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ईरान का अमेरिका और इजरायल पर आरोप: होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव का कारण

ईरान का अमेरिका और इजरायल पर आरोप: होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव का कारण

विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य, एक बार फिर भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र बन गया है। ईरान के विदेश मंत्री, अब्बास अराघची, ने स्पष्ट रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल पर इस रणनीतिक जलमार्ग में अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि यह “सैन्य आक्रामकता” वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को खतरे में डाल रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसकी निंदा करने का आह्वान किया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित है, और यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। अनुमानों के अनुसार, दुनिया के लगभग 20% तेल का प्रवाह इसी जलडमरूमध्य से होता है। विशेष रूप से एशिया के देश, जैसे कि चीन और भारत, अपनी तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करते हैं। इस मार्ग पर किसी भी प्रकार की रुकावट का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

ईरान के आरोप और प्रतिक्रिया

ईरान के विदेश मंत्री, अब्बास अराघची, ने एक बयान में कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता इजरायल-अमेरिकी युद्ध का परिणाम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग कर रहा है और इस “आक्रामकता” का जवाब दे रहा है। अराघची के अनुसार, जलडमरूमध्य “हमारे दुश्मनों और उनके सहयोगियों” के लिए बंद है, लेकिन अन्य देशों के लिए खुला रहेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए गए थे, जिसके जवाब में ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की थी।

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से इस “सैन्य आक्रामकता” की निंदा करने का आग्रह किया है। विदेश मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि अमेरिका और इजरायल की “आक्रामक और अस्थिर करने वाली कार्रवाइयों” के कारण फारस की खाड़ी में जहाजरानी सुरक्षा को समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अमेरिका को इसके लिए जवाबदेह ठहराना चाहिए।

वैश्विक प्रभाव और चिंताएं

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं। मार्च 2026 के पहले सप्ताह में, जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में 90% की गिरावट आई थी। इसके जवाब में, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इतिहास में सबसे बड़ी आपातकालीन आरक्षित तेल रिहाई शुरू की, जिसमें 400 मिलियन बैरल तेल को वैश्विक बाजार में जारी किया गया। यह कदम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को ढहने से रोकने के लिए उठाया गया था।

“होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले लगभग 20% वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के प्रवाह के साथ, इस जलमार्ग पर किसी भी प्रकार की रुकावट का विश्व तेल बाजारों पर भारी असर पड़ेगा।”

– अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA)

मध्य पूर्व के तेल और गैस निर्यातक देश, जैसे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात, पहले से ही राजस्व में भारी कमी का सामना कर रहे हैं। जबकि वैकल्पिक निर्यात मार्ग मौजूद हैं, वे होर्मुज जलडमरूमध्य से सामान्य रूप से गुजरने वाले तेल की मात्रा का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही संभाल सकते हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कोई नई बात नहीं है। इतिहास गवाह है कि यह क्षेत्र भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का केंद्र रहा है। ईरान-इराक युद्ध के दौरान, 1980 के दशक में “टैंकर युद्ध” हुआ, जिसमें जहाजों पर हमले हुए और शिपिंग लेन को सुरक्षित करने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। तब से, ईरान ने अक्सर धमकी दी है कि यदि उसे खतरा महसूस हुआ तो वह जलडमरूमध्य को बंद कर सकता है।

प्रमुख बिंदु

  • ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है।
  • ईरान का आरोप है कि यह “सैन्य आक्रामकता” वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को खतरे में डाल रही है।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के लगभग 20% तेल का प्रवाह होता है, जो इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बनाता है।
  • जलडमरूमध्य में रुकावटों से ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला में बाधा उत्पन्न होने का खतरा है।
  • अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने संभावित ऊर्जा संकट से निपटने के लिए आपातकालीन तेल भंडार जारी किया है।
  • ईरान ने कहा है कि जलडमरूमध्य “हमारे दुश्मनों और उनके सहयोगियों” के लिए बंद है, लेकिन दूसरों के लिए खुला रहेगा।
  • ऐतिहासिक रूप से, होर्मुज जलडमरूमध्य कई संघर्षों का स्थल रहा है, जिसमें 1980 के दशक का “टैंकर युद्ध” भी शामिल है।

यह स्थिति वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संकट के समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर नजर रखे हुए है।

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