8 साल का इंतजार: भारत का खाद्य नियामक अभी भी सामने के पैकेजिंग लेबल पर सलाह दे रहा है
भारतीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (FSSAI) ने आठ साल तक पैकेजिंग के आगे की ओर स्पष्ट पोषण चेतावनी लगाने के मुद्दे पर केवल परामर्श दिया है। लेकिन भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अब इस विलंब को चुनौती दी है और FSSAI से तेजी से कार्रवाई की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने जोर दिया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यावसायिक हितों से अधिक महत्वपूर्ण है।
सुप्रीम कोर्ट का दबाव: अब तक क्या हुआ?
फरवरी 2026 में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने FSSAI से सामने के पैकेजिंग (Front-of-Pack) पर चेतावनी लेबल लगाने का सुझाव दिया है। न्यायालय की बेंच न्यायाधीश जे बी पर्दिवाला और के वी विश्वनाथन ने एक जनहित याचिका सुनते हुए यह निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा नागरिकों के स्वास्थ्य के अधिकार से संबंधित है।
न्यायालय ने FSSAI से सप्ताहों में एक स्पष्ट रोडमैप प्रदान करने को कहा है। फिर भी, FSSAI ने कहा है कि उसे विभिन्न उत्पाद श्रेणियों का अध्ययन करने और छोटे व्यवसायों सहित हितधारकों से परामर्श लेने के लिए अधिक समय की आवश्यकता है।
वर्तमान खाद्य लेबलिंग नियम: क्या बदल रहा है?
जनवरी 2025 से, FSSAI ने अनिवार्य रूप से सामने के पैकेजिंग पर पोषण संबंधी जानकारी को प्रमुखता से प्रदर्शित करने का आदेश दिया है। यह परिवर्तन व्यस्त माता-पिता और स्वास्थ्य-सचेत उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है।
- कैलोरी, चीनी, वसा, फाइबर और प्रोटीन सामने की पैकेजिंग पर बोल्ड फॉन्ट में दिखाई देंगे
- FSSAI लाइसेंस नंबर (14 अंकों का) प्रत्येक पैकेजिंग पर अनिवार्य है
- शाकाहारी उत्पादों पर हरा डॉट और मांसाहारी उत्पादों पर भूरा डॉट दिखना चाहिए
- निर्माण तारीख, सर्वोत्तम उपयोग तारीख और समाप्ति तारीख स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए
FSSAI ने क्या चुनौतियां बताई हैं?
FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सामने के पैकेजिंग लेबलिंग सिस्टम को अंतिम रूप देने के लिए विभिन्न दृष्टिकोणों का अध्ययन करने की आवश्यकता है। प्राधिकरण एक स्टार-रेटिंग प्रणाली का समर्थन करता है, लेकिन इसका आलोचकों द्वारा विरोध किया जा रहा है।
FSSAI के अनुसार, हितधारक परामर्श आवश्यक है क्योंकि:
- विभिन्न खाद्य उत्पाद श्रेणियों के लिए अलग-अलग लेबलिंग आवश्यकताएं हो सकती हैं
- छोटे और मध्यम व्यवसायों (SMEs) को पैकेजिंग परिवर्तन के लिए समय की आवश्यकता है
- उपभोक्ता सर्वेक्षण से पता चलना चाहिए कि लोग पोषण लेबल का वास्तव में उपयोग कैसे करते हैं
अनुपालन न करने पर दंड
FSSAI के नियमों का पालन न करने वाली खाद्य कंपनियों को गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है:
- भारी जुर्माने
- उत्पाद की खरीद रोकना (रिकॉल)
- FSSAI लाइसेंस का निलंबन
- कानूनी कार्रवाई
वैश्विक संदर्भ: अन्य देश पहले से आगे हैं
सामने की पैकेजिंग पर पोषण चेतावनी कई देशों में पहले से मौजूद है। यूरोप, अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के कुछ देशों में, उच्च चीनी, नमक और संतृप्त वसा वाले खाद्य उत्पादों पर स्पष्ट चेतावनी दिखाई देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे लेबल अस्वास्थ्यकर प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की खपत को कम कर सकते हैं और निर्माताओं को अपने उत्पाद सुधारने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
भारतीय खाद्य उद्योग पर प्रभाव
भारतीय खाद्य निर्माताओं, आयातकर्ताओं और डिस्ट्रिब्यूटरों के लिए पैकेजिंग में बदलाव एक बड़ी चुनौती है। पैकेजिंग को पूरी तरह से नए डिजाइन के साथ फिर से बनाना होगा। यहां तक कि एक गलत संख्या या छूटी हुई लेबल जानकारी भी जुर्माने, उत्पाद रिकॉल या बाजार प्रवेश में देरी का कारण बन सकती है।
2024 में FSSAI द्वारा अनुमोदित नए दिशानिर्देशों के अनुसार, चीनी, नमक और संतृप्त वसा जैसी मुख्य पोषण संबंधी जानकारी को अधिक प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाना चाहिए। बोल्ड फॉन्ट, बड़े आकार और स्पष्ट संकेत दिखाने होंगे कि प्रत्येक सेवा आपके दैनिक अनुशंसित सेवन में कितना योगदान देती है।
अगले कदम: क्या उम्मीद करें?
सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में FSSAI को अपनी प्रस्तावना प्रस्तुत करने के लिए कहा है। जुलाई 1, 2025 को एक कार्यान्वयन समय सीमा निर्धारित की गई थी, लेकिन वह तारीख अभी बीत चुकी है। अब मार्च 2026 में, सवाल यह है कि क्या नई समय सीमा निर्धारित की जाएगी या यह एक और विलंब का संकेत देगी।
खाद्य सुरक्षा और जनता का अधिकार
यह मुद्दा केवल लेबलिंग के बारे में नहीं है। यह भारतीय नागरिकों के स्वास्थ्य के अधिकार के बारे में है। उपभोक्ताओं को यह जानने का अधिकार है कि वे क्या खा रहे हैं। स्पष्ट सामने की पैकेजिंग लेबलिंग से माता-पिता अपने बच्चों के लिए स्वास्थ्यकर विकल्प चुन सकते हैं, और मधुमेह, मोटापा और हृदय संबंधी रोगों जैसी गैर-संचारी बीमारियों में कमी आ सकती है।
मुख्य निष्कर्ष (Key Takeaways)
- आठ साल की देरी: FSSAI ने सामने की पैकेजिंग लेबलिंग पर 8 साल तक केवल परामर्श दिया है, वास्तविक कार्यान्वयन अभी बाकी है।
- सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और तेजी से कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
- अनिवार्य जानकारी: जनवरी 2025 से, कैलोरी, चीनी, वसा, फाइबर और प्रोटीन सामने की पैकेजिंग पर दिखना अनिवार्य है।
- व्यावसायिक प्रभाव: खाद्य निर्माताओं को अपनी पैकेजिंग पूरी तरह से नए डिजाइन के साथ बदलनी होगी।
- स्वास्थ्य लाभ: स्पष्ट सामने की पैकेजिंग लेबलिंग से गैर-संचारी रोगों में कमी आ सकती है और उपभोक्ता जागरूकता बढ़ सकती है।
- वैश्विक मानक: यह प्रणाली दुनिया के कई देशों में पहले से सफलतापूर्वक काम कर रही है।













