जापानी स्टार्टअप ispace की चंद्रमा पर विजय की कहानी: असफलताएं और भविष्य की योजनाएं
जापानी कंपनी ispace ने चंद्रमा पर निजी अन्वेषण के क्षेत्र में एक साहसिक कदम उठाया है। 2023 से 2025 के दौरान दो मिशन विफल होने के बाद भी, यह कंपनी अपने लक्ष्यों पर दृढ़ रहकर 2027 में नई तकनीक के साथ लौटने की योजना बना रही है। आइए समझते हैं कि ispace की यह यात्रा कैसी रही है और आगे क्या योजनाएं हैं।
पहला मिशन: HAKUTO-R Mission 1 (अप्रैल 2023)
ispace का पहला चंद्र लैंडर मिशन 26 अप्रैल 2023 को शुरू हुआ था। यह स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट से दिसंबर 2022 में लॉन्च किया गया था। लैंडर ने 100 किलोमीटर की ऊंचाई से उतरना शुरू किया और सफलतापूर्वक लगभग 1 मीटर प्रति सेकंड की गति तक धीमा हो गया।हालांकि, अंतिम क्षणों में संचार खो जाने से सॉफ्ट लैंडिंग नहीं हो सकी।
इस मिशन की प्रमुख उपलब्धियां:
- 10 में से 8 मिशन माइलस्टोन पूरे किए गए
- पूरी डिसेंट प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई
- महत्वपूर्ण डेटा और तकनीकी जानकारी प्राप्त की गई
ispace ने भविष्य के सुधार के लिए विफलता का कारण चिन्हित किया और अगले मिशन के लिए सुधार शुरू किए।
दूसरा मिशन: RESILIENCE (जून 2025)
ispace ने 15 जनवरी 2025 को अपना दूसरा मिशन लॉन्च किया, जिसे RESILIENCE नाम दिया गया। यह लैंडर 31 मई 2025 को चंद्र कक्षा में सभी कक्षीय युद्धाभ्यास सफलतापूर्वक पूरे कर चुका था और 6 जून 2025 को लैंडिंग का प्रयास करने वाला था।
हालांकि, दुर्भाग्यवश RESILIENCE को भी एक कठोर लैंडिंग का सामना करना पड़ा। प्रारंभिक डेटा से पता चलता है कि लैंडर का लेजर रेंजफाइंडर देरी का सामना कर रहा था, जिससे लैंडर पर्याप्त रूप से धीमा नहीं हो सका।
RESILIENCE मिशन की विशेषताएं:
- यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा निर्मित टेनेशियस रोवर को ले जा रहा था
- चंद्र कक्षा में 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थिर था
- हर 2 घंटे में एक पूरी कक्षा पूरी करता था
- अप्रैल 24, 2025 को गहरे अंतरिक्ष से चंद्र कक्षा में प्रवेश किया
चुनौतियां और सीखें
दोनों मिशन की विफलताओं ने ispace के इंजीनियरों को महत्वपूर्ण सबक सिखाए हैं। laser rangefinder की समस्या और speed control में कमजोरी को चिन्हित किया गया है। ispace के संस्थापक और सीईओ Takeshi Hakamada ने स्वीकार किया कि ये प्रयास निजी चंद्र अन्वेषण के विकास की ओर महत्वपूर्ण कदम हैं।
भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम से तुलना करें तो ISRO भी LUPEX रोवर मिशन की योजना बना रहा है, जिसे जापान के साथ मिलकर निष्पादित किया जाएगा, जो कम से कम 5 वर्षों में पूरी होगी।
भविष्य की योजनाएं: 2027 में नया मिशन
ispace हार नहीं मान रहा है। कंपनी 2027 में Mission 3 और Mission 4 लॉन्च करने की योजना बना रही है। ये मिशन एक बड़े, अधिक सक्षम लैंडर का उपयोग करेंगे जिसका नाम Apex 1.0 है।
नई योजना की विशेषताएं:
- Apex 1.0 लैंडर का वजन 2 टन है – RESILIENCE से काफी अधिक
- अधिक शक्तिशाली और विश्वसनीय डिजाइन
- पिछली विफलताओं से मिली सीख को शामिल किया गया है
- 2027 में दो मिशन एक साथ लॉन्च करना
ispace का दीर्घकालीन दृष्टिकोण 2030 तक पाँच चंद्र ऑर्बिटर लॉन्च करना है। यह निजी अंतरिक्ष अन्वेषण की दिशा में एक बड़ी महत्वाकांक्षा है।
वैश्विक संदर्भ में महत्व
ispace की ये मिशन सिर्फ जापान के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हैं। NASA ने SpaceX के Lunar Starship को Artemis III मिशन में मानव को चंद्रमा पर उतारने के लिए चुना है। ऐसे में, निजी कंपनियों की चंद्र लैंडिंग की विशेषज्ञता महत्वपूर्ण हो गई है।
ispace के सीईओ का मानना है कि ये प्रयास निजी क्षेत्र द्वारा अंतरिक्ष विकास को अगले स्तर तक ले जाने के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं।
Key Takeaways
- असफलता से सीखना: दोनों मिशन की विफलताओं के बाद भी ispace ने तकनीकी समस्याओं को चिन्हित किया और सुधार किए।
- निरंतरता: 2027 में नए मिशन के साथ कंपनी अपनी प्रतिबद्धता दिखा रही है।
- तकनीकी उन्नति: Apex 1.0 लैंडर अधिक शक्तिशाली और विश्वसनीय होगा।
- वैश्विक महत्व: निजी चंद्र अन्वेषण वैश्विक अंतरिक्ष कार्यक्रमों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
- भविष्य की योजना: 2030 तक पाँच चंद्र ऑर्बिटर लॉन्च करने की महत्वाकांक्षी योजना।













