नई दिल्ली: त्योहारी सीजन के आगमन पर भारतीय रेल के 11 लाख से अधिक गैर-राजपत्रित (Non-Gazetted) कर्मचारियों के लिए रेलवे बोर्ड ने अत्यंत महत्वपूर्ण आधिकारिक चेतावनी जारी की है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) के संबंध में सोशल मीडिया पर प्रसारित आदेश को रेलवे बोर्ड ने पूरी तरह फर्जी और जाली करार दिया है। StaffNews पर उपलब्ध रेलवे बोर्ड के आधिकारिक स्पष्टीकरण और Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर ‘RBE No. 101/2026’ दिनांक 06.10.2026 के नाम से फर्जी पत्र वायरल था, जिसमें दावा था कि रेल कर्मचारियों को 78 दिनों के वेतन के बराबर ₹41,149 का बोनस स्वीकृत हो चुका है। पत्र सूचना कार्यालय (PIB Fact Check) और रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ है और इस जाली पत्र पर वित्तीय निकासी सख्त वर्जित है。
वायरल फर्जी पत्र में क्या किए गए थे भ्रामक दावे?
दशहरा और दीपावली से पूर्व रेल कर्मचारियों में वार्षिक बोनस का बेसब्री से इंतजार रहता है। इसी संवेदनशीलता का अनुचित लाभ उठाते हुए शरारती तत्वों ने रेलवे बोर्ड का प्रारूप तैयार कर सोशल मीडिया पर जाली परिपत्र जारी कर दिया। इस जाली पत्र में संयुक्त निदेशक स्तर के जाली हस्ताक्षर थे और पत्रांक संख्या RBE No. 101/2026 अंकित थी। पत्र में दावा था कि कैबिनेट अनुमोदन के बाद सभी पात्र कर्मचारियों को वर्ष 2025-26 के लिए 78 दिनों का बोनस ₹41,149 की राशि के रूप में बैंक खातों में भेजा जाएगा。
जैसे ही यह आदेश सोशल मीडिया में फैला, कर्मचारियों में भ्रम पैदा हो गया। कई कर्मचारियों ने इसे वास्तविक आदेश मान लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने तुरंत हस्तक्षेप किया और सभी जोनल महाप्रबंधकों (General Managers) व मुख्य कार्मिक अधिकारियों (PCPOs) को औपचारिक खंडन पत्र भेजा। बोर्ड ने निर्देश दिया कि इस निराधार पत्र को पूरी तरह खारिज किया जाए और किसी स्तर पर इसके आधार पर कार्रवाई न हो。
रेलवे बोर्ड का आधिकारिक खंडन और एडवाइजरी के मुख्य बिंदु (तालिका)
रेल मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी में कर्मचारियों और क्षेत्रीय प्रशासन को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं ताकि अफवाहें रुकें। ABP Live की पड़ताल और रेलवे बोर्ड के निर्देशों का तुलनात्मक सारणीबद्ध विश्लेषण नीचे दिया गया है:
| जांच का मुख्य बिंदु | वायरल पत्र का फर्जी दावा | रेलवे बोर्ड की आधिकारिक स्थिति |
|---|---|---|
| पत्रांक संख्या एवं दिनांक | RBE No. 101/2026, दिनांक 06.10.2026 | पूर्णतः फर्जी; रेलवे बोर्ड ने ऐसा कोई RBE जारी नहीं किया |
| दावा की गई बोनस राशि | ₹41,149 प्रति कर्मचारी | अमान्य एवं मनगढ़ंत; वर्तमान गणना सीलिंग में संभव नहीं |
| वेतन दिवस का आधार | 78 दिनों का वेतन | कैबिनेट से औपचारिक स्वीकृति अभी प्रक्रियाधीन है |
| दस्तावेज की वैधता | आधिकारिक आदेश का दिखावा | जाली दस्तावेज; जोनल कार्यालयों को नजरअंदाज करने का आदेश |
| भुगतान निर्देश | तत्काल भुगतान का दावा | किसी प्रकार का भुगतान या बिल बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध |
| सत्यापन स्रोत | सोशल मीडिया लिंक्स | केवल indianrailways.gov.in एवं PIB पर जारी सूचना मान्य |
रेलवे PLB बोनस का वास्तविक नियम और ₹7,000 की वैधानिक सीमा
रेलवे में उत्पादकता आधारित बोनस (PLB) वर्ष 1979 में प्रारंभ हुआ था। इसका उद्देश्य माल ढुलाई और यात्री परिवहन में कर्मचारियों के योगदान को पुरस्कृत करना है। वर्ष 1995-96 से ग्रुप ‘सी’ और ‘डी’ के कर्मचारियों को पात्रता दी गई थी, परंतु भुगतान की गणना हेतु अधिकतम सीलिंग निश्चित की गई है。
रेलवे बोर्ड के पत्र RBE No. 109/2016 के तहत पीएलबी गणना सीमा ₹7,000 प्रतिमाह निर्धारित है। इसके अंतर्गत एक दिन के वेतन की गणना सूत्र ₹7,000 ÷ 30.4 दिन = ₹230.26 के आधार पर होती है। जब सरकार 78 दिनों के बोनस की घोषणा करती है, तो कुल राशि 78 × ₹230.26 = ₹17,951 होती है। यही कारण है कि पिछले दस वर्षों से रेल कर्मचारियों को प्रत्येक वर्ष ठीक ₹17,951 ही बोनस मिल रहा है, चाहे उनका मूल वेतन अथवा महंगाई भत्ता (DA) कितना भी बढ़ा हो। वायरल पत्र में दावा की गई ₹41,149 की राशि वर्तमान नियमों के तहत पूरी तरह असंभव है。
वास्तविक PLB बनाम वायरल दावों का गणितीय तुलनात्मक विश्लेषण (तालिका)
कर्मचारियों के मन में बोनस राशि को लेकर उठ रहे सवालों के समाधान हेतु वर्तमान वैधानिक फार्मूले और भ्रामक दावों का तुलनात्मक अध्ययन आवश्यक है। नीचे दी गई तालिका दर्शाती है कि मौजूदा नियमों और मूल वेतन के अनुसार वास्तविक स्थिति क्या है:
| तुलना के मानक | वर्तमान लागू नियम (₹7,000 सीलिंग) | 7वें वेतन आयोग का न्यूनतम मूल वेतन | वायरल पत्र का भ्रामक दावा |
|---|---|---|---|
| गणना का आधार वेतन | ₹7,000 (स्थिर सीलिंग) | ₹18,000 (लेवल-1 बेसिक) + DA (53%) | अस्पष्ट आधार |
| प्रति दिन मजदूरी दर | ₹230.26 प्रति दिन | लगभग ₹900 से ₹960 प्रति दिन | ₹527.55 प्रति दिन |
| स्वीकृत कार्य दिवस | 78 दिन | 78 दिन | 78 दिन |
| कुल देय बोनस राशि | ₹17,951 | ₹70,000 से अधिक (यदि वास्तविक वेतन मिले) | ₹41,149 (फर्जी) |
| लागू होने की स्थिति | विगत 10 वर्षों से यथावत लागू | कर्मचारी संघों द्वारा 8वें वेतन आयोग से मांग | रेलवे बोर्ड द्वारा खारिज |
8वें वेतन आयोग के समक्ष कर्मचारी संघों की मांग: सीलिंग ₹18,000 करने का प्रस्ताव
वर्तमान में रेलवे कर्मचारियों के बीच बोनस सीलिंग को लेकर असंतोष है। Upstox की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, IRTSA और AIRF ने 8वें वेतन आयोग व वित्त मंत्रालय को ज्ञापन सौंपा है। संघों का तर्क है कि 7वें वेतन आयोग के बाद न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 हो चुका है और महंगाई भत्ता 50% पार कर चुका है, किंतु बोनस की सीलिंग आज भी 2014-15 के ₹7,000 पर ही अटकी है。
आईआरटीएसए के अनुसार, रेलवे की सकल प्राप्तियां वर्ष 2023-24 के ₹2,64,600 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2024-25 में ₹2,78,100 करोड़ हो गई हैं। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि बोनस गणना सीलिंग को ₹7,000 से बढ़ाकर न्यूनतम वेतन ₹18,000 किया जाए, अथवा महंगाई भत्ते के अनुपात में इसमें ₹10,770 जोड़कर इसे ₹28,721 किया जाए ताकि कर्मचारियों को वास्तविक उत्पादकता का लाभ मिल सके。
आधिकारिक कैबिनेट मंजूरी और बोनस घोषणा की प्रक्रिया
रेलवे में बोनस प्रदान करने की वैधानिक प्रक्रिया निर्धारित है। इसके तहत रेल मंत्रालय उत्पादकता सूचकांकों के आधार पर प्रस्ताव तैयार कर केंद्रीय कैबिनेट के समक्ष रखता है। कैबिनेट बैठक में मुहर लगने के बाद पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी होती है। तत्पश्चात रेलवे बोर्ड आरबीई सर्कुलर जोनल कार्यालयों को भेजता है。
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कैबिनेट का औपचारिक फैसला आगामी दिनों में आने की संभावना है। विजयादशमी से पूर्व कर्मचारियों के खातों में बोनस राशि भेज दी जाती है। रेलवे बोर्ड ने परामर्श दिया है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट पत्रों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक वेबसाइट indianrailways.gov.in या पीआईबी की सूचना देखें। किसी संदिग्ध पत्र की सूचना तत्काल प्रशासनिक नियंत्रण कक्ष को दी जानी चाहिए。













