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RBI ने रेपो रेट 0.25% बढ़ाकर 5.50% किया, सेंसेक्स 296 अंक लुढ़का

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को नीतिगत रेपो दर (Repo Rate) में 25 आधार अंकों (bps) की बढ़ोतरी का बड़ा ऐलान किया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में संपन्न तीन दिवसीय समीक्षा बैठक के बाद रेपो दर 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गई है। करीब साढ़े तीन साल बाद केंद्रीय बैंक द्वारा दरों में यह पहली वृद्धि की गई है। इस घोषणा के तुरंत बाद भारतीय शेयर बाजारों में तीखा दबाव दिखा। प्रमुख सूचकांक बीएसई सेंसेक्स 295.95 अंक गिरकर 72,771.86 और एनएसई निफ्टी 50 सूचकांक 124.60 अंक टूटकर 22,651.50 के स्तर पर आ गया।

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आरबीआई एमपीसी का फैसला: कैलिब्रेटेड टाइटनिंग पर लौटा रुख

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The Hindu की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के पक्ष में मतदान किया। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपना नीतिगत रुख ‘तटस्थ’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ (Calibrated Tightening) कर दिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ किया कि निकट भविष्य में दरों में कटौती की संभावना समाप्त हो चुकी है। अब आगे का कदम केवल दर वृद्धि या फिर ठहराव का ही हो सकता है。

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आरबीआई ने आखिरी बार फरवरी 2023 में दरें बढ़ाकर 6.50 प्रतिशत की थीं। इसके बाद 2025 में 125 आधार अंकों की कटौती कर रेपो दर 5.25 प्रतिशत की गई थी, जो दिसंबर 2025 से स्थिर थी। लेकिन पश्चिम एशिया संकट के चलते कच्चे तेल में तेजी और घरेलू खाद्य महंगाई के दबाव ने केंद्रीय बैंक को सख्त मौद्रिक रुख अपनाने पर विवश किया है। गवर्नर ने कहा कि मुद्रास्फीति का परिदृश्य अब सहज नहीं रहा है और अर्थव्यवस्था में मूल्य वृद्धि का दबाव व्यापक स्तर पर फैल रहा है。

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आरबीआई पॉलिसी और प्रमुख वित्तीय संकेतकों का विवरण

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बुधवार को घोषित मौद्रिक नीति के प्रमुख आंकड़ों और वित्तीय बाजारों पर इसके असर का आधिकारिक विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:

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आर्थिक एवं बाजार संकेतक संशोधित स्तर (7 अक्टूबर 2026) पूर्व स्तर / स्थिति शुद्ध बदलाव आर्थिक प्रभाव व निहितार्थ
नीतिगत रेपो रेट (Repo Rate) 5.50% 5.25% +25 आधार अंक (+0.25%) होम, ऑटो व पर्सनल लोन की ईएमआई महंगी होगी
मौद्रिक नीति रुख (Stance) कैलिब्रेटेड टाइटनिंग तटस्थ (Neutral) कड़ा मौद्रिक रुख निकट भविष्य में दर कटौती की संभावना समाप्त
वित्त वर्ष 2026-27 जीडीपी ग्रोथ 7.10% 6.70% +40 आधार अंक (+0.40%) मजबूत आर्थिक विकास से सख्ती की गुंजाइश मिली
चालू वित्त वर्ष सीपीआई महंगाई 5.20% 5.00% +20 आधार अंक कच्चे तेल व खाद्य महंगाई का संयुक्त दबाव
कोर इन्फ्लेशन अनुमान 4.40% 4.30% +10 आधार अंक सेवाओं व विनिर्माण में अंतर्निहित मूल्य वृद्धि
बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 72,771.86 73,067.81 -295.95 अंक (-0.41%) ब्याज दर संवेदी शेयरों में तेज बिकवाली
एनएसई निफ्टी 50 (NSE Nifty) 22,651.50 22,776.10 -124.60 अंक (-0.55%) 22,700 का अहम तकनीकी सपोर्ट टूटा
इंडिया विक्स (India VIX) 13.97 अंक 13.60 अंक +2.68% उछाल बाजार में अस्थिरता और घबराहट का स्पष्ट संकेत

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शेयर बाजार पर मार: ऑटो और रियल्टी सेक्टर में गिरावट

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HDFC Sky की बाजार रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई के फैसले के बाद दलाल स्ट्रीट पर ब्याज दर संवेदी क्षेत्रों में बिकवाली देखी गई। निफ्टी ऑटो इंडेक्स 1.16 प्रतिशत लुढ़क गया। बजाज ऑटो 1.63 प्रतिशत टूटकर ₹9,854 पर आ गया, जबकि टाटा मोटर्स 1.10 प्रतिशत और महिंद्रा एंड महिंद्रा 1.01 प्रतिशत गिर गए। वहीं रियल्टी इंडेक्स में 0.65 प्रतिशत की कमजोरी रही, क्योंकि महंगे लोन से रियल full एस्टेट मांग प्रभावित होने की आशंका है。

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निफ्टी के दिग्गज शेयरों में टाइटन कंपनी सबसे अधिक 3.53 प्रतिशत गिरकर ₹4,389 पर आ गया। हिंडाल्को 1.83 प्रतिशत, जेएसडब्ल्यू स्टील 1.33 प्रतिशत, एशियन पेंट्स 1.30 प्रतिशत और ओएनजीसी 1.18 प्रतिशत टूट गए। दूसरी ओर, बैंकिंग शेयरों में मिला-जुला रुख रहा; कोटक महिंद्रा बैंक 1.66 प्रतिशत और एक्सिस बैंक 0.38 प्रतिशत चढ़े, जबकि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी बजाज फाइनेंस 1.08 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुई。

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महंगाई का दबाव और मजबूत आर्थिक विकास का संबल

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दरें बढ़ाने के पीछे मुख्य कारण खुदरा महंगाई (CPI) का बढ़ना है। अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई 4.82 प्रतिशत रही, जो लगातार तीसरे महीने लक्ष्य से अधिक थी। उपभोक्ता बास्केट के लगभग 50 प्रतिशत हिस्से में महंगाई 4 प्रतिशत से ऊपर है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपया और खाद्य महंगाई के कारण आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है。

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वहीं भारत की तेज जीडीपी वृद्धि ने केंद्रीय बैंक को सख्ती की गुंजाइश दी। पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही थी। विश्व बैंक减 ने भी 6 अक्टूबर को भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत किया है। आरबीआई ने भी वित्त वर्ष 2027 के लिए विकास दर अनुमान को बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है, जो अर्थव्यवस्था की आंतरिक मजबूती को प्रदर्शित करता है。

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आम आदमी पर प्रभाव: ईएमआई महंगी, एफडी पर अधिक रिटर्न

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इस फैसले का सीधा असर रिटेल ग्राहकों की मासिक लोन ईएमआई पर पड़ेगा। फ्लोटिंग रेट होम लोन सीधे रेपो रेट से जुड़े होते हैं। ऐसे में बैंक तुरंत कर्ज महंगा करेंगे। यदि किसी ग्राहक ने 20 साल के लिए ₹50 लाख का होम लोन लिया है, तो 0.25 प्रतिशत ब्याज दर बढ़ने पर मासिक ईएमआई ₹800 से ₹1,000 तक बढ़ जाएगी। वहीं दूसरी ओर, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करने वाले बचतकर्ताओं को बैंक जमा पर पहले से अधिक ब्याज का लाभ मिलेगा。

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विशेषज्ञों की राय और खुदरा निवेशकों के लिए रणनीति

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बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि दर वृद्धि काफी हद तक अपेक्षित थी, लेकिन ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ का रुख यह दर्शाता है कि सख्ती का दौर अभी जारी रह सकता है। खुदरा निवेशकों को भारी कर्ज वाली कंपनियों से बचना चाहिए और फार्मा, एफएमसीजी तथा आईटी जैसे रक्षात्मक क्षेत्रों में निवेश बनाए रखना चाहिए। इक्विटी म्यूचुअल फंड में व्यवस्थित निवेश योजना (SIP) को बिना रुके जारी रखना ही सबसे समझदारी भरा रास्ता होगा。

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निष्कर्ष: संतुलित नीति के साथ आगे बढ़ता बाजार

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7 अक्टूबर 2026 का यह फैसला स्पष्ट करता है कि आरबीआई तीव्र विकास दर के साथ-साथ मूल्य स्थिरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। 7.1 प्रतिशत की मजबूत विकास दर इस नीतिगत सख्ती के झटके को सहने में पूरी तरह सक्षम है। आने वाले दिनों में बाजार की चाल कॉरपोरेट तिमाही नतीजों, वैश्विक कच्चे तेल के भाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। निवेशकों को घबराहट से बचकर अनुशासित रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहिए。

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