शिवराज सिंह चौहान का कांग्रेस पर वार: मनरेगा आंदोलन को जन समर्थन का अभाव
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को लेकर चलाए जा रहे आंदोलन को ‘सिर्फ राजनीतिक हंगामा’ करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर जन समर्थन जुटाने में विफल रही है और उनका यह आंदोलन केवल चुनावी लाभ के लिए है। चौहान ने कहा कि कांग्रेस ग्रामीण रोजगार के प्रति न तो गंभीर है और न ही उनके पास कोई ठोस नीति है।
मनरेगा: कांग्रेस के आरोपों का खंडन
कांग्रेस ने हाल ही में मनरेगा को खत्म करने या कमजोर करने के आरोपों के बीच ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ की घोषणा की थी। इसके जवाब में, शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस, मनरेगा की जगह नए विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB–G RAM G) को लाने पर ‘घड़ियाली आंसू बहा’ रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए बार-बार मनरेगा का बजट कम किया और मजदूरी रोकी, लेकिन अब वे गरीबों के मसीहा बनने का नाटक कर रहे हैं।
“कांग्रेस का शोर सिर्फ राजनैतिक है। कांग्रेस के पास न नीयत थी, न नीति। यह वही कांग्रेस है जिसने चुनावी फायदे के लिए महात्मा गांधी जी का नाम जोड़ा। यह वही कांग्रेस है, जिसने समय-समय पर मनरेगा का बजट कम किया। यह वही कांग्रेस है, जिसने मजदूरी फ्रीज की। आज कांग्रेसी घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं।” – शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री
नई रोजगार योजना की विशेषताएं
केंद्रीय मंत्री ने नए ग्रामीण रोजगार ढांचे का बचाव करते हुए कहा कि यह प्रणाली प्रौद्योगिकी-आधारित पारदर्शिता और समय पर मजदूरी के भुगतान पर केंद्रित है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि फंड सीधे मजदूरों के बैंक खातों में जमा हों। उन्होंने आगे कहा कि अब फैसले दिल्ली से गांवों में शिफ्ट हो जाएंगे, जिसमें ग्राम पंचायतें अपनी खुद की रोजगार योजनाएं तैयार करेंगी। यह विकेंद्रीकृत योजना प्रणाली को मजबूत करेगा और स्थानीय जरूरतों को पूरा करेगा।
मनरेगा की वर्तमान स्थिति और चुनौतियाँ
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल श्रमिकों को 100 दिनों का रोजगार प्रदान करना है। यह योजना ग्रामीण आजीविका सुरक्षा को बढ़ाने और शहरी पलायन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वित्त वर्ष 2024-25 में, मनरेगा के लिए 86,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जो योजना की शुरुआत के बाद से सबसे अधिक है। हालांकि, योजना के कार्यान्वयन में कुछ चुनौतियाँ भी हैं, जैसे कि मजदूरी भुगतान में देरी, अपूर्ण कार्य, और कभी-कभी कार्य की गुणवत्ता का मुद्दा।
- रोजगार सृजन: वित्त वर्ष 2024-25 में 290.60 करोड़ मानव दिवस सृजित किए गए।
- महिला भागीदारी: वित्त वर्ष 2024-25 तक महिलाओं की भागीदारी 58.15% तक पहुँच गई, जिसमें 440.7 लाख महिलाओं ने भाग लिया।
- मजदूरी दर: वित्त वर्ष 2023-24 के लिए, मनरेगा मजदूरी दरें राज्य के अनुसार भिन्न थीं, हरियाणा में सबसे अधिक ₹357 प्रति दिन और मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सबसे कम ₹221 प्रति दिन थी। 1 अप्रैल 2024 से, नई मजदूरी दरें लागू हुई हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में मजदूरी दरें ₹230 से बढ़कर ₹243 हो सकती हैं।
कांग्रेस के आंदोलन पर विस्तृत विश्लेषण
कांग्रेस ने 5 जनवरी से देशव्यापी ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ शुरू करने की घोषणा की थी, जिसमें विपक्षी दलों से भी समर्थन की उम्मीद जताई गई थी। पार्टी की कार्य समिति (CWC) की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई और नेताओं ने आंदोलन खड़ा करने की शपथ ली। यह आंदोलन तब आया है जब संसद ने ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ को मंजूरी दी है, जिसे मनरेगा का स्थान लेने वाला बताया जा रहा है।
शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के आंदोलन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्होंने कई तारीखें घोषित कीं – 5 जनवरी, 8 जनवरी, और 10 जनवरी – लेकिन देश में कहीं भी कोई बड़ा आंदोलन दिखाई नहीं दिया। उन्होंने एक वायरल तस्वीर का भी जिक्र किया जिसमें ‘महामजदूर’ जींस पहने हुए थे, यह दर्शाने के लिए कि यह आंदोलन केवल प्रतीकात्मक था।
मनरेगा की प्रासंगिकता और भविष्य
मनरेगा को दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक कल्याण कार्यक्रमों में से एक माना जाता है। यह ग्रामीण भारत में आजीविका सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण रहा है, खासकर कोविड-19 महामारी के दौरान जब शहरी प्रवासियों को रोजगार की सख्त जरूरत थी। हालांकि, योजना के कार्यान्वयन में सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है। नई योजनाएं, जैसे कि VB-G RAM G, का उद्देश्य पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है, लेकिन यह देखना बाकी है कि क्या वे मनरेगा की मूल भावना को बनाए रख पाएंगे।
मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को कम से कम 100 दिनों का गारंटीकृत रोजगार प्रदान करना है, जिससे उनकी आजीविका सुरक्षा बढ़े। योजना की सफलता का एक पैमाना महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भी है, जो ग्रामीण महिला श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) में वृद्धि को भी दर्शाता है।
मुख्य बातें
- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के मनरेगा आंदोलन को ‘राजनीतिक हंगामा’ बताया और जन समर्थन न होने का दावा किया।
- कांग्रेस ने मनरेगा को खत्म करने के आरोपों के बीच ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ शुरू किया है।
- शिवराज सिंह चौहान ने मनरेगा की जगह आने वाली नई योजना VB–G RAM G का बचाव किया, जो पारदर्शिता और प्रौद्योगिकी पर आधारित है।
- मनरेगा भारत की एक महत्वपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना है, जिसने लाखों लोगों को रोजगार प्रदान किया है।
- वित्त वर्ष 2024-25 के लिए मनरेगा का बजट आवंटन 86,000 करोड़ रुपये था, जो अब तक का सबसे अधिक है।
- योजना के कार्यान्वयन में सुधार की आवश्यकता है, जैसे कि मजदूरी भुगतान में देरी और कार्यों की गुणवत्ता।
- कांग्रेस के आंदोलन को जमीनी स्तर पर कोई खास समर्थन नहीं मिला, जैसा कि शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया।













