बेंगलुरु / नई दिल्ली: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) के गठन के बाद देशव्यापी क्षेत्रीय दौरों के क्रम में आयोग का सबसे महत्वपूर्ण और प्रतीक्षित पड़ाव कल से कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में शुरू होने जा रहा है। वेतन आयोग की उच्चस्तरीय समिति 7 और 8 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में दो दिवसीय मैराथन बैठकें आयोजित करेगी। Times Now 8th CPC Bengaluru Meeting Report के अनुसार, यह बैठक इसलिए ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि इसमें पहली बार देश के रणनीतिक वैज्ञानिक, अंतरिक्ष और उच्च-तकनीकी रक्षा प्रतिष्ठानों के कर्मचारी प्रतिनिधि आयोग के समक्ष सीधे उपस्थित होकर अपना पक्ष रखेंगे। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR) के मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों ने आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए 5 सूत्रीय संयुक्त मांग पत्र तैयार किया है। Livemint की विशेष 8th CPC रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारी यूनियनों ने 3.68 के फिटमेंट फैक्टर की मुख्य मांग रखते हुए न्यूनतम मूल वेतन को ₹18,000 से सीधे बढ़ाकर ₹66,240 करने का सशक्त प्रस्ताव रखा है।
बेंगलुरु बैठक का विशेष महत्व: अंतरिक्ष, रक्षा और वैज्ञानिक संवर्ग
जयपुर, चंडीगढ़ और चेन्नई की पूर्व बैठकों की तुलना में बेंगलुरु की बैठक की संरचना पूर्णतः भिन्न है। बेंगलुरु देश का प्रमुख विज्ञान, नवाचार और एयरोस्पेस हब है। इसरो और अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) के वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मी लंबे समय से निजी क्षेत्र के मुकाबले वेतन विसंगति और प्रतिभा पलायन (Brain Drain) की गंभीर समस्या का सामना कर रहे हैं।
कर्मचारी परिसंघों द्वारा आयोग को सौंपे जाने वाले ज्ञापन में वैज्ञानिकों के लिए ‘प्रदर्शन संबंधित प्रोत्साहन योजना’ (PRIS) को पुनर्बहाल करने और ‘प्रोफेशनल अपडेट अलाउंस’ को तीन गुना करने की मांग की गई है। इसी प्रकार डीआरडीओ और रक्षा उत्पादन कारखानों के तकनीकी कर्मियों ने रक्षा क्षेत्र के जोखिम भरे वातावरण को देखते हुए विशेष वैज्ञानिक अनुसंधान भत्ते की वकालत की है। Central Pay Commission एनालिसिस के अनुसार, कर्मचारी प्रतिनिधियों का तर्क है कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में वैज्ञानिक संवर्ग का योगदान सर्वोच्च है, अतः उनके वेतन मैट्रिक्स को सामान्य प्रशासनिक संवर्ग से उच्चतर स्तर पर पुनर्गठित किया जाना चाहिए।
फिटमेंट फैक्टर 3.68 बनाम 2.57: वेतन मैट्रिक्स का तुलनात्मक विश्लेषण (तालिका)
8वें वेतन आयोग के समक्ष कर्मचारी यूनियनों ने 7वें वेतन आयोग के 2.57 फिटमेंट फॉर्मूले को अपर्याप्त बताते हुए मुद्रास्फीति, जीडीपी वृद्धि और वास्तविक जीवन यापन लागत के आधार पर 3.68 फिटमेंट फैक्टर की मांग उठाई है। यदि आयोग 3.68 के फिटमेंट फैक्टर की संस्तुति करता है, तो पे मैट्रिक्स के विभिन्न स्तरों (लेवल 1 से 10) पर होने वाली वेतन वृद्धि का विस्तृत तुलनात्मक विश्लेषण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:
| पे मैट्रिक्स लेवल | प्रतिनिधि पद संवर्ग | 7th CPC मूल वेतन | संशोधित मूल वेतन (2.57 फिटमेंट पर) | प्रस्तावित मूल वेतन (3.68 फिटमेंट पर) | दोनों आकलनों में अंतर (लाभ) |
|---|---|---|---|---|---|
| लेवल 1 (Level 1) | एमटीएस / ट्रैक मेंटेनर / हेल्पर | ₹18,000 | ₹46,260 | ₹66,240 | +₹19,980 |
| लेवल 2 (Level 2) | जूनियर क्लर्क / तकनीशियन-3 | ₹19,900 | ₹51,143 | ₹73,232 | +₹22,089 |
| लेवल 4 (Level 4) | यूडीसी / वरिष्ठ तकनीशियन | ₹25,500 | ₹65,535 | ₹93,840 | +₹28,305 |
| लेवल 6 (Level 6) | स्टेशन मास्टर / वैज्ञानिक सहायक | ₹35,400 | ₹90,978 | ₹1,30,272 | +₹39,294 |
| लेवल 7 (Level 7) | एएसओ / इंजीनियर / वैज्ञानिक-SC | ₹44,900 | ₹1,15,393 | ₹1,65,232 | +₹49,839 |
| लेवल 8 (Level 8) | अनुभाग अधिकारी / वरिष्ठ अभियंता | ₹47,600 | ₹1,22,332 | ₹1,75,168 | +₹52,836 |
| लेवल 10 (Level 10) | वैज्ञानिक-SD / सहायक निदेशक | ₹56,100 | ₹1,44,177 | ₹2,06,448 | +₹62,271 |
रेलवे सुपरवाइजर्स और ट्रैक मेंटेनर्स के लिए विशेष प्रस्ताव
दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR) के हुबली और बेंगलुरु मंडलों के कर्मचारी संगठनों तथा इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने रेलवे के परिचालन संवर्गों के लिए विशिष्ट मांगें तैयार की हैं। StaffNews 8th Pay Commission विश्लेषण के अनुसार, आयोग के समक्ष मुख्य रूप से निम्नलिखित तकनीकी प्रस्ताव रखे जाएंगे:
1. जूनियर इंजीनियरों का ग्रेड अपग्रेडेशन: रेलवे में जूनियर इंजीनियर (JE) के पद को वर्तमान लेवल-6 से अपग्रेड कर सीधे लेवल-7 में शामिल किया जाए, क्योंकि उनकी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 3 वर्षीय इंजीनियरिंग डिप्लोमा अथवा बी.टेक है।
2. सीनियर सेक्शन इंजीनियरों (SSE) को राजपत्रित संवर्ग: सीनियर सेक्शन इंजीनियरों के पद को लेवल-8 में नियमित करने और 4 वर्ष की सेवा के उपरांत नॉन-फंक्शनल लेवल-9 प्रदान करने का प्रस्ताव है।
3. ट्रैक मेंटेनर्स और लोको पायलटों को जोखिम भत्ता: ट्रैक मेंटेनरों के लिए वर्तमान जोखिम एवं कठिनाई भत्ते (Risk and Hardship Allowance) को दोगुना करने तथा रनिंग स्टाफ (लोको पायलट व गार्ड) के माइलेज भत्ते की गणना वास्तविक बढ़े हुए मूल वेतन पर करने की मांग की गई है।
पेंशनर्स और स्वास्थ्य सुरक्षा (CGHS) से जुड़े प्रमुख मुद्दे
कर्नाटक केंद्रीय सरकार पेंशनर्स एसोसिएशन ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष सेवानिवृत्त कर्मचारियों और बुजुर्गों की आर्थिक एवं स्वास्थ्य सुरक्षा से संबंधित गंभीर विसंगतियां उठाने का निर्णय लिया है। पेंशनर्स संगठनों ने रेखांकित किया है कि 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए चिकित्सा खर्च अत्यधिक बढ़ चुका है।
पेंशन मामलों में प्रमुख मांग पेंशन कम्यूटेशन (Commutation) की पुनर्बहाली अवधि को वर्तमान 15 वर्ष से घटाकर 12 वर्ष करने की है, क्योंकि 12 वर्षों में सरकार द्वारा अग्रिम दी गई राशि ब्याज सहित पूरी तरह वसूल हो जाती है। इसके अतिरिक्त केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) के तहत बेंगलुरु, मैसूर और हुबली जैसे शहरों के निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों द्वारा कैशलेस उपचार से इनकार करने और पुराने पैकेज रेट का मुद्दा उठाया जाएगा। गैर-सीजीएचएस क्षेत्रों में रहने वाले पेंशनरों के लिए फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) को ₹1,000 से बढ़ाकर ₹3,000 करने की पुरजोर वकालत की जाएगी।
आगामी मुंबई दौरे (22-23 अक्टूबर) से पहले की रूपरेखा
बेंगलुरु सत्र में कर्नाटक और तमिलनाडु के 40 से अधिक कर्मचारी संघों को प्रस्तुति हेतु समय दिया गया है। आयोग के अध्यक्ष और सदस्य प्रत्येक ज्ञापन का अध्ययन कर दक्षिण भारतीय क्लस्टर की आर्थिक वास्तविकताओं को रिपोर्ट में समाहित करेंगे। इसके बाद आयोग का अगला पड़ाव 22 और 23 अक्टूबर 2026 को देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में होगा, जहां रिजर्व बैंक, सेबी, आयकर, सीमा शुल्क और डाक विभाग के संगठनों के साथ चर्चा होगी।
कर्मचारी परिसंघों का मानना है कि बेंगलुरु बैठक में दक्षिण भारत के उच्च-प्रौद्योगिकी संवर्गों द्वारा रखे गए साक्ष्य 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट को एक नया और प्रगतिशील स्वरूप प्रदान करेंगे। आयोग को मई 2027 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपनी है, जिसके बाद कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से संशोधित वेतन और एरियर का भुगतान किया जाएगा। बेंगलुरु के दो दिन केंद्रीय कर्मचारियों के भविष्य के वेतनमान की दिशा तय करने में अत्यंत ऐतिहासिक सिद्ध होंगे।













