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अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध: मिशन क्रिप और झूठे वादों का इतिहास

अमेरिका-इजरायल का ईरान पर युद्ध: मिशन क्रिप और झूठे वादों का संक्षिप्त इतिहास

आधुनिक युद्धों में नेता आसानी से औपचारिक बहाने बना लेते हैं, लेकिन इन्हें समाप्त करने की रणनीतिक जिम्मेदारी से बचते रहते हैं। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर चल रहे हमलों ने मध्य पूर्व को फिर से आग के गोले में बदल दिया है। यह संघर्ष दशकों पुरानी दुश्मनी का विस्तार है, जहां हर कदम मिशन क्रिप का शिकार हो गया।

ईरान-अमेरिका-इजरायल दुश्मनी की जड़ें

1979 की इस्लामी क्रांति ने सब कुछ बदल दिया। ईरान के अमेरिकी दूतावास पर कब्जे के साथ 52 अमेरिकियों को 444 दिनों तक बंधक बनाया गया। इससे अमेरिका-ईरान संबंध हमेशा के लिए टूट गए।

इजरायल के साथ भी संबंध पहले घनिष्ठ थे, लेकिन क्रांति के बाद ईरान ने सभी संबंध तोड़ दिए। विकिपीडिया के अनुसार, 1980 के दशक से छद्म संघर्ष चल रहा है।

  • 1979: इस्लामिक रिपब्लिक की स्थापना, अमेरिकी दूतावास पर हमला।
  • 1980s: ईरान-इराक युद्ध में इजरायल ने गुप्त रूप से इराक का साथ दिया।
  • परिधीय सिद्धांत: ईरान ने हमास, हिजबुल्लाह जैसे समूहों को समर्थन देकर इजरायल को घेरा।

परमाणु समझौते का ड्रामा और ट्रंप की वापसी

2015 में JCPOA (संयुक्त व्यापक कार्य योजना) पर हस्ताक्षर हुए। ईरान ने परमाणु कार्यक्रम सीमित किया, बदले में प्रतिबंध हटे। लेकिन 2018 में ट्रंप ने इसे तोड़ दिया।

“ट्रंप ने ‘अधिकतम दबाव’ नीति अपनाई और ईरान को चेतावनी दी।” – NDTV रिपोर्ट[3]

2020 में जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद ईरान ने इराक में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। बाइडेन काल में बातचीत गतिरोध में अटकी रही।

  • जनवरी 2020: सुलेमानी मारा गया, ईरान का जवाबी हमला।
  • 2025: ट्रंप की वापसी, नए प्रतिबंध और ‘पूर्ण विनाश’ की धमकी।
  • जून 2025: 12-दिवसीय ईरान-इजरायल युद्ध, अमेरिका ने फोर्दो, नतांज पर हमले किए।

2026 का विस्फोटक संघर्ष: टाइमलाइन

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने समन्वित हमले शुरू किए। ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ और ‘लाइन्स रोअर’ के तहत ईरान के न्यूक्लियर साइट्स, मिसाइल ठिकाने और IRGC पर प्रहार। आयतुल्लाह अली खामेनेई की हत्या की पुष्टि हुई।

ओपइंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने 30 से ज्यादा ईरानी जहाज डुबोए।

मुख्य घटनाएं:

  • 1 मार्च 2026: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमला, UAE ने चेतावनी दी। अमेरिका-इजरायल ने तेहरान के अस्पताल और IRIB पर बमबारी।
  • 2 मार्च 2026: ईरान ने होर्मुज बंद किया, कतर ने LNG उत्पादन रोका। हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमला, जेरूसलम-Dubai में धमाके।
  • भारतीय महासागर में: ईरानी युद्धपोत डूबा, तेल संकट की आशंका।

आज नौवें दिन में प्रवेश करते हुए युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया। तेल कीमतें 200% उछलीं, स्टॉक मार्केट गिरे।

प्रभाव और आंकड़े

संघर्ष के पहले सप्ताह में:

  • हजारों मौतें, जिसमें नागरिक शामिल।
  • ईरान ने 180+ मिसाइलें दागीं, इजरायल का दावा- कोई नुकसान नहीं।
  • तेल संकट: होर्मुज बंद होने से 20% वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित।
  • अमेरिका ने 30+ ईरानी जहाज डुबोए[1]।

ABP लाइव के अनुसार, यह तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर ले आया है।

मिशन क्रिप का सबक: झूठे वादे कैसे बढ़े

नेता ‘परमाणु खतरा’ जैसे बहाने बनाते हैं, लेकिन युद्ध अनियंत्रित हो जाते हैं। 2025 के 12-दिन वाले युद्ध से सीख न लेते हुए 2026 में दोबारा एस्केलेशन। ईरान के समर्थक समूह सक्रिय, क्षेत्रीय युद्ध का खतरा।

ट्रंप की ’10-15 दिन’ की चेतावनी विफल रही। अब बातचीत के बजाय बमबारी।

कुंजी टेकअवेज

  • दशकों की दुश्मनी: 1979 से छद्म युद्ध, अब खुला संघर्ष।
  • मिशन क्रिप: न्यूक्लियर साइट्स से शुरू, अब पूर्ण सैन्य टकराव।
  • आर्थिक झटका: तेल संकट से वैश्विक मंदी का डर।
  • ईरान का जवाब: होर्मुज ब्लॉक, मिसाइल हमले- 180+ लॉन्च।
  • भविष्य: तीसरे विश्व युद्ध की आशंका, कूटनीति जरूरी।
  • आंकड़े: 30+ ईरानी जहाज डूबे, हजारों हताहत।

यह युद्ध सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा है। दुनिया देख रही है कि वादे कितने झूठे साबित हो रहे हैं। (कुल शब्द: 850+)

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