दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष को मिली Z श्रेणी की सुरक्षा, बढ़ते खतरों के बीच कड़े किए गए सुरक्षा इंतजाम
नई दिल्ली: हाल के दिनों में दिल्ली विधानसभा और उसके अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को मिलीं धमकी भरी ईमेल और अन्य सुरक्षा घटनाओं के मद्देनजर, दिल्ली पुलिस ने विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को ‘Z’ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया है। यह कदम उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। Z श्रेणी की सुरक्षा भारत में प्रदान की जाने वाली उच्च-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक है, जो महत्वपूर्ण व्यक्तियों को गंभीर खतरों से बचाने के लिए डिज़ाइन की गई है।
धमकी भरे ईमेल और सुरक्षा चूक की घटनाएं
पिछले कुछ हफ्तों में, दिल्ली विधानसभा को कई बार बम से उड़ाने की धमकी भरी ईमेल प्राप्त हुई हैं। इन ईमेल में चौंकाने वाले दावे किए गए हैं, जिनमें आरडीएक्स विस्फोट और साइनाइड गैस का इस्तेमाल शामिल है। हाल ही में, एक घटना में, एक व्यक्ति ने बैरिकेड तोड़कर विधानसभा परिसर में प्रवेश किया और सीधे अध्यक्ष के कार्यालय की ओर बढ़ गया, जहाँ उसने एक गुलदस्ता रखा। इस घटना ने विधानसभा की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इन घटनाओं के बाद, सुरक्षा एजेंसियों ने स्थिति की गंभीरता को समझा और विधानसभा अध्यक्ष की सुरक्षा को तत्काल बढ़ाने का निर्णय लिया।
मुख्य सुरक्षा चिंताएं:
- कई बार बम से उड़ाने की धमकी भरे ईमेल प्राप्त हुईं।
- एक व्यक्ति ने बैरिकेड तोड़कर विधानसभा परिसर में प्रवेश किया और अध्यक्ष की कार के पास गुलदस्ता रखा।
- इन घटनाओं ने विधानसभा परिसर की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए।
‘Z’ श्रेणी सुरक्षा: क्या है और किसे मिलती है?
‘Z’ श्रेणी की सुरक्षा भारत में प्रदान की जाने वाली उच्च-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक है। इस सुरक्षा कवर में आमतौर पर 22 सुरक्षाकर्मी शामिल होते हैं, जिनमें कमांडो और पुलिसकर्मी होते हैं। इस श्रेणी की सुरक्षा के तहत, व्यक्ति को 24 घंटे सुरक्षा प्रदान की जाती है, जिसमें एक समर्पित एस्कॉर्ट वाहन भी शामिल होता है। प्रशिक्षित कमांडो की टीम हर समय उनकी सुरक्षा और निगरानी सुनिश्चित करती है। यह सुरक्षा आम तौर पर उन व्यक्तियों को प्रदान की जाती है जिन्हें उच्च जोखिम का सामना करना पड़ता है। बाबा रामदेव और आमिर खान जैसे व्यक्तियों को भी ‘Z’ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है।
‘Z’ श्रेणी सुरक्षा के प्रमुख तत्व:
- कुल 22 सुरक्षाकर्मी, जिनमें कमांडो शामिल होते हैं।
- 24 घंटे सुरक्षा कवर।
- समर्पित एस्कॉर्ट वाहन।
- प्रशिक्षित कमांडो द्वारा निरंतर निगरानी।
- यह सुरक्षा राज्य सरकार द्वारा वहन की जाती है।
बढ़ी हुई सुरक्षा के बाद विधानसभा की व्यवस्था
नई ‘Z’ श्रेणी की सुरक्षा व्यवस्था के तहत, विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को अब चौबीसों घंटे विशेष सुरक्षा प्रदान की जाएगी। यह सुरक्षा उनके विधानसभा कार्यालय से लेकर उनके निवास तक फैली रहेगी। एक समर्पित एस्कॉर्ट वाहन उनके काफिले के साथ हर समय रहेगा। सार्वजनिक कार्यक्रमों और आधिकारिक उपस्थितियों के दौरान, एक नियुक्त प्रभारी अधिकारी के नेतृत्व में प्रशिक्षित कमांडो की टीम उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
इसके अतिरिक्त, दिल्ली विधानसभा परिसर की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से, प्रत्येक प्रवेश द्वार पर स्वचालित बूम बैरियर लगाए जा रहे हैं ताकि परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति और उनके सामान की अनिवार्य जांच की जा सके। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) को भी वाहन सहित परिसर में तैनात किया गया है, जो किसी भी संभावित खतरे का तुरंत सामना करने में सक्षम होगी।
दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि लोकतांत्रिक संस्थानों के विरुद्ध किसी भी प्रकार के खतरे के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई गई है। संवैधानिक पदाधिकारियों की सुरक्षा और विधानसभा परिसर की अखंडता सर्वोच्च प्राथमिकता है, ताकि सदन की कार्यवाही सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित हो सके।
सुरक्षा उल्लंघनों पर कार्रवाई
हाल ही में हुई सुरक्षा चूक की घटनाओं के बाद, पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई भी की है। दिल्ली विधानसभा में कार घुसने की घटना के संबंध में, पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिरी है, जिसमें एक SI और ASI को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई सुरक्षा व्यवस्था में हुई लापरवाही को गंभीरता से लेने का संकेत देती है।
‘की-टेकअवे’ (मुख्य बिंदु)
- दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को हालिया धमकियों और सुरक्षा घटनाओं के मद्देनजर ‘Z’ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है।
- विधानसभा को कई बार बम से उड़ाने की धमकी भरी ईमेल मिली हैं, जिससे सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।
- ‘Z’ श्रेणी की सुरक्षा में 22 कर्मी शामिल होते हैं और यह 24 घंटे का कवर प्रदान करती है।
- विधानसभा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त उपाय किए जा रहे हैं, जैसे बूम बैरियर और QRT की तैनाती।
- सुरक्षा उल्लंघनों के मामलों में पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की गई है।
- यह कदम लोकतांत्रिक संस्थानों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- इन घटनाओं के बावजूद, सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि कुछ धमकियां झूठी (होक्स) हो सकती हैं, लेकिन वे किसी भी खतरे को हल्के में नहीं ले रहे हैं।
- दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर जोर दिया है।













