ईरान युद्ध: 35वें दिन अमेरिकी-इजरायली हमलों में क्या हुआ?
ईरान पर संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के हमलों का 35वां दिन शुक्रवार, 3 अप्रैल, 2026 को समाप्त हुआ। इस दिन भी तनाव और संघर्ष जारी रहा, जिसमें तेहरान के पास एक सदी पुराने चिकित्सा अनुसंधान केंद्र और एक पुल को निशाना बनाया गया। यह घटनाएँ पश्चिम एशिया में चल रहे संकट को और गहराती हैं, जो 28 फरवरी, 2026 को शुरू हुआ था।
तेहरान में चिकित्सा अनुसंधान केंद्र पर हमला
शुक्रवार को, ईरानी अधिकारियों ने पुष्टि की कि अमेरिकी-इजरायली हमलों में तेहरान स्थित प्रतिष्ठित पाश्चर इंस्टीट्यूट (Pasteur Institute of Iran) को भारी नुकसान पहुँचा है। यह संस्थान 1920 में स्थापित किया गया था और ईरान तथा पूरे मध्य पूर्व में सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा अनुसंधान का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इस हमले को “दुखद, क्रूर, निंदनीय और पूरी तरह से अपमानजनक” बताया। उन्होंने कहा कि यह हमला “अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा पर सीधा हमला” है।
यह संस्थान न केवल अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता था, बल्कि टीके के विकास, संक्रामक रोगों पर शोध और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। इस हमले ने ईरान की वैज्ञानिक और चिकित्सा अवसंरचना को एक बड़ा झटका दिया है। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों से इस “मानवता के खिलाफ अपराध” पर प्रतिक्रिया देने का आग्रह किया है।
बी1 पुल पर हमला और नागरिक हताहत
इसी दिन, तेहरान के पास बी1 पुल (B1 Bridge) पर भी अमेरिकी-इजरायली हमले हुए। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस हमले में कम से कम आठ नागरिकों की मौत हुई और 95 अन्य घायल हुए। यह पुल करज (Karaj) को तेहरान से जोड़ता था और मध्य पूर्व के सबसे ऊंचे पुलों में से एक था। यह पुल निर्माणाधीन था और इसे ईरान के प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक माना जाता था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पुल के ढहने का वीडियो साझा करते हुए कहा कि यह ईरान का सबसे बड़ा पुल था जिसे नष्ट कर दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान बातचीत की मेज पर आकर युद्ध समाप्त नहीं करता है तो और भी विनाश होगा। हालाँकि, ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह हमला नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किया गया था।
युद्ध की पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
यह युद्ध 28 फरवरी, 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर समन्वित सैन्य अभियान शुरू किए थे। इन हमलों का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम, सैन्य बुनियादी ढांचे और नेतृत्व को निशाना बनाना था। इसके जवाब में, ईरान ने इज़राइल और मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।
युद्ध के 35 दिनों में, दोनों पक्षों को भारी नुकसान हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, हजारों लोग मारे गए हैं, जिनमें नागरिक और सैन्यकर्मी शामिल हैं। कई देशों ने इस संघर्ष पर चिंता व्यक्त की है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से शांति स्थापित करने का आग्रह किया है।
- पाश्चर इंस्टीट्यूट पर हमला: तेहरान में स्थित एक सदी पुराने चिकित्सा अनुसंधान केंद्र को अमेरिकी-इजरायली हमलों से भारी नुकसान हुआ है।
- बी1 पुल नष्ट: करज को तेहरान से जोड़ने वाला बी1 पुल हमलों में नष्ट हो गया, जिसमें आठ नागरिकों की मौत और 95 घायल हुए।
- बढ़ता तनाव: युद्ध के 35वें दिन भी संघर्ष जारी है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर चिंता बढ़ रही है।
- नागरिक हताहत: हमलों में नागरिकों की मौत और चोटें चिंता का विषय बनी हुई हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया: वैश्विक नेताओं ने संघर्ष को समाप्त करने और शांति स्थापित करने का आह्वान किया है।
युद्ध का प्रभाव और भविष्य की चिंताएं
इस युद्ध ने न केवल ईरान और इज़राइल को प्रभावित किया है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यवधानों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को खतरे में डाल दिया है, जिससे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए बैठकें की हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
युद्ध के कारण मानवीय संकट गहरा गया है, जिसमें हजारों लोग विस्थापित हुए हैं और चिकित्सा प्रणालियाँ प्रभावित हुई हैं। इस संघर्ष के दीर्घकालिक परिणाम अभी भी अनिश्चित हैं, और वैश्विक समुदाय शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद कर रहा है।
“यह युद्ध केवल दो देशों के बीच का संघर्ष नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्थिरता और मानवता के भविष्य के लिए एक गंभीर चुनौती है।”
मुख्य बातें (Key Takeaways)
- 3 अप्रैल, 2026 को ईरान युद्ध का 35वां दिन था, जिसमें अमेरिका और इज़राइल ने तेहरान के पास पाश्चर इंस्टीट्यूट और बी1 पुल पर हमले किए।
- पाश्चर इंस्टीट्यूट, जो ईरान का एक प्रमुख चिकित्सा अनुसंधान केंद्र था, हमलों से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
- बी1 पुल पर हुए हमलों में आठ नागरिक मारे गए और 95 घायल हुए।
- ईरान ने इन हमलों को मानवता के खिलाफ अपराध बताया है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से कार्रवाई की मांग की है।
- युद्ध के कारण क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर असर पड़ा है।
- हजारों लोग मारे गए हैं और लाखों विस्थापित हुए हैं, जिससे मानवीय संकट गहरा गया है।
- संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठन शांति स्थापित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि युद्ध समाप्त नहीं हुआ तो और भी विनाशकारी हमले होंगे।
- ईरान ने जवाबी कार्रवाई की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है, जिससे संघर्ष के और बढ़ने का खतरा है।
- इस युद्ध के दीर्घकालिक परिणाम अभी भी अनिश्चित हैं और वैश्विक समुदाय शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद कर रहा है।













