इथियोपिया में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन: 64 की मौत, दर्जनों लापता
इथियोपिया के दक्षिणी क्षेत्रों में हाल ही में हुई भीषण बारिश ने भारी तबाही मचाई है। भूस्खलन और बाढ़ की इन घटनाओं में कम से कम 64 लोगों की जान चली गई है, जबकि कई अन्य अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, मरने वालों में से अधिकांश की पहचान कीचड़ में दबे शवों के रूप में हुई है। यह घटना देश के प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बढ़ते जोखिम को उजागर करती है, जो अक्सर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से और बढ़ जाते हैं।
आपदा का पैमाना और प्रभाव
यह दुखद घटना गमो ज़ोन के बोनके, गचो बाबा और काम्बा जिलों में हुई, जहाँ लगातार बारिश ने भूस्खलन को जन्म दिया। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि कई घर मलबे में दब गए, जिससे हताहतों की संख्या बढ़ गई। बचाव कार्यों में भी भारी बाधाओं का सामना करना पड़ा, क्योंकि भूस्खलन और बाढ़ के कारण सड़कें अवरुद्ध हो गईं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल हो गया।
भूस्खलन और बाढ़ के कारण
इथियोपिया, विशेष रूप से इसके पहाड़ी और निचले इलाके, भारी बारिश के कारण भूस्खलन और बाढ़ के प्रति संवेदनशील हैं। देश की स्थलाकृति और वनों की कटाई जैसी मानवीय गतिविधियाँ इन जोखिमों को और बढ़ा देती हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा के पैटर्न में अनियमितता देखी जा रही है, जिससे अचानक और तीव्र वर्षा की घटनाएं बढ़ रही हैं। ये घटनाएं मिट्टी को अस्थिर करती हैं, जिससे भूस्खलन होता है, और नदियों के जल स्तर को खतरनाक रूप से बढ़ा देती हैं, जिससे बाढ़ आती है।
मार्च 2026 की शुरुआत में हुई यह घटना कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में इथियोपिया ने इसी तरह की कई विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है। उदाहरण के लिए:
- जुलाई 2024 में, दक्षिणी इथियोपिया में भूस्खलन ने कम से कम 229 लोगों की जान ले ली थी, जो देश के इतिहास की सबसे घातक भूस्खलन आपदाओं में से एक थी।
- अगस्त 2024 में, वोलैयिता ज़ोन में भारी बारिश के कारण आए भूस्खलन में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई थी।
- नवंबर 2023 में, एल नीनो से प्रेरित बाढ़ ने सोमाली क्षेत्र में 15 लाख से अधिक लोगों को प्रभावित किया था, जिसमें 57 लोगों की मौत हुई थी और 632,700 से अधिक लोग विस्थापित हुए थे।
जलवायु परिवर्तन और भेद्यता
इथियोपिया जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील देशों में से एक है। बार-बार आने वाले सूखे और बाढ़ ने देश की आबादी और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाला है। 2021 की एक रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 2045 तक 10% तक की कमी आ सकती है, जिसका मुख्य कारण कृषि उत्पादकता पर सूखे का प्रभाव होगा।
जलवायु परिवर्तन वर्षा के पैटर्न को तीव्र कर रहा है, जिससे अत्यधिक वर्षा की घटनाएं बढ़ रही हैं। यह मिट्टी को संतृप्त करता है, जिससे भूस्खलन की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही, बाढ़ और सूखे के चक्र से खाद्य असुरक्षा और विस्थापन जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की रिपोर्टों से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसी आवश्यक सेवाओं तक पहुँचने में कठिनाई हो रही है।
बचाव और राहत कार्य
आपदा के तुरंत बाद, बचाव और राहत कार्य शुरू कर दिए गए। हालांकि, प्रभावित क्षेत्रों में संचार और परिवहन की कमी के कारण इन प्रयासों में बाधा आ रही है। स्थानीय अधिकारियों ने निवासियों से ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की है, क्योंकि बारिश का मौसम अभी जारी है और आगे भी ऐसी आपदाओं का खतरा बना हुआ है।
अंतर्राष्ट्रीय सहायता संगठन भी स्थिति पर नजर रख रहे हैं और सहायता प्रदान करने की तैयारी कर रहे हैं। विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) जैसी संस्थाएं पहले भी इथियोपिया में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को भोजन और अन्य आवश्यक सहायता प्रदान करती रही हैं।
भविष्य की तैयारी और निवारण
इथियोपिया में इस तरह की आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति को देखते हुए, भविष्य की तैयारी और निवारक उपायों पर ध्यान देना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें शामिल हैं:
- प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना: राष्ट्रीय मौसम विज्ञान एजेंसी (NMA) जैसी संस्थाएं प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, जिससे समय पर निकासी और तैयारी संभव हो सके।
- वनीकरण और भूमि प्रबंधन: वनों की कटाई को रोकना और टिकाऊ भूमि प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा देना भूस्खलन के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
- बुनियादी ढांचे का विकास: बाढ़ और भूस्खलन प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे का निर्माण, जैसे कि मजबूत पुल और सड़कें, आपदाओं के प्रभाव को कम कर सकता है।
- जलवायु परिवर्तन अनुकूलन: दीर्घकालिक समाधानों के लिए जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूल होने की रणनीतियों को अपनाना आवश्यक है।
- जन जागरूकता और शिक्षा: समुदायों को जोखिमों के बारे में शिक्षित करना और उन्हें सुरक्षित रहने के उपायों के बारे में जागरूक करना महत्वपूर्ण है।
इथियोपिया के राष्ट्रपति,तिलुहुन केबेडे ने निवासियों से आग्रह किया है कि वे ऊंचे स्थानों पर चले जाएं और आवश्यक सावधानियां बरतें, क्योंकि यह बारिश का मौसम है और ऐसी आपदाएं फिर से हो सकती हैं।
“यह एक दुखद घटना है जो हमें जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों की याद दिलाती है। हमारा सामूहिक प्रयास होना चाहिए कि हम ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए तैयार रहें और अपने समुदायों की रक्षा करें।”
मुख्य निष्कर्ष (Key Takeaways)
- इथियोपिया के दक्षिणी क्षेत्रों में हाल ही में भूस्खलन और बाढ़ के कारण कम से कम 64 लोगों की मौत हुई है और कई अन्य लापता हैं।
- यह घटना जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को रेखांकित करती है, जिससे इथियोपिया जैसे देश अत्यधिक प्रभावित हो रहे हैं।
- भारी बारिश, अस्थिर मिट्टी और अपर्याप्त बुनियादी ढांचा इन आपदाओं के मुख्य कारण हैं।
- इथियोपिया ने अतीत में भी इसी तरह की गंभीर भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं का सामना किया है, जिनमें से कुछ में सैकड़ों लोगों की जान गई है।
- प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना, वनीकरण, टिकाऊ भूमि प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन जैसी निवारक रणनीतियाँ भविष्य की आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय सहायता संगठन, जैसे कि विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और यूनिसेफ, इथियोपिया में मानवीय संकटों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- सरकार और निवासियों दोनों के लिए जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।













