माओवादी हिंसा में भारी गिरावट: 82% घटनाएं कम, लेकिन चुनौतियां बरकरार
भारत के लाल गलियारे में माओवादी हिंसा की घटनाओं में 82 प्रतिशत की जबरदस्त कमी आई है, जबकि मौतों की संख्या 90 प्रतिशत तक लुढ़क गई है। 24 मार्च तक केवल 42 हिंसा की घटनाएं और 6 मौतें दर्ज की गईं, जो दर्शाता है कि सरकार का नक्सल उन्मूलन अभियान सफलता की ओर अग्रसर है। फिर भी, मिशन 2026 पूरा होने तक सतर्कता जरूरी है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2010 में 1936 हिंसा घटनाओं से 2024 में यह संख्या घटकर 374 रह गई। यह कमी सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयासों का नतीजा है।
दशक भर की उपलब्धियां: आंकड़ों में झलकती सफलता
पिछले 10 वर्षों में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर 2025 में मात्र 11 रह गई। सबसे अधिक प्रभावित जिलों की संख्या 36 से सिमटकर 3 हो गई।
- हिंसा घटनाओं में 81% कमी: 2010 के 1936 से 2024 के 374 तक[1]。
- मौतों में 85% गिरावट: 1005 से घटकर 150[1]。
- सुरक्षा बल हताहत 73% कम: 1851 से 509[2]。
- नागरिक मौतें 70% घटी: 4766 से 1495[2]。
2014 से 2024 तक कुल हिंसा घटनाएं 53% कम होकर 7744 रह गईं। ये आंकड़े पीआईबी के आधिकारिक बुलेटिन से लिए गए हैं।
2025 की बड़ी सफलताएं
2025 में 317 नक्सलियों को मार गिराया गया, 800 से अधिक गिरफ्तार हुए और 2000 ने आत्मसमर्पण किया। छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर कर्रेगुट्टालु पहाड़ी अभियान में 31 माओवादी ढेर हुए, जिनमें 16 महिलाएं शामिल थीं।
- ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट: 54 गिरफ्तारियां, 84 आत्मसमर्पण[1]。
- 2024 में 217, 2025 में 256, 2026 (फरवरी तक) 22 नक्सली मारे गए[3]。
- तीन वर्षों में 209 गिरफ्तारियां, 2613 आत्मसमर्पण[3]。
झारखंड में 1.4 करोड़ के इनामी सहदेव सोरेन को सीआरपीएफ ने मार गिराया, जो नक्सलवाद के खिलाफ बड़ा झटका था[7]।
सुरक्षा और विकास का दोहरा हमला
सरकार की रणनीति में सुरक्षा कैंपों का विस्तार प्रमुख है। 2025 में 58 और 2026 में 8 नए कैंप बने, जो इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट सेंटर के रूप में काम कर रहे हैं। यहां शिक्षा, स्वास्थ्य, पीडीएस, बिजली और बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध हैं[3]。
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत का लक्ष्य साकार होगा।” यह घोषणा अगस्त 2024 की समीक्षा के बाद की गई[8]。
नक्सल प्रभावित क्षेत्र 125 से घटकर 20 रह गए। बस्तर जैसे हॉटस्पॉट्स में बड़े ऑपरेशन जारी हैं[7]। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, मिशन 2026 उग्रवाद उन्मूलन, शांति और विकास पर केंद्रित है।
माओवादियों की हकीकत
माओवादी जनजातियों की रक्षा का दावा करते हैं, लेकिन हिंसा और वसूली पर निर्भर हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) 2004 में बनी, जो सबसे हिंसिक संगठन है[5]। बीजापुर ऑपरेशन में 31 माओवादी मारे गए[5]。
2024 में छत्तीसगढ़ में 219 माओवादी ढेर। 2025 तक कुल 477 मौतें: 54 नागरिक, 33 सुरक्षा बल, 390 नक्सली[6]।
चुनौतियां और भविष्य की राह
हालांकि सफलताएं हैं, लेकिन लाल गलियारा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। फरवरी 2026 तक उग्रवादी घटनाओं में कमी आई, लेकिन शेष 11 जिलों में सतर्कता बरतनी होगी। पूना मारगेम अभियान से हजारों आत्मसमर्पण हुए[3]。
सरकार का बहुआयामी अभियान- सुरक्षा, विकास और मुख्यधारा में लौटाना- कारगर साबित हो रहा है। मार्च 2026 की डेडलाइन नजदीक है, और उपलब्धियां उत्साहजनक हैं।
मुख्य निष्कर्ष (Key Takeaways)
- 82% हिंसा घटनाओं में कमी: 42 घटनाएं 24 मार्च तक।
- 90% मौतें घटी: केवल 6 मौतें।
- नक्सल-मुक्त जिलों की प्रगति: 126 से 11।
- 2025 उपलब्धियां: 317 मारे गए, 2000 आत्मसमर्पण।
- मिशन 2026: सुरक्षा कैंप और विकास से स्थायी शांति।
- सतर्क रहें: लाल गलियारा पूरी तरह खत्म नहीं।
यह सफर जारी है। भारत नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई जीतने को तैयार है। (कुल शब्द: 850+)













