पुराना बनाम नया आयकर व्यवस्था: 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नियम जो आपकी बचत बढ़ा सकते हैं
जैसे-जैसे नया वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल 2026 नजदीक आ रहा है, करदाताओं के बीच इस बात को लेकर उत्सुकता बढ़ रही है कि कौन सी आयकर व्यवस्था उनके लिए अधिक फायदेमंद होगी। सरकार ने कर प्रणाली को सरल बनाने और करदाताओं को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से पुराने और नए दोनों आयकर व्यवस्थाओं में कुछ महत्वपूर्ण समायोजन किए हैं। यह समझना महत्वपूर्ण है कि इन परिवर्तनों का आपकी कर देनदारी पर क्या प्रभाव पड़ेगा और आप अपनी बचत को कैसे अधिकतम कर सकते हैं।
नई कर व्यवस्था: कर-मुक्त आय की बढ़ी हुई सीमा
नई कर व्यवस्था, जो अब डिफ़ॉल्ट व्यवस्था है, करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करती है। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी, इस व्यवस्था के तहत, ₹12 लाख तक की कर योग्य आय वाले व्यक्तियों को कोई आयकर नहीं देना होगा। यह संभव हुआ है धारा 87A के तहत ₹60,000 की बढ़ी हुई कर छूट के कारण। इसके अतिरिक्त, वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए, ₹75,000 की मानक कटौती को ध्यान में रखते हुए, ₹12.75 लाख तक की आय प्रभावी रूप से कर-मुक्त हो जाती है [cite:2, cite:5, cite:17]।
नई कर व्यवस्था के तहत कर स्लैब इस प्रकार हैं:
- ₹0 से ₹4 लाख: 0%
- ₹4 लाख से ₹8 लाख: 5%
- ₹8 लाख से ₹12 लाख: 10%
- ₹12 लाख से ₹16 लाख: 15%
- ₹16 लाख से ₹20 लाख: 20%
- ₹20 लाख से ₹24 लाख: 25%
- ₹24 लाख से ऊपर: 30%
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि नई कर व्यवस्था में धारा 80C, 80D, HRA (हाउस रेंट अलाउंस) और LTA (लीव ट्रैवल अलाउंस) जैसी अधिकांश सामान्य कटौतियों और छूटों की अनुमति नहीं है [cite:12, cite:17]। हालांकि, यह कम कर दरों के साथ आता है, जो कई करदाताओं के लिए फायदेमंद हो सकता है।
पुरानी कर व्यवस्था: कटौतियों और छूटों का लाभ उठाएं
इसके विपरीत, पुरानी कर व्यवस्था उन करदाताओं के लिए एक आकर्षक विकल्प बनी हुई है जो विभिन्न कटौतियों और छूटों का लाभ उठाना चाहते हैं। हालांकि मूल कर स्लैब अपरिवर्तित हैं, पुरानी व्यवस्था उन लोगों के लिए अधिक कर-बचत के अवसर प्रदान करती है जो निवेश करते हैं और पात्र खर्चों का दावा करते हैं। ₹5 लाख तक की आय वाले व्यक्तियों को धारा 87A के तहत ₹12,500 की छूट के कारण कोई कर नहीं देना पड़ता है [cite:3, cite:17]।
पुरानी कर व्यवस्था के तहत कुछ प्रमुख कटौतियां और छूटें इस प्रकार हैं:
- धारा 80C: जीवन बीमा प्रीमियम, ELSS (इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम), PPF (पब्लिक प्रोविडेंट फंड), NSC (नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट), होम लोन के मूलधन का भुगतान, बच्चों की शिक्षा फीस आदि में निवेश पर ₹1.5 लाख तक की कटौती। [cite:8, cite:10, cite:14]
- धारा 80D: स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के लिए कटौती।
- हाउस रेंट अलाउंस (HRA): यदि आप किराए के मकान में रहते हैं तो कर-मुक्त।
- होम लोन ब्याज: स्व-अधिकृत संपत्ति के लिए होम लोन पर भुगतान किए गए ब्याज पर धारा 24 के तहत कटौती का दावा किया जा सकता है [cite:10, cite:14]।
- मानक कटौती: वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए ₹50,000 की मानक कटौती उपलब्ध है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि नई कर व्यवस्था के विपरीत, पुरानी कर व्यवस्था में करदाताओं को अपनी कर देनदारी को कम करने के लिए निवेश और व्यय के माध्यम से सक्रिय रूप से कर-योजना बनाने की आवश्यकता होती है।
आपके लिए कौन सी व्यवस्था बेहतर है?
यह तय करना कि कौन सी कर व्यवस्था आपके लिए सबसे अच्छी है, आपकी व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति, आय स्तर और निवेश पर निर्भर करता है।
- यदि आपकी आय ₹12 लाख से कम है और आप अधिक निवेश या कटौती का दावा नहीं करते हैं: नई कर व्यवस्था आपके लिए अधिक फायदेमंद हो सकती है क्योंकि यह कम कर दरों और ₹12 लाख तक की कर-मुक्त आय प्रदान करती है।
- यदि आपकी आय अधिक है और आप विभिन्न कर-बचत साधनों जैसे कि धारा 80C, 80D, होम लोन ब्याज आदि में निवेश करते हैं: पुरानी कर व्यवस्था आपके लिए अधिक फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि यह इन कटौतियों का लाभ उठाने की अनुमति देती है।
- वेतनभोगी व्यक्ति: ₹12.75 लाख तक की आय वाले वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए, नई कर व्यवस्था मानक कटौती के साथ कर-मुक्त आय की एक बड़ी सीमा प्रदान करती है। हालाँकि, यदि आप पुरानी व्यवस्था में महत्वपूर्ण कटौतियों का दावा कर सकते हैं, तो यह अभी भी एक व्यवहार्य विकल्प हो सकता है [cite:11]।
यह सलाह दी जाती है कि दोनों व्यवस्थाओं के तहत अपनी कर देनदारी की गणना करें और फिर उस व्यवस्था को चुनें जो आपको सबसे अधिक बचत करने में मदद करे।
आयकर अधिनियम, 2025: सरलीकरण की ओर एक कदम
1 अप्रैल 2026 से, भारत आयकर अधिनियम, 1961 को नए आयकर अधिनियम, 2025 से बदल देगा [cite:5, cite:11]। इस नए अधिनियम का उद्देश्य कर कानूनों को सरल बनाना, भाषा को आधुनिक बनाना और डिजिटल अनुपालन को बढ़ावा देना है। इसमें “कर वर्ष” जैसी सरल शब्दावली का परिचय शामिल है, जो “वित्तीय वर्ष” और “मूल्यांकन वर्ष” की अवधारणाओं को प्रतिस्थापित करेगा, जिससे करदाताओं के लिए कर दाखिल करना आसान हो जाएगा [cite:13]।
“नए आयकर अधिनियम, 2025 का मुख्य उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना, अनुपालन में आसानी को बढ़ावा देना और करदाताओं के लिए कर के बोझ को कम करना है।”
टैक्स बचाने के लिए अतिरिक्त सुझाव
आयकर बचाने के लिए, करदाता विभिन्न सरकारी योजनाओं और निवेशों का लाभ उठा सकते हैं:
- सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF): लंबी अवधि की बचत और कर-मुक्त ब्याज।
- राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS): सेवानिवृत्ति योजना और कर लाभ।
- इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS): इक्विटी निवेश के साथ कर बचत।
- सुकन्या समृद्धि योजना (SSY): बालिकाओं के लिए एक बचत योजना।
- दान: पंजीकृत धर्मार्थ संस्थाओं को दान पर कर कटौती का दावा किया जा सकता है [cite:10, cite:15]।
मुख्य निष्कर्ष
- 1 अप्रैल 2026 से, नए आयकर अधिनियम, 2025 के साथ पुराने और नए दोनों कर व्यवस्थाओं के नियम लागू होंगे।
- नई कर व्यवस्था ₹12 लाख तक की आय पर शून्य कर के साथ अधिक कर-मुक्त आय प्रदान करती है, जिसमें ₹75,000 की मानक कटौती वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए शामिल है। [cite:2, cite:5]
- पुरानी कर व्यवस्था उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो धारा 80C, 80D, HRA, होम लोन ब्याज आदि जैसी कटौतियों का लाभ उठाना चाहते हैं।
- ₹12 लाख से कम आय वाले और कम निवेश करने वाले करदाताओं के लिए नई व्यवस्था बेहतर हो सकती है।
- उच्च आय वाले और सक्रिय रूप से कर-बचत करने वाले करदाताओं के लिए पुरानी व्यवस्था अधिक उपयुक्त हो सकती है।
- नए आयकर अधिनियम, 2025 का उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना और “कर वर्ष” जैसी नई शब्दावली पेश करना है। [cite:5, cite:11, cite:13]
- PPF, NPS, ELSS और दान जैसी विभिन्न कर-बचत योजनाओं का लाभ उठाकर आप अपनी कर देनदारी को और कम कर सकते हैं। [cite:8, cite:10]













