कोविड-19 से उबर चुके लोगों के लिए वैक्सीन की एक खुराक ही काफी हो सकती है: नया अध्ययन
क्या कोविड-19 से पहले संक्रमित हो चुके लोगों को वैक्सीन की दोनों खुराकें लेना आवश्यक है? यह सवाल कई दिनों से चर्चा में है। हाल ही में एआईजी हॉस्पिटल्स द्वारा जारी एक अध्ययन के अनुसार, ऐसे व्यक्ति जो पहले कोविड-19 से संक्रमित हो चुके हैं, उनके लिए वैक्सीन की केवल एक खुराक ही पर्याप्त हो सकती है। यह अध्ययन इस बात पर प्रकाश डालता है कि इन व्यक्तियों में वैक्सीन की एक खुराक के बाद प्राप्त एंटीबॉडी प्रतिक्रिया, उन लोगों की तुलना में कहीं अधिक मजबूत होती है जिन्हें पहले संक्रमण नहीं हुआ था।
अध्ययन के निष्कर्ष: एक खुराक क्यों है प्रभावी?
एआईजी हॉस्पिटल्स द्वारा किए गए इस महत्वपूर्ण अध्ययन में 260 स्वास्थ्य कर्मियों पर शोध किया गया, जिन्हें जनवरी और फरवरी 2021 के बीच कोविशील्ड वैक्सीन लगाई गई थी। अध्ययन के परिणामों ने दर्शाया कि जिन व्यक्तियों को पहले कोविड-19 संक्रमण हो चुका था, उनमें वैक्सीन की एक खुराक के बाद एंटीबॉडी का स्तर उन लोगों की तुलना में काफी अधिक था जिन्होंने पहले कभी संक्रमण का अनुभव नहीं किया था। यह निष्कर्ष इस धारणा को बल देता है कि प्राकृतिक संक्रमण एक प्रकार के “प्राइमर” के रूप में कार्य करता है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को वैक्सीन के प्रति अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया करने के लिए तैयार करता है।
अध्ययन के सह-लेखक डॉ. डी नागेश्वर रेड्डी, जो एआईजी हॉस्पिटल्स के चेयरमैन भी हैं, के अनुसार:
“परिणाम बताते हैं कि जिन लोगों को कोविड-19 संक्रमण हो चुका है, उन्हें वैक्सीन की दो खुराकें लेने की आवश्यकता नहीं है। एक एकल खुराक से ही मजबूत एंटीबॉडी और मेमोरी सेल प्रतिक्रिया विकसित हो सकती है, जो उन लोगों के बराबर है जिन्हें संक्रमण नहीं हुआ था।”
यह शोध विशेष रूप से तब महत्वपूर्ण हो जाता है जब हम वैक्सीन की वैश्विक कमी और वितरण की चुनौतियों पर विचार करते हैं। यदि पहले से संक्रमित व्यक्तियों के लिए एक खुराक पर्याप्त है, तो इससे वैक्सीन की बचत होगी जिसका उपयोग अधिक लोगों को टीका लगाने के लिए किया जा सकता है, जिससे व्यापक आबादी तक पहुंच सुनिश्चित होगी।
वैज्ञानिक आधार: क्यों है ऐसा?
वैज्ञानिकों का मानना है कि कोविड-19 से उबरने वाले लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली में पहले से ही वायरस के खिलाफ कुछ स्तर की मेमोरी सेल और एंटीबॉडी मौजूद होती हैं। जब ऐसे व्यक्ति वैक्सीन की एक खुराक लेते हैं, तो उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली तेजी से प्रतिक्रिया करती है और मौजूदा प्रतिरक्षा को और मजबूत करती है। यह ‘हाइब्रिड इम्युनिटी’ (प्राकृतिक संक्रमण और टीकाकरण का संयोजन) एक मजबूत और टिकाऊ सुरक्षा प्रदान कर सकती है।
अन्य अध्ययनों ने भी इसी तरह के निष्कर्षों का समर्थन किया है। उदाहरण के लिए, पेन इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि कोविड-19 से ठीक हुए लोगों ने पहली एमआरएनए वैक्सीन खुराक के बाद एक मजबूत एंटीबॉडी प्रतिक्रिया दिखाई, जबकि दूसरी खुराक से बहुत कम अतिरिक्त लाभ हुआ। इसी तरह, यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना (UNC) चैपल हिल के शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को पहले कोविड-19 हुआ था, उनमें वैक्सीन की एक खुराक के बाद एंटीबॉडी का स्तर उन लोगों की तुलना में लगभग दोगुना था जिन्हें पहले संक्रमण नहीं हुआ था।
वैक्सीन की रणनीति पर प्रभाव
यह अध्ययन वैक्सीन वितरण रणनीतियों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है। वर्तमान में, अधिकांश देशों में कोविड-19 से उबर चुके व्यक्तियों के लिए भी दो-खुराक की सिफारिश की जाती है। हालांकि, यदि यह निष्कर्ष व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है, तो यह नीति निर्माताओं को पहले से संक्रमित आबादी के लिए टीकाकरण दिशानिर्देशों को संशोधित करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
- वैक्सीन की बचत: यदि पहले से संक्रमित लोगों को केवल एक खुराक की आवश्यकता होती है, तो इससे लाखों वैक्सीन की खुराकें बचाई जा सकती हैं, जिन्हें उन लोगों को लगाया जा सकता है जिन्हें अभी तक टीका नहीं मिला है।
- तेजी से टीकाकरण: इससे टीकाकरण अभियान में तेजी लाई जा सकती है, जिससे कम समय में अधिक लोगों को सुरक्षा प्रदान की जा सकेगी।
- संसाधनों का कुशल उपयोग: यह वैश्विक स्तर पर वैक्सीन की कमी को दूर करने में मदद कर सकता है, खासकर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में।
क्या यह सार्वभौमिक रूप से लागू होता है?
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह अध्ययन विशिष्ट वैक्सीन (कोविशील्ड) और एक विशिष्ट समूह (स्वास्थ्य कर्मियों) पर किया गया था। जबकि परिणाम उत्साहजनक हैं, यह आवश्यक है कि इन निष्कर्षों की पुष्टि विभिन्न वैक्सीन प्रकारों और विभिन्न जनसांख्यिकीय समूहों पर बड़े पैमाने पर अध्ययनों द्वारा की जाए। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार नए शोध की समीक्षा कर रही हैं ताकि नवीनतम वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपनी सिफारिशों को अद्यतन किया जा सके।
इसके अतिरिक्त, यह सलाह दी जाती है कि कोविड-19 से ठीक होने वाले व्यक्ति को टीका लगवाने से पहले कम से कम तीन महीने तक इंतजार करना चाहिए, जैसा कि भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अनुशंसित किया गया है। यह समय शरीर को संक्रमण से पूरी तरह उबरने और एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित करने का अवसर देता है।
मुख्य बातें:
- एक खुराक पर्याप्त: एआईजी हॉस्पिटल्स के एक अध्ययन के अनुसार, कोविड-19 से पहले संक्रमित हो चुके व्यक्तियों के लिए वैक्सीन की एक खुराक पर्याप्त एंटीबॉडी और मेमोरी सेल प्रतिक्रिया उत्पन्न कर सकती है।
- बढ़ी हुई एंटीबॉडी प्रतिक्रिया: पहले से संक्रमित व्यक्तियों में वैक्सीन की एक खुराक के बाद एंटीबॉडी का स्तर उन लोगों की तुलना में अधिक होता है जिन्हें पहले संक्रमण नहीं हुआ था।
- वैक्सीन रणनीति पर प्रभाव: यह शोध वैक्सीन की कमी को दूर करने और टीकाकरण अभियान को तेज करने में मदद कर सकता है, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
- हाइब्रिड इम्युनिटी: प्राकृतिक संक्रमण और टीकाकरण का संयोजन, जिसे ‘हाइब्रिड इम्युनिटी’ कहा जाता है, एक मजबूत और टिकाऊ सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
- आगे के शोध की आवश्यकता: हालांकि परिणाम उत्साहजनक हैं, इन निष्कर्षों की पुष्टि विभिन्न वैक्सीन प्रकारों और विभिन्न आबादी पर बड़े पैमाने पर अध्ययनों द्वारा की जानी चाहिए।
- वैक्सीनेशन से पहले प्रतीक्षा: कोविड-19 से ठीक होने के बाद कम से कम तीन महीने का इंतजार करने की सलाह दी जाती है, जैसा कि सरकारी दिशानिर्देशों में बताया गया है।













