राज्य में सुलगती गर्मी से राहत: ग्रीष्मकालीन वर्षा ने लाया सुकून
गर्मी की तपिश से परेशान लोगों को आखिरकार राहत मिली है। राज्य के कई हिस्सों में अचानक हुई ग्रीष्मकालीन बारिश ने मौसम को सुहावना बना दिया। यह वर्षा न केवल तापमान को कम करने में सहायक हुई, बल्कि किसानों के चेहरों पर भी मुस्कान लाई।
IMD के अनुसार, मार्च 2026 में उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई। यह बदलाव El Niño की आशंकाओं के बीच एक सकारात्मक संकेत है।
वर्षा का प्रभाव: तापमान में गिरावट और कृषि को लाभ
ग्रीष्मकालीन बारिश ने राज्य के मैदानी इलाकों में तापमान को 4-5 डिग्री सेल्सियस तक घटा दिया। IMD पुणे की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में देशव्यापी वर्षा 82-118% LPA के बीच रहने की संभावना थी, जो वास्तव में पूरी हुई।
- उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य वर्षा।
- मध्य भारत और उत्तर प्रदेश में ऊपर-से-ऊपर वर्षा।
- न्यूनतम तापमान अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से नीचे।
किसानों ने बताया कि यह वर्षा खरीफ फसलों की तैयारी में मददगार साबित हुई। IMD पुणे की लेटेस्ट रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि कोल्ड वेव के दिन कम हुए।
क्षेत्रवार वर्षा का विवरण
राज्य के पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में वर्षा 78-122% LPA रही। हालांकि, उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में कुछ कमी देखी गई।
“वर्षा ने गर्मी की लहर को तोड़ दिया, लेकिन मानसून की चिंताएं बरकरार हैं।” – मौसम विशेषज्ञ
मानसून 2026 की आशंकाएं: El Niño का खतरा मंडरा रहा
ग्रीष्मकालीन राहत के बावजूद, SkyMet ने 2026 मानसून के लिए 60% कम वर्षा की संभावना जताई है। AVM जी पी शर्मा ने चिनीमंडी को बताया कि जुलाई 2026 से El Niño की स्थिति बन सकती है।
- SkyMet: 60% संभावना कम मानसूनी वर्षा की।
- NOAA: अगस्त-सितंबर में 60% El Niño की संभावना।
- IMD: स्प्रिंग बैरियर के कारण पूर्वानुमान कठिन।
SkyMet की रिपोर्ट में कहा गया कि स्प्रिंग बैरियर (मार्च-मई में ENSO पूर्वानुमान में अनिश्चितता) भविष्यवाणी प्रभावित कर सकता है। 2025 मानसून 108% LPA (937.2 मिमी) रहा, लेकिन 2026 चिंताजनक।
El Niño क्या है और इसका प्रभाव
El Niño प्रशांत महासागर में तापमान वृद्धि का घटना है, जो भारत में कम मानसून और गर्मियां लाता है। 2023-24 में पूर्ण El Niño से वर्षा औसत से कम रही।
- मध्यम El Niño: 1-1.5°C तापमान वृद्धि।
- विश्व मौसम संगठन: अप्रैल-जून में 30%, मई-जुलाई में 40% संभावना।
- CCSR/IRI: फरवरी-अप्रैल 2026 में La Niña केवल 4%।
मौसम वैज्ञानिक एम राजीवन ने कहा, “सुपर El Niño से 2027 में गर्म लहरें बढ़ेंगी।” डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट में IMD अलर्ट पर है।
कृषि और अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
कम मानसून से खरीफ फसलें प्रभावित हो सकती हैं। भारत में मानसून कृषि का आधार है, जो GDP का 15-18% योगदान देता है। 2025 के 108% वर्षा के बाद 2026 की कम वर्षा चिंता का विषय।
विशेषज्ञों का सुझाव: सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और जल संरक्षण। NOAA के अनुसार, जून-अगस्त में 56% ENSO न्यूट्रल, लेकिन El Niño हावी।
तापमान पूर्वानुमान
जनवरी 2026 में अधिकतम तापमान उत्तर-पश्चिम में सामान्य से ऊपर। ग्रीष्मकालीन वर्षा ने अभी राहत दी, लेकिन गर्मी लौट सकती है।
- कोल्ड वेव: मध्य भारत, पूर्वी यूपी, बिहार में।
- La Niña: दिसंबर 2025 तक जारी, जनवरी 2026 में न्यूट्रल।
Key Takeaways
- राज्य में ग्रीष्मकालीन वर्षा से तापमान में 4-5°C गिरावट, IMD के अनुसार 78-122% LPA वर्षा।
- SkyMet: 2026 मानसून में 60% कम वर्षा की संभावना, El Niño जुलाई से।
- स्प्रिंग बैरियर पूर्वानुमान को कठिन बना रहा, अप्रैल तक इंतजार।
- 2025 मानसून 108% LPA सफल, लेकिन 2026 में कृषि जोखिम बढ़ा।
- तैयारी जरूरी: जल संरक्षण और वैकल्पिक सिंचाई पर जोर।
यह वर्षा राहत तो है, लेकिन लंबी अवधि की योजना आवश्यक। मौसम पर नजर रखें।











