Home / अंतरराष्ट्रीय समाचार / 3 दिवसीय देशव्यापी बैंक हड़ताल टली: 5-डे बैंकिंग पर बनी सहमति

3 दिवसीय देशव्यापी बैंक हड़ताल टली: 5-डे बैंकिंग पर बनी सहमति

नई दिल्ली: देश भर के करोड़ों बैंक ग्राहकों, व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए सोमवार की सुबह बड़ी राहत लेकर आई है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में प्रस्तावित तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल को बैंक यूनियनों ने देर रात उच्चस्तरीय वार्ता के बाद स्थगित (Defer) करने का फैसला किया है। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बीच रविवार रात 9:30 बजे आयोजित बैठक में 5-डे बैंकिंग (सप्ताह में पांच कार्यदिवस) लागू करने सहित प्रमुख मांगों पर महत्वपूर्ण सहमति बन गई है। इसके साथ ही आज यानी 28 सितंबर 2026 से देश भर के सभी राष्ट्रीयकृत, निजी और ग्रामीण बैंकों में बैंकिंग सेवाएं और काउंटर का कामकाज पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित हो रहा है।

देर रात की मैराथन बैठक में कैसे बनी सहमति?

The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार रात आयोजित इस ऑनलाइन बैठक में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के सात प्रमुख पदाधिकारी और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के छह वरिष्ठ कार्यकारी शामिल हुए। लगभग एक घंटे चली बैठक में बैंक कर्मियों की तीनों प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया गया। बैठक के बाद ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA) के महासचिव सी. एच. वेंकटचलम ने पुष्टि की कि सभी प्रमुख मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब देश भर के बैंक बिना किसी बाधा के कार्य करेंगे।

बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, महीने के सभी शेष शनिवारों को पूर्ण अवकाश घोषित करने और 5-डे बैंकिंग लागू करने के तौर-तरीके तय करने हेतु आईबीए और यूएफबीयू की उच्चस्तरीय संयुक्त समिति तत्काल गठित की जाएगी। यह समिति ग्राहक सेवाओं और शाखाओं के दैनिक कामकाजी घंटों के पुनर्गठन पर विस्तृत सिफारिशें तैयार करेगी, ताकि जनता और व्यापारिक लेन-देन में कोई रुकावट न आए।

हड़ताल समझौते का मुख्य विवरण और प्रमुख बिंदु

आईबीए और बैंक यूनियनों के बीच संपन्न ऐतिहासिक समझौते के मुख्य प्रावधानों और स्वीकृत फैसलों का प्रामाणिक विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:

प्रमुख एजेंडा / मांग यूनियनों की मूल मांग आईबीए एवं सरकार का फैसला ग्राहकों एवं कर्मियों पर प्रभाव
5-डे बैंकिंग व्यवस्था सभी शनिवारों को पूर्ण अवकाश और हफ्ते में केवल 5 दिन कार्य कार्यान्वयन के तौर-तरीके तय करने हेतु तत्काल उच्चस्तरीय संयुक्त समिति गठित सोमवार से शुक्रवार दैनिक कामकाजी समय 40-45 मिनट बढ़ने की संभावना
पीएलआई योजना विवाद स्केल IV और ऊपर के अधिकारियों हेतु पीएलआई सुधार यूनियनों की आपत्तियों के आधार पर योजना में संशोधन का प्रस्ताव भेजा जाएगा वरिष्ठ बैंक अधिकारियों के परफॉर्मेंस इंसेंटिव में समानता आएगी
द्विपक्षीय शेष मुद्दे 8 मार्च 2024 के समझौते के लंबित बिंदुओं का हल दोनों पक्ष शेष बचे सेवा मामलों को प्राथमिकता से सुलझाने पर सहमत हुए पेंशन अपडेशन और भत्तों से जुड़े लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण
सेवाओं का संचालन 28 से 30 सितंबर तक पूर्ण कार्य बहिष्कार हड़ताल पूरी तरह स्थगित, आज से सभी शाखाओं में कामकाज जारी हाफ-ईयरली क्लोजिंग के समय करोड़ों ग्राहकों को वित्तीय राहत मिली
कर्मचारी सहभागिता यूएफबीयू के अधीन 9 बैंक कर्मचारी संगठन आईबीए के 6 वरिष्ठ कार्यकारी और 7 यूनियन प्रतिनिधियों की बैठक देश के 10 लाख से अधिक बैंक कर्मचारियों का सीधा प्रतिनिधित्व

हाफ-ईयरली क्लोजिंग और वित्त मंत्रालय की अपील का असर

The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, 28 से 30 सितंबर के बीच बुलाई गई यह हड़ताल अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत नाजुक समय पर घोषित थी। 30 सितंबर को बैंकों की छमाही वित्तीय क्लोजिंग (Half-Yearly Closing) निर्धारित होती है, जो खातों के मिलान, बैलेंस शीट ऑडिट और टैक्स लेन-देन के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। यदि हड़ताल होती, तो सप्ताहांत मिलाकर लगातार पांच दिनों तक बैंकिंग तंत्र ठप हो जाता, जिससे हजारों करोड़ रुपये के चेक क्लीयरेंस और कारोबारी भुगतान अटक जाते।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने 21 सितंबर को कर्मचारियों से जनहित में हड़ताल वापस लेने का आग्रह किया था। मंत्रालय ने रेखांकित किया था कि क्लोजिंग के समय बैंक बंद रहने से आम जनता और छोटे कारोबारियों को भारी वित्तीय आघात पहुंचेगा। साथ ही संभावित असर को सीमित करने के उद्देश्य से सरकार初ने 27 सितंबर (रविवार) को भी बैंकों को खोलने का निर्देश दिया था, ताकि लोग जरूरी काम पहले ही निपटा सकें।

5-डे बैंकिंग की बहुप्रतीक्षित मांग: क्या है पूरा विवाद?

बैंकिंग क्षेत्र में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की मांग पिछले एक दशक से लंबित है। वर्ष 2015 के 10वें द्विपक्षीय वेतन समझौते के तहत महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश घोषित किया गया था, जबकि अन्य शनिवार को पूरे दिन का कार्यदिवस रखा गया था। उस समय यूनियनों को आश्वस्त किया गया था कि आगे चलकर सभी शनिवारों को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाएगा।

यूएफबीयू का तर्क रहा है कि जब केंद्र सरकार के मंत्रालय, आरबीआई, एलआईसी और शेयर बाजार 5-डे वर्क वीक पर काम कर रहे हैं, तो बैंक कर्मियों को इससे अलग क्यों रखा जाए? यूनियनों ने व्यावहारिक सुझाव दिया था कि सभी शनिवार अवकाश के बदले कर्मचारी प्रतिदिन 40 से 45 मिनट अतिरिक्त कार्य करने को तैयार हैं, जिससे ग्राहकों के सेवा समय में कोई कटौती नहीं होगी।

यूनियन नेताओं की प्रतिक्रिया और आगे का रोडमैप

ऑल इंडिया बैंक ऑफ महाराष्ट्र एम्प्लॉइज फेडरेशन के चेयरपर्सन देवीदास तुलजापुरकर ने वार्ता के नतीजों पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समिति का गठन एक सकारात्मक कदम है, जो ग्राहकों के हितों का ध्यान रखते हुए समाधान निकालेगी।

इसके अलावा स्केल IV और उससे ऊपर के वरिष्ठ अधिकारियों के परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) में विसंगतियों को दूर करने के लिए भी सरकार को संशोधित प्रस्ताव भेजने पर सहमति बनी है। यूनियनों का कहना था कि वर्तमान प्रारूप से अधिकारियों के मनोबल पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा था। अब आईबीए द्वारा नए संशोधनों का प्रारूप तैयार कर वित्त मंत्रालय को भेजा जाएगा।

निष्कर्ष: अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों की बड़ी जीत

संक्षेप में कहें तो 28 सितंबर 2026 की यह सुबह देश के आर्थिक तंत्र के लिए सुखद परिणाम लेकर आई है। ऐन वक्त पर बनी सहमति ने गंभीर वित्तीय संकट को टाल दिया और बैंक प्रबंधन तथा कर्मचारियों के बीच रचनात्मक संवाद का मार्ग प्रशस्त किया। आज सुबह से देशभर में एटीएम, शाखा काउंटर और चेक क्लीयरिंग सेवाएं सामान्य रूप से सुचारू हैं। त्योहारी सीजन और अर्धवार्षिक क्लोजिंग के बीच यह फैसला हर वर्ग के लिए राहतकारी सिद्ध हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *