Home / बिजनेस / फाइनेंस / रेपो रेट बढ़कर 5.50%: सेंसेक्स 429 अंक टूटा, निफ्टी 22,603 पर

रेपो रेट बढ़कर 5.50%: सेंसेक्स 429 अंक टूटा, निफ्टी 22,603 पर

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी और सख्त रुख अपनाने के बाद बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को घरेलू शेयर बाजार में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। पिछले दो कारोबारी सत्रों की तेजी थम गई और दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 429.11 अंक यानी 0.59 प्रतिशत फिसलकर 72,638.70 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी (NSE Nifty 50) 173.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत टूटकर 22,603.05 पर आ गया। एनएसई पर 1,928 शेयरों में तेजी रही, जबकि 2,251 शेयर गिरावट में रहे और 192 शेयर स्थिर रहे。

आरबीआई एमपीसी का फैसला: करीब 4 साल बाद रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ा

The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाने का सर्वसम्मत फैसला लिया। इस बढ़ोतरी के साथ रेपो रेट 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गया है। फरवरी 2023 के बाद लगभग पौने चार वर्षों में यह पहला मौका है जब केंद्रीय बैंक ने दरों में वृद्धि की है। इससे पहले दिसंबर 2025 में रेपो दर को घटाकर 5.25 प्रतिशत किया गया था और उसके बाद लगातार चार बैठकों में इसे अपरिवर्तित रखा गया था。

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक ने अपना रुख बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। गवर्नर ने स्पष्ट किया कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना खत्म हो चुकी है। आगे केवल दर वृद्धि या लंबे ठहराव का विकल्प ही खुला है। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के चलते पैदा हुए मुद्रास्फीति दबाव ने केंद्रीय बैंक को यह कड़ा कदम उठाने पर विवश किया。

महंगाई और विकास दर का गणित: आरबीआई ने क्यों अपनाया सख्त रुख?

केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 40 आधार अंक बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है, जो घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। हालांकि, आपूर्ति पक्ष से बढ़ते मुद्रास्फीति दबाव ने चिंता बढ़ा दी है। रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार तीसरी तिमाही में महंगाई 6.0 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.7 प्रतिशत रहने का जोखिम है。

गवर्नर ने बताया कि असमान मानसून और कच्चे तेल की तेजी से खाद्य एवं ऊर्जा वस्तुओं के भाव बढ़े हैं। चीनी और प्याज के महंगे होने से कोर इन्फ्लेशन में भी फैलाव देखा जा रहा है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एआई संपत्तियों के ऊंचे वैल्यूएशन और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता को भी वित्तीय स्थिरता के लिए प्रमुख जोखिम बताया गया है。

मार्केट क्लोजिंग का मुख्य डेटा: प्रमुख सूचकांक और कमोडिटीज की स्थिति

बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को शेयर बाजार और वित्तीय संकेतकों के क्लोजिंग स्तरों का आधिकारिक विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:

वित्तीय संकेतक / सूचकांक समापन स्तर (7 अक्टूबर 2026) पिछला बंद स्तर शुद्ध बदलाव (अंक / %) बाजार पर मुख्य प्रभाव
बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 72,638.70 73,067.81 -429.11 अंक (-0.59%) दो दिनों की तेजी के बाद तेज गिरावट
एनएसई निफ्टी 50 (NSE Nifty) 22,603.05 22,776.10 -173.05 अंक (-0.76%) 22,650 का अहम सपोर्ट स्तर टूटा
आरबीआई रेपो रेट (Repo Rate) 5.50% 5.25% +0.25% (+25 bps) कर्ज और ईएमआई में सीधी बढ़ोतरी
इंडिया विक्स (India VIX) 13.88 अंक 13.61 अंक +1.98% की तेजी बाजार में बढ़ी अस्थिरता और घबराहट
भारतीय रुपया (USD / INR) ₹96.35 प्रति डॉलर ₹96.08 प्रति डॉलर -27 पैसे की कमजोरी डॉलर मजबूती और एशियाई मुद्राओं पर दबाव
कच्चा तेल (Brent Crude) $98.50 प्रति बैरल $96.80 प्रति बैरल +1.75% की बढ़त आयात बिल और महंगाई पर सीधा दबाव
भारत जीडीपी अनुमान (FY27) 7.10% 6.70% +40 आधार अंक (अपग्रेड) घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती

सेक्टरवार प्रदर्शन: ब्याज दर संवेदी शेयरों में मची सबसे बड़ी बिकवाली

HDFC Sky की मार्केट रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक के सख्त रुख का गहरा असर रियल्टी, मेटल और ऑटो शेयरों पर पड़ा। महंगे कर्ज की आशंका से खरीदारी टलने के डर में टाइटन कंपनी का शेयर 4.07 प्रतिशत यानी ₹185 टूटकर ₹4,365 पर बंद हुआ, जो निफ्टी का टॉप लूजर रहा। इसी तरह अडाणी एंटरप्राइजेज में 3.89 प्रतिशत की गिरावट आई और यह ₹2,739 पर आ गया。

मेटल सेक्टर में बॉन्ड यील्ड की तेजी से बिकवाली रही। हिंडाल्को 2.74 प्रतिशत गिरकर ₹914.75 पर बंद हुआ, जबकि जेएसडब्ल्यू स्टील 2.40 प्रतिशत टूटकर ₹1,229.40 पर आ गया। एशियन पेंट्स में 2.41 प्रतिशत, बीईएल में 2.30 प्रतिशत और इंफोसिस में 2.17 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा अडाणी पोर्ट्स में 2.10 प्रतिशत, श्रीराम फाइनेंस में 1.98 प्रतिशत और एलएंडटी में 1.97 प्रतिशत का नुकसान दर्ज हुआ。

बैंकिंग और चुनिंदा शेयरों में खरीदारी: जिन्होंने संभाला कुछ मोर्चा

बाजार में बिकवाली के बीच कुछ चुनिंदा लार्जकैप शेयरों ने सूचकांक को सहारा दिया। मार्जिन सुधार की उम्मीद से कोटक महिंद्रा बैंक का शेयर 1.88 प्रतिशत उछलकर ₹4,408.10 पर बंद हुआ, जो दिन का सबसे बड़ा गेनर रहा। इसके अलावा बीएसई लिमिटेड में 1.72 प्रतिशत की बढ़त रही。

भारती एयरटेल 1.51 प्रतिशत की मजबूती के साथ ₹1,837.80 पर बंद हुआ। इसके साथ आईसीआईसीआई बैंक में 0.92 प्रतिशत, कोल इंडिया में 0.72 प्रतिशत, बजाज फाइनेंस में 0.68 प्रतिशत और एचडीएफसी लाइफ में 0.67 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। हालांकि, इन शेयरों की बढ़त पूरे बाजार का दबाव थामने के लिए पर्याप्त नहीं रही。

आम जनता और कर्जदारों पर सीधा असर: होम लोन और ईएमआई होगी महंगी

रेपो रेट में बढ़ोतरी का सीधा प्रभाव खुदरा कर्जदारों पर पड़ेगा। बैंक अब ईबीएलआर से जुड़े होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेंगे। इससे फ्लोटिंग रेट वाले सभी कर्जों की ईएमआई बढ़ जाएगी या अवधि लंबी हो जाएगी। रियल एस्टेट जानकारों के अनुसार महंगे होम लोन से घर खरीदार सतर्क हो जाएंगे और अफोर्डेबल हाउसिंग में फैसले टल सकते हैं। वहीं वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह फैसला राहत लेकर आएगा क्योंकि जमा दरें भी बढ़ेंगी。

मार्केट आउटलुक और रिटेल निवेशकों के लिए रणनीति

विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय बाजार अब ऊंची ब्याज दरों के साथ तालमेल बिठा रहे हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5.3 प्रतिशत पर रहने और डॉलर की मजबूती से विदेशी निकासी का दबाव बना रह सकता है। तकनीकी रूप से निफ्टी के लिए 22,500 का स्तर मजबूत सपोर्ट और 22,800 का स्तर कड़ा प्रतिरोध रहेगा। जानकारों की सलाह है कि खुदरा निवेशक घबराहट में शेयर न बेचें, बल्कि गिरावट में मजबूत लार्जकैप कंपनियों में एसआईपी के जरिए किस्तों में निवेश जारी रखें。

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *