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काउंटर टिकट पर भी ₹10 लाख का बीमा अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट का आदेश

नई दिल्ली: देश के करोड़ों रेल यात्रियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर भारत की सर्वोच्च अदालत ने एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रेलवे (Indian Railways) को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 27 अक्टूबर 2026 से रेलवे स्टेशन के काउंटरों से खरीदे जाने वाले सभी ऑफलाइन टिकटों पर भी यात्रा बीमा (Travel Insurance) अनिवार्य रूप से लागू किया जाए। अब तक यह बीमा केवल आईआरसीटीसी (IRCTC) की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से ऑनलाइन टिकट बुक कराने वाले यात्रियों के लिए ही उपलब्ध था। शीर्ष अदालत के इस नए आदेश के बाद सामान्य श्रेणी के अनारक्षित टिकट और आरक्षण खिड़कियों से खरीदे गए सभी टिकटों पर भी ऑनलाइन टिकटों की तरह ₹10 लाख तक का जीवन बीमा कवर स्वतः प्राप्त होगा।

सुप्रीम कोर्ट की दो टूक: रेलवे बोर्ड की होगी सीधी जिम्मेदारी

The Indian Express की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की विशेष पीठ ने जून 2023 के ओडिशा रेल हादसे के बाद दायर जनहित याचिका पर यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। पीठ ने रेलवे प्रशासन को चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि यदि 27 अक्टूबर 2026 से इस आदेश का अक्षरशः पालन नहीं हुआ, तो इसकी सीधी और व्यक्तिगत जिम्मेदारी रेलवे बोर्ड (Railway Board) के शीर्ष अधिकारियों पर तय की जाएगी।

अदालत ने सुनवाई के दौरान गहरी नाराजगी जताई कि रेलवे प्रशासन ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के उन गरीब यात्रियों की अनदेखी की है, जो इंटरनेट या स्मार्टफोन का उपयोग नहीं करते और स्टेशन काउंटर से टिकट खरीदते हैं। पीठ ने टिप्पणी की कि केंद्र सरकार ने मई में आश्वासन दिया था कि ऑफलाइन टिकट धारकों को भी बीमा देने का प्रारूप तैयार किया जा रहा है, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई प्रगति नहीं हुई। अदालत ने रेलवे को अतिरिक्त मोहलत देने से साफ इनकार कर दिया।

रेलवे यात्रा बीमा: कवरेज, मुआवजा और पात्रता की स्थिति

आईआरसीटीसी के मौजूदा नियमों और सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के अनुसार, काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों को मिलने वाले वित्तीय सुरक्षा कवर का पूरा विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट किया गया है:

बीमा श्रेणी / नुकसान का प्रकार मुआवजा राशि (₹) पात्रता एवं स्थिति दावा विवरण
दुर्घटना में मृत्यु (Accidental Death) ₹10,00,000 सभी वैध ऑफलाइन व ऑनलाइन टिकट धारक नामित आश्रित को 100% एकमुश्त भुगतान
स्थायी पूर्ण विकलांगता (Permanent Disability) ₹10,00,000 दोनों हाथ/पैर या आंखें खोने पर मेडिकल बोर्ड प्रमाण पत्र पर पूरा क्लेम
स्थायी आंशिक विकलांगता (Partial Disability) ₹7,50,000 एक अंग की स्थायी गंभीर क्षति पर निर्धारित प्रतिशत के अनुसार भुगतान
अस्पताल में इलाज खर्च (Hospitalization) ₹2,00,000 घायल यात्री के चिकित्सा उपचार हेतु अस्पताल बिलों की प्रतिपूर्ति
पार्थिव शरीर का परिवहन (Mortal Remains) ₹10,00,000 शव को गृह नगर तक ले जाने के लिए परिजनों को त्वरित आपात सहायता
प्रीमियम लागत (Insurance Premium) मात्र 45 पैसे (अनुमानित) टिकट मूल्य के साथ स्वतः शामिल रेलवे द्वारा न्यूनतम शुल्क व्यवस्था

कवच और सुरक्षा उपायों पर रेलवे के रवैये पर भारी नाराजगी

Livemint की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने रेल सुरक्षा के बुनियादी ढांचे—विशेषकर स्वदेशी स्वचालित सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ (Kavach), ट्रैक फेंसिंग और फुट ओवरब्रिज (FOB) के निर्माण—की धीमी प्रगति पर रेल मंत्रालय को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि रेलवे बजट में यात्री सुरक्षा के लिए वित्तीय आवंटन के बावजूद जमीन पर कोई ठोस काम नजर नहीं आ रहा है।

अदालत ने सख्त शब्दों में कहा कि रेल अधिकारियों के वादे केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं और सुरक्षा बजट का पूरा इस्तेमाल नहीं हुआ। पीठ ने पहले रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया था। हालांकि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी के अनुरोध पर अदालत ने वास्तविक जमीनी प्रगति का विस्तृत शपथ पत्र पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया और अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 तय की।

करोड़ों आम और दैनिक यात्रियों को कैसे मिलेगा सीधा फायदा?

भारत में प्रतिदिन लगभग 2.3 करोड़ लोग भारतीय रेलवे से सफर करते हैं। इनमें से अधिकांश दैनिक वेतनभोगी, मजदूर, किसान, छोटे व्यापारी और छात्र हैं, जो काउंटर से सामान्य अनारक्षित या द्वितीय श्रेणी का टिकट खरीदते हैं। अब तक ट्रेन दुर्घटना की स्थिति में इन गरीब यात्रियों के पास कोई बीमा सुरक्षा नहीं होती थी, जबकि ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले साधन संपन्न यात्री मात्र 45 पैसे के प्रीमियम पर ₹10 लाख के सुरक्षा कवर का लाभ ले रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से यह सामाजिक और आर्थिक विषमता समाप्त हो जाएगी। अब काउंटर से टिकट जारी होते ही सिस्टम में यात्रा बीमा स्वतः जुड़ जाएगा। किसी भी आकस्मिक दुर्घटना या अप्रिय घटना के दौरान घायल होने या जान गंवाने पर पीड़ित यात्री या आश्रित को त्वरित वित्तीय सुरक्षा मिलेगी, जिससे उन्हें लंबे मुकदमों के फेर में नहीं भटकना पड़ेगा।

उद्योग विशेषज्ञों और यात्री अधिकार मंचों की प्रतिक्रिया

वित्तीय और यात्री अधिकार विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत किया है। पॉलिसीबाजार के ट्रेवल इंश्योरेंस हेड मानस कपूर ने कहा कि देश में रेलवे परिवहन का सबसे सुलभ साधन है। ऐसे में यात्रा बीमा को वैकल्पिक के बजाय अनिवार्य सुरक्षा अधिकार बनाना एक दूरदर्शी कदम है। यह फैसला दर्शाता है कि आम नागरिक के जीवन की सुरक्षा भी उतनी ही अहम है जितनी किसी डिजिटल उपभोक्ता की।

रेलवे के सामने तकनीकी क्रियान्वयन की चुनौतियां

निर्देश स्पष्ट होने के बावजूद भारतीय रेलवे के सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS) के लिए इसे 27 अक्टूबर तक लागू करना बड़ी तकनीकी परीक्षा होगी। वर्तमान में देश भर में 10,000 से अधिक रेलवे स्टेशन और हजारों पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) व अनरिजर्व्ड टिकटिंग सिस्टम (UTS) काउंटर हैं। इन काउंटरों के सॉफ्टवेयर में बीमा कंपनियों के एपीआई को जोड़ना और टिकट प्रिंटिंग में नॉमिनी दर्ज करने का विकल्प देना जरूरी होगा। रेलवे काउंटर टिकटों पर यात्री का मोबाइल नंबर दर्ज कर एसएमएस से डिजिटल पॉलिसी लिंक भेजने की व्यवस्था बना सकता है।

निष्कर्ष: भारतीय रेल यात्रा में सुरक्षा के नए युग की शुरुआत

27 अक्टूबर 2026 से भारतीय रेल यात्रा एक मानवीय और सुरक्षित युग में प्रवेश करने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के জরিমানা के इस ऐतिहासिक फैसले ने साबित किया है कि सुरक्षा का अधिकार किसी वर्ग विशेष तक सीमित नहीं रह सकता। रेलवे बोर्ड को अब युद्धस्तर पर इस व्यवस्था को लागू करना होगा, ताकि ट्रेनों में सफर करने वाला देश का हर आम नागरिक सुरक्षित महसूस कर सके। 16 नवंबर की सुनवाई में रेलवे द्वारा पेश किया जाने वाला एक्शन प्लान तय करेगा कि लाइफलाइन कही जाने वाली ट्रेनें वास्तव में आम जनता के लिए कितनी जवाबदेह बनती हैं।

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