तमिलनाडु के विकास में बाधा: जी.के. वासन का आरोप, डीएमके की बीजेपी से दुश्मनी ने छीना विकास का अवसर
तमिलनाडु की राजनीति में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है, और इसी के साथ आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। तमिलनाडु कांग्रेस (एम) के अध्यक्ष जी.के. वासन ने सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य सरकार ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को एक “दुश्मन” के रूप में देखकर केंद्र सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ उठाने का अवसर गंवा दिया है। वासन के अनुसार, यह वोट बैंक की राजनीति का परिणाम है, जिसने तमिलनाडु के विकास को बाधित किया है।
‘डबल इंजन सरकार’ की आवश्यकता पर जोर
जी.के. वासन ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी राज्य के समग्र विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा, “यह एक ‘डबल इंजन सरकार’ होनी चाहिए, जहाँ केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करें।” वासन का मानना है कि जब दोनों सरकारें एक साथ काम करती हैं, तभी जनता को वास्तविक लाभ मिल सकता है, चाहे वह शहरों में हो या गांवों में। उन्होंने डीएमके के रवैये को “एकतरफा” करार दिया, जो केवल अपने ही विकास को अंतिम मानता है और केंद्र से आने वाले विकास कार्यों में बाधा डालता है।
“मतलब, अगर आप इस तरह से पिच करते हैं, तो क्या यह तर्क नहीं उठेगा कि केंद्र में सत्ताधारी पार्टी का विरोध करने वाली पार्टी को राज्यों में सत्ता में नहीं आना चाहिए? बिल्कुल नहीं। जहाँ तक तमिलनाडु सरकार का सवाल है, उन्होंने बीजेपी को विपक्षी पार्टी के रूप में नहीं देखा; उन्होंने वोट बैंक की राजनीति के कारण उसे दुश्मन पार्टी के रूप में देखा। यह एक गलत मिसाल है जो उन्होंने कायम की है।”
– जी.के. वासन, अध्यक्ष, तमिलनाडु कांग्रेस (एम)
वोट बैंक की राजनीति और विकास की अनदेखी
वासन ने आरोप लगाया कि डीएमके सरकार केवल वोट बैंक की राजनीति के कारण केंद्र की योजनाओं को लागू करने में अनिच्छुक रही है। उनके अनुसार, इस रवैये के कारण तमिलनाडु ने कई महत्वपूर्ण केंद्रीय योजनाओं से वंचित रह गया है, जिससे राज्य के विकास की गति धीमी हुई है। उन्होंने कहा कि जनता इस रवैये से नाराज है और बदलाव चाहती है। वासन ने यह भी कहा कि शासक का ऐसा रवैया कभी भी तमिलनाडु का विकास नहीं कर सकता।
उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि डीएमके सरकार केवल अपने “स्टिकर” को योजनाओं पर लगे देखना चाहती है और केंद्रीय सरकार के योगदान को छिपाना चाहती है, जो कि गलत है। वासन ने कहा कि तालियाँ दोनों हाथों से बजती हैं, और सहयोग से ही विकास संभव है।
महिलाओं की सुरक्षा और चुनाव का महत्व
जी.के. वासन ने आगामी चुनावों को तमिलनाडु के लोगों, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह चुनाव केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। वासन का मानना है कि एक जिम्मेदार सरकार को राज्य और केंद्र दोनों के साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि सभी क्षेत्रों में विकास हो सके।
उन्होंने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि कैसे राजनीतिक दल विकास के बजाय वोट बैंक की राजनीति को प्राथमिकता देते हैं। वासन ने कहा कि ऐसे रवैये से राज्य का भला नहीं हो सकता और यह जनता के लिए चिंता का विषय है।
तमिलनाडु में राजनीतिक परिदृश्य और गठबंधन
वासन ने अपने दल के राजनीतिक सफर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी पार्टी, तमिलनाडु कांग्रेस (एम), ने विभिन्न चुनावों में गठबंधन में भाग लिया है। 2016 के विधानसभा चुनाव में, उनकी पार्टी एक तीसरे मोर्चे का हिस्सा थी, लेकिन उन्हें “नारियल की टोकरी” (Coconut Grove) चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ना पड़ा था। 2019 के लोकसभा चुनाव में, वे अन्नाद्रमुक (AIADMK) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बने और “ऑटो” (Auto) चिन्ह पर चुनाव लड़ा। 2021 में, पार्टी ने छह सीटें जीतीं और फिर 2026 के चुनावों के लिए, वे “कमल” (Lotus) चिन्ह पर चुनाव लड़ रहे हैं, क्योंकि चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, जब पार्टियां किसी अन्य पार्टी के चिन्ह पर चुनाव लड़ती हैं, तो उन्हें उस पार्टी के व्हिप का पालन करना होता है।
वासन ने विश्वास जताया कि उनकी पार्टी के उम्मीदवार, जो भले ही किसी अन्य चिन्ह पर चुनाव लड़ रहे हों, लेकिन वे पार्टी के सदस्य रहेंगे और पार्टी के सिद्धांतों का पालन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अन्नाद्रमुक (AIADMK)-नीत एनडीए गठबंधन आगामी चुनावों में जीत हासिल करेगा।
केंद्रीय योजनाओं पर विवाद: डीएमके का पक्ष
यह ध्यान देने योग्य है कि तमिलनाडु में केंद्रीय योजनाओं को लेकर अक्सर राजनीतिक बहस होती रही है। जहाँ जी.के. वासन जैसे नेता डीएमके पर योजनाओं को लागू न करने का आरोप लगाते हैं, वहीं डीएमके सरकार का अपना पक्ष है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने पहले कहा है कि वे केवल उन्हीं योजनाओं का विरोध करते हैं जो राज्य के हितों के खिलाफ हों, जैसे कि NEET और CAA। उन्होंने यह भी कहा है कि केंद्र को स्पष्ट करना चाहिए कि कौन सी केंद्रीय योजनाएं रोकी गई हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि डीएमके सरकार ने कुछ योजनाओं, जैसे ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’, को जाति-आधारित होने का हवाला देते हुए लागू करने से इनकार कर दिया है।
वहीं, भाजपा के नेता अक्सर डीएमके पर केंद्रीय योजनाओं पर अपने स्टिकर चिपकाने और श्रेय लेने का आरोप लगाते रहे हैं। यह राजनीतिक खींचतान राज्य के विकास को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि योजनाओं के कार्यान्वयन में देरी या बाधा उत्पन्न हो सकती है।
मुख्य बातें (Key Takeaways)
- केंद्रीय योजनाओं के लाभ से वंचित: जी.के. वासन का आरोप है कि डीएमके ने बीजेपी को दुश्मन मानने की अपनी राजनीतिक सोच के कारण तमिलनाडु को केंद्रीय सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाओं के लाभ से वंचित रखा है।
- ‘डबल इंजन सरकार’ की वकालत: वासन ने राज्य और केंद्र सरकारों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया, जिसे उन्होंने ‘डबल इंजन सरकार’ कहा, जो विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
- वोट बैंक की राजनीति: वासन के अनुसार, डीएमके की नीतियां वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित हैं, जिसके कारण वे केंद्रीय योजनाओं को लागू करने में हिचकिचाते हैं, भले ही वे जनता के हित में हों।
- महिलाओं की सुरक्षा एक मुद्दा: वासन ने आगामी चुनावों को महिलाओं की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया, जो राज्य के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय है।
- गठबंधन की राजनीति: वासन ने अपनी पार्टी, तमिलनाडु कांग्रेस (एम) के चुनावी गठबंधनों और चुनाव चिन्हों के उपयोग के इतिहास पर प्रकाश डाला, और एनडीए गठबंधन की जीत का विश्वास जताया।
- केंद्रीय योजनाओं पर विवाद: तमिलनाडु में केंद्रीय योजनाओं को लेकर अक्सर राजनीतिक विवाद होते रहे हैं, जिसमें डीएमके और बीजेपी एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं। जहाँ डीएमके कुछ योजनाओं को राज्य के हितों के विरुद्ध बताती है, वहीं बीजेपी डीएमके पर योजनाओं का श्रेय लेने का आरोप लगाती है।
- विकास के लिए सहयोग आवश्यक: राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, राज्य के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोगात्मक रवैया अत्यंत महत्वपूर्ण है।













