ड्रोन और मिसाइल गतिविधि की खबरें आती रहीं।

बहरीन के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को पुष्टि की कि देश के एक जल विलवणीकरण संयंत्र को ईरानी ड्रोन हमले से भौतिक क्षति हुई है। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने भी बताया कि देश के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ईंधन टैंकों को ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया था। इन घटनाओं ने नागरिक बुनियादी ढांचे को खतरे में डालने की आशंकाओं को बढ़ा दिया है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने इन घटनाओं पर मिश्रित प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने अमेरिका के हमलों का समर्थन किया है, जबकि रूस और चीन ने इसकी आलोचना की है। संयुक्त राष्ट्र परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा कि बातचीत आवश्यक है। यूरोपीय संघ के नेताओं ने संयम और कूटनीति का आह्वान किया है।

वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर प्रभाव

ईरान पर अमेरिका-इज़राइल के हमलों और जवाबी हमलों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को हिला दिया है। मलक्का जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। विश्लेषकों का कहना है कि तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हो सकती है और यह लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है।

  • तेल की कीमतों में $10 प्रति बैरल की वृद्धि देखी गई है।
  • मलक्का जलडमरूमध्य से लगभग 20-30% वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति होती है।
  • ईरान की उत्पादन क्षमता और निर्यात क्षमता 3.75 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गई थी।
  • ईरान OPEC के सदस्य देशों में दूसरा सबसे बड़ा तेल रिफाइनर है, जिसकी दैनिक शोधन क्षमता 2.237 मिलियन बैरल है।

ईरान के तेल निर्यात पर प्रतिबंधों का गहरा प्रभाव पड़ा है, लेकिन 2024 में उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। हालांकि, वर्तमान संघर्ष से ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

  • ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों का नौवां दिन है, जिसमें अब ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है।
  • इज़राइल ने तेहरान के पास तेल भंडारण डिपो और ईंधन वितरण स्थलों पर हमला किया है।
  • इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ईरानी हवाई क्षेत्र पर लगभग पूर्ण नियंत्रण का दावा किया है।
  • क्षेत्रीय स्तर पर, बहरीन और कुवैत ने ईरानी ड्रोन हमलों से नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान की सूचना दी है।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं मिश्रित हैं, कुछ देशों ने हमलों का समर्थन किया है, जबकि अन्य ने आलोचना की है।
  • वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ रहा है, तेल की कीमतों में वृद्धि और मलक्का जलडमरूमध्य में व्यापार में व्यवधान की चिंताएं बढ़ रही हैं।
  • ईरान की कुल शोधन क्षमता 2.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक है, जो देश की ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है।
  • संघर्ष के कारण ईरान के तेल उत्पादन और निर्यात में उतार-चढ़ाव देखा गया है, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें सुधार हुआ है।

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