अंतरिक्षीय ज्वालामुखी का जागना: 100 मिलियन वर्षों की खामोशी के बाद ब्लैक होल का प्रचंड विस्फोट
अंतरिक्ष की गहराइयों में, एक असाधारण घटना घटी है जिसने खगोलविदों को आश्चर्यचकित कर दिया है। गैलेक्सी J1007+3540 के केंद्र में स्थित एक विशालकाय सुपरमैसिव ब्लैक होल, जो लगभग 100 मिलियन वर्षों से शांत था, अचानक जाग उठा है और एक ‘अंतरिक्षीय ज्वालामुखी’ की तरह फट पड़ा है। खगोलविदों ने इस अविश्वसनीय घटना की आश्चर्यजनक रेडियो छवियां कैप्चर की हैं, जो दर्शाती हैं कि कैसे नए शक्तिशाली जेट्स बाहर की ओर निकल रहे हैं और आसपास के गैलेक्सी क्लस्टर के तीव्र दबाव से टकरा रहे हैं। इस टकराव ने लगभग एक मिलियन प्रकाश-वर्ष तक फैली एक अराजक और विकृत संरचना का निर्माण किया है।
एक ‘सोते हुए’ राक्षस का पुनर्जन्म
सुपरमैसिव ब्लैक होल, जो किसी भी बड़ी गैलेक्सी के केंद्र में पाए जाते हैं, अक्सर निष्क्रिय अवस्था में रहते हैं। वे अरबों वर्षों तक ऊर्जा का कोई उल्लेखनीय उत्सर्जन नहीं करते हैं। गैलेक्सी J1007+3540 में स्थित ब्लैक होल भी ऐसा ही एक ‘सोता हुआ’ राक्षस था। लगभग 100 मिलियन वर्षों की लंबी खामोशी के बाद, इसने अचानक अपनी सोई हुई अवस्था को तोड़ दिया है। यह पुनर्जन्म एक नाटकीय और विस्फोटक घटना के रूप में सामने आया है, जिसकी तुलना अक्सर ज्वालामुखी के फटने से की जाती है।
इस घटना को समझने के लिए, खगोलविदों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने नीदरलैंड में स्थित लो-फ्रीक्वेंसी ऐरे (LOFAR) और भारत की अपग्रेडेड जायंट मेटरवव रेडियो टेलीस्कोप (uGMRT) का उपयोग करके J1007+3540 का अवलोकन किया। इन शक्तिशाली रेडियो टेलीस्कोपों से प्राप्त छवियों ने एक स्पष्ट चित्र प्रस्तुत किया: एक ताजा, चमकदार आंतरिक जेट जो पुराने, फीके प्लाज्मा के खोल को चीरता हुआ बाहर निकल रहा है। यह प्लाज्मा ब्लैक होल के पिछले विस्फोटों का अवशेष है, जो एक ‘एपिसोडिक एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लियस’ (AGN) का संकेत देता है – एक ऐसी गैलेक्सी जिसका केंद्रीय इंजन समय-समय पर चालू और बंद होता रहता है।
अंतरिक्षीय ज्वालामुखी की विशेषताएं
- विशाल आकार: इस ब्लैक होल का विस्फोट इतना शक्तिशाली है कि इसने लगभग एक मिलियन प्रकाश-वर्ष तक फैली संरचनाएं बनाई हैं। यह हमारे मिल्की वे गैलेक्सी के व्यास से लगभग 10 गुना बड़ा है।
- एपिसोडिक प्रकृति: J1007+3540 का ब्लैक होल एक ‘एपिसोडिक AGN’ का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका मतलब है कि यह बार-बार सक्रिय और निष्क्रिय चरणों से गुजरता है, जो लाखों वर्षों के अंतराल पर हो सकते हैं।
- जेट्स का निर्माण: सुपरमैसिव ब्लैक होल अपने केंद्र से प्लाज्मा और ऊर्जा के शक्तिशाली जेट्स को प्रकाश की गति के करीब की गति से बाहर निकालते हैं। ये जेट्स रेडियो तरंगों में चमकते हैं, जिससे उन्हें ‘जायंट रेडियो गैलेक्सी’ (GRG) के रूप में पहचाना जाता है।
- गैलेक्सी क्लस्टर का प्रभाव: J1007+3540 एक विशाल गैलेक्सी क्लस्टर के भीतर स्थित है, जो अत्यधिक गर्म गैस से भरा हुआ है। यह वातावरण ब्लैक होल से निकलने वाले जेट्स पर जबरदस्त दबाव डालता है, जिससे वे मुड़ जाते हैं, संकुचित हो जाते हैं और विकृत हो जाते हैं।
जेट्स और क्लस्टर के बीच अराजक संघर्ष
ब्लैक होल द्वारा उत्पन्न जेट्स सीधे बाहर की ओर नहीं निकल पाते हैं। इसके बजाय, वे गैलेक्सी क्लस्टर के सघन और गर्म गैस के साथ एक हिंसक टकराव में शामिल होते हैं। यह टकराव जेट्स को अत्यधिक विकृत कर देता है। LOFAR द्वारा ली गई छवियों में, उत्तरी लोब (jet का एक हिस्सा) संकुचित और विकृत दिखाई देता है, जिसमें प्लाज्मा का एक मुड़ा हुआ प्रवाह है जो आसपास की गैस द्वारा बगल की ओर धकेला जा रहा है। यह दृश्य एक उच्च दबाव वाले फायर होज़ की तरह है जो एक दीवार से टकराता है, जिससे पानी वापस उछलता है।
“यह ऐसा है जैसे हम एक अंतरिक्षीय ज्वालामुखी को सदियों की शांति के बाद फिर से फटते हुए देख रहे हैं – सिवाय इसके कि यह इतना बड़ा है कि अंतरिक्ष में लगभग एक मिलियन प्रकाश-वर्ष तक फैली संरचनाएं बना सकता है।” – शोभा कुमारी, प्रमुख शोधकर्ता
डॉ. सब्यसाची पाल, जो इस अध्ययन का हिस्सा हैं, बताते हैं कि J1007+3540 ‘एपिसोडिक AGN’ और ‘जेट-क्लस्टर इंटरैक्शन’ का एक सबसे स्पष्ट और शानदार उदाहरण है, जहाँ आसपास की गर्म गैस जेट्स को मोड़ती, संपीड़ित करती और विकृत करती है। यह घटना दर्शाती है कि आकाशगंगाओं का विकास एक शांतिपूर्ण या क्रमिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि ब्लैक होल की विस्फोटक शक्ति और उनके आसपास के वातावरण के कुचलने वाले दबाव के बीच एक लड़ाई है।
गैलेक्सी विकास में ब्लैक होल की भूमिका
सुपरमैसिव ब्लैक होल केवल ब्रह्मांडीय तमाशे ही नहीं हैं; वे अपनी मेजबान गैलेक्सी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब ब्लैक होल सक्रिय होते हैं और जेट्स छोड़ते हैं, तो वे अपने आसपास के गैस में भारी मात्रा में गतिज ऊर्जा डालते हैं। इस ‘फीडबैक’ प्रक्रिया से गैस ठंडी होकर नए तारे बनाने की प्रक्रिया रुक सकती है, जिससे गैलेक्सी का भविष्य का विकास बाधित हो सकता है। इसके विपरीत, ब्लैक होल पर गैस का ‘वर्षा’ अगले विस्फोट को ट्रिगर कर सकती है।
J1007+3540 जैसी प्रणालियों का अध्ययन हमें यह समझने में मदद करता है कि ब्लैक होल कैसे सक्रिय और निष्क्रिय चरणों के बीच संक्रमण करते हैं, और कैसे विशाल ब्रह्मांडीय वातावरण जेट्स को आकार, मोड़, विकृत और यहां तक कि दम घोंट भी सकते हैं। यह हमें गैलेक्सी के जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म की जटिल कहानी की एक झलक प्रदान करता है।
यह खोज, जो Monthly Notices of the Royal Astronomical Society में प्रकाशित हुई है, खगोलविदों को ब्लैक होल के व्यवहार और ब्रह्मांड के विकास के बारे में हमारी समझ को गहरा करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है।
मुख्य बातें (Key Takeaways)
- गैलेक्सी J1007+3540 के केंद्र में स्थित एक सुपरमैसिव ब्लैक होल लगभग 100 मिलियन वर्षों की खामोशी के बाद फिर से सक्रिय हो गया है।
- इस घटना को ‘अंतरिक्षीय ज्वालामुखी’ के रूप में वर्णित किया गया है, जिसमें ब्लैक होल से शक्तिशाली प्लाज्मा जेट्स निकल रहे हैं।
- ये जेट्स लगभग एक मिलियन प्रकाश-वर्ष तक फैले हुए हैं और आसपास के गैलेक्सी क्लस्टर की अत्यधिक गर्म गैस के साथ टकराव कर रहे हैं।
- यह टकराव जेट्स को विकृत और संकुचित कर रहा है, जिससे एक अराजक संरचना बन रही है।
- ब्लैक होल की यह ‘एपिसोडिक’ प्रकृति (बार-बार सक्रिय और निष्क्रिय होना) गैलेक्सी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- यह अध्ययन LOFAR और uGMRT रेडियो टेलीस्कोप का उपयोग करके किया गया था।
- ब्लैक होल के इस पुनर्जन्म से ब्रह्मांड के विकास और ब्लैक होल के व्यवहार के बारे में नई जानकारी मिलने की उम्मीद है।













