Home / Economy / प्रधानमंत्री मुद्रा योजना: 39.48 लाख करोड़ रुपये, 2% NPA दर

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना: 39.48 लाख करोड़ रुपये, 2% NPA दर

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने भारतीय उद्यमिता को नया आयाम दिया है

देश के सूक्ष्म और लघु उद्यमों को सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) ने 10 वर्षों में एक अभूतपूर्व सफलता का सफर तय किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक 39.48 लाख करोड़ रुपये का ऋण मंजूर किया जा चुका है, जबकि गैर-निष्पादित संपत्तियां (NPA) महज 2 प्रतिशत पर सीमित रहीं हैं। यह आंकड़े न केवल योजना की वित्तीय सफलता को दर्शाते हैं, बल्कि इसके उद्देश्य – ‘अनबैंक्ड को फंडिंग’ (Funding the Unfunded) – के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित करते हैं।

मुद्रा योजना: संख्याओं में सफलता की कहानी

अप्रैल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च की गई यह योजना आज भारत के सबसे बड़े सूक्ष्म-ऋण कार्यक्रमों में से एक बन गई है। मुद्रा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 52 करोड़ से अधिक ऋण मंजूर किए जा चुके हैं, जिनका कुल मूल्य 32.61 लाख करोड़ रुपये है।

इस योजना के तहत हर सेकंड 1.6 ऋण मंजूर किए जा रहे हैं – जो मानव हृदय की गति से भी तेज है। ये आंकड़े खुद ही इस योजना के व्यापक प्रभाव को बयां करते हैं:

  • 52 करोड़ से अधिक ऋण खातों का निर्माण
  • 10.6 करोड़ ऋण नई एवं पहली बार के उद्यमियों को दिए गए
  • प्रति वर्ष औसतन 2.52 करोड़ रोजगार सृजन
  • 68 प्रतिशत ऋण महिला उद्यमियों को प्रदान किए गए
  • 50 प्रतिशत ऋण अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उद्यमियों को मिले

ऋण के तीन मुख्य वर्ग

मुद्रा योजना चार ऋण श्रेणियों के माध्यम से विभिन्न स्तर के उद्यमियों को समर्थन प्रदान करती है:

  • शिशु: 50,000 रुपये तक के ऋण – सबसे छोटे उद्यमों के लिए
  • किशोर: 50,000 से 5 लाख रुपये तक – बढ़ते हुए व्यवसायों के लिए (FY25 में 44.7% ऋण)
  • तरुण: 5 लाख से 10 लाख रुपये तक – स्थापित व्यवसायों के लिए
  • तरुण प्लस: 10 लाख से 20 लाख रुपये तक – पूर्व में मुद्रा ऋण चुकाने वाले उद्यमियों के लिए (जुलाई 2024 में घोषित)

महिलाओं के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका

मुद्रा योजना महिला उद्यमिता के क्षेत्र में एक गेम-चेंजर साबित हुई है। 68 प्रतिशत ऋण महिला उद्यमियों को दिए गए हैं, जिससे 2.8 मिलियन से अधिक महिला-स्वामित्व वाली सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) का निर्माण हुआ है। यह आंकड़ा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा भी स्वीकृत किया गया है।

इस योजना ने सामाजिक रूप से वंचित समूहों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उद्यमियों को कुल मुद्रा ऋण का 50 प्रतिशत से अधिक प्रदान किए गए हैं।

वित्तीय स्वास्थ्य और ऋण वसूली

कम NPA दर: विश्वसनीयता का संकेत

मुद्रा योजना की सबसे महत्वपूर्ण सफलता इसकी कम गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA) दर है। वर्तमान में यह दर मात्र 2 प्रतिशत के आसपास है, जो वैश्विक स्तर पर इस खंड के लिए सबसे कम दरों में से एक है।

यह कम NPA दर कई कारणों को दर्शाती है:

  • उद्यमियों की आत्मनिर्भरता और ऋण चुकाने की प्रतिबद्धता
  • सरकार के सूक्ष्म-ऋण के प्रति सकारात्मक रुख
  • बैंकों द्वारा सक्रिय ऋण वसूली के उपाय
  • योजना की पारदर्शी और कुशल कार्यान्वयन प्रणाली

MSME क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि

मुद्रा योजना के प्रभाव से MSME ऋण में भी तेजी आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, MSME ऋण FY14 में 8.51 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर FY24 में 27.25 लाख करोड़ रुपये हो गया, और अनुमान है कि FY25 में यह 30 लाख करोड़ रुपये को पार कर जाएगा।

स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन

मुद्रा योजना का प्रभाव केवल वित्तीय संख्याओं तक सीमित नहीं है। यह योजना भारत के छोटे शहरों और गांवों में उद्यमिता की एक नई संस्कृति का विकास कर रही है। पहली बार के 10.6 करोड़ उद्यमियों ने अपनी व्यावसायिक यात्रा शुरू की है, जिससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक विकास के चक्र तैयार हो रहे हैं।

SKOCH की ‘मोदीनॉमिक्स 2014-24’ रिपोर्ट के अनुसार, मुद्रा योजना ने अकेले प्रति वर्ष औसतन 2.52 करोड़ स्थिर और टिकाऊ रोजगार का सृजन किया है। जम्मू और कश्मीर जैसे क्षेत्रों में 20.72 लाख ऋण मंजूर किए गए हैं, जो सुदूर इलाकों तक योजना की पहुंच को दर्शाता है।

भविष्य की दिशा: ऋण सीमा में वृद्धि

बढ़ते व्यवसायों को और अधिक समर्थन प्रदान करने के लिए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई 2024 के बजट में ऋण सीमा को 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने की घोषणा की। यह नई सीमा अक्टूबर 2024 से प्रभावी हुई और पूर्व में मुद्रा ऋण चुकाने वाले उद्यमियों के लिए एक नई ‘तरुण प्लस’ श्रेणी का निर्माण हुआ।

यह कदम बताता है कि कैसे सरकार योजना को गतिशील रख रही है और उद्यमियों की बदलती जरूरतों को पूरा कर रही है।

अंतर्राष्ट्रीय मान्यता

मुद्रा योजना को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकृति मिली है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने योजना की प्रशंसा की है और कहा है कि यह महिला उद्यमिता और सूक्ष्म-ऋण के क्षेत्र में एक मॉडल है। इस प्रकार की सक्षमता नीति से आत्मनिर्भरता और औपचारिकरण बढ़ रहा है।

Key Takeaways (मुख्य बातें)

1. विशाल वित्तीय प्रभाव: 39.48 लाख करोड़ रुपये का ऋण वितरण इस योजना के व्यापक दायरे को दर्शाता है।

2. कम ऋण जोखिम: 2% की NPA दर योजना की पारदर्शिता और ऋणदाताओं की जिम्मेदारी को साबित करती है।

3. महिला सशक्तिकरण: 68% ऋण महिला उद्यमियों को दिए गए हैं, जो लैंगिक समानता की ओर एक बड़ा कदम है।

4. सामाजिक समावेशन: SC/ST/OBC उद्यमियों को कुल ऋण का 50% से अधिक मिलना समाज के सभी वर्गों को शामिल करता है।

5. रोजगार सृजन: 2.52 करोड़ वार्षिक रोजगार का सृजन राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान है।

6. नई ऊंचाइयां: 20 लाख रुपये की नई ऋण सीमा विकसित उद्यमियों को स्केल करने का मौका देती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *