एलपीजी मूल्य वृद्धि और आपूर्ति संकट: भारत में वैकल्पिक ईंधन की ओर बढ़ता रुझान
भारतीय रसोई गैस (एलपीजी) की बढ़ती कीमतों, आपूर्ति में देरी और कालाबाजारी की घटनाओं ने देश भर के लाखों घरों और छोटे व्यवसायों पर दबाव बढ़ा दिया है। इन चुनौतियों के बीच, उपभोक्ता अब बिजली से चलने वाले खाना पकाने के विकल्पों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। यह बदलाव न केवल बढ़ती लागतों का एक सीधा परिणाम है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता की दिशा में एक व्यापक बदलाव का भी संकेत देता है।
बढ़ती एलपीजी कीमतें और आपूर्ति की समस्याएँ
पिछले कुछ समय से एलपीजी की कीमतों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। मार्च 2026 तक, दिल्ली में 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर ₹913 हो गई है, जो पहले ₹853 थी [5]। यह वृद्धि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनावों के कारण हुई है [9, 34]। इन मूल्य वृद्धि का सीधा असर मध्यम और निम्न-आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है, जिन्हें अपने मासिक बजट में कटौती करनी पड़ रही है [7]।
कीमतों में वृद्धि के साथ-साथ, आपूर्ति में अनियमितता और देरी भी एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है। कई शहरों में, उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर रिफिल के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इस कमी का फायदा उठाते हुए, कालाबाजारी भी बढ़ी है, जहाँ वाणिज्यिक सिलेंडरों को सामान्य कीमत से दोगुने या तिगुने दाम पर बेचा जा रहा है [5, 18]। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, कालाबाजारी में सिलेंडर ₹3,500 से ₹6,500 तक में बिक रहे हैं, जबकि रिफिल की कीमत ₹3,000-₹4,000 तक पहुँच गई है [29]। यह स्थिति छोटे व्यवसायों, विशेष रूप से रेस्तरां, ढाबों और खाद्य विक्रेताओं के लिए गंभीर संकट पैदा कर रही है [5]।
सरकारी पहलें और उनकी सीमाएँ
भारत सरकार ने एलपीजी की पहुंच बढ़ाने के लिए प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) जैसी महत्वपूर्ण पहलें की हैं। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को रियायती एलपीजी कनेक्शन प्रदान करना है [4]। सरकार एलपीजी सब्सिडी भी प्रदान करती है, जो सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है [4, 10, 25]। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए, एलपीजी सब्सिडी के तहत ₹120 बिलियन (लगभग $1.37 बिलियन) का प्रावधान किया गया है [3]।
हालांकि, इन योजनाओं के बावजूद, सब्सिडी की राशि और सिलेंडर रिफिल की संख्या में कटौती जैसी हालिया घोषणाओं ने लाभार्थियों की चिंता बढ़ा दी है [3]। इसके अतिरिक्त, घरेलू उत्पादन और बढ़ती मांग के बीच एक बड़ा अंतर है, जिसके कारण भारत अपनी एलपीजी की लगभग 60-65% आवश्यकता के लिए आयात पर निर्भर है [5, 14]। यह आयात निर्भरता वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधानों के प्रति देश को संवेदनशील बनाती है।
वैकल्पिक खाना पकाने के साधनों की ओर रुझान
एलपीजी की बढ़ती कीमतों, आपूर्ति की अनिश्चितता और कालाबाजारी से परेशान उपभोक्ता अब वैकल्पिक खाना पकाने के साधनों की ओर देख रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से बिजली से चलने वाले उपकरण शामिल हैं।
- इंडक्शन कुकटॉप्स: ये बिजली से चलने वाले कुकटॉप्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। वे सीधे बर्तन को गर्म करते हैं, जिससे वे गैस स्टोव की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल होते हैं [8, 23]। शहरी क्षेत्रों में इनकी स्वीकार्यता अधिक है, और ये विभिन्न भारतीय व्यंजनों को पकाने के लिए प्री-सेट बटनों के साथ आते हैं [11]।
- इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर: ये उपकरण खाना पकाने के समय को 70% तक कम कर सकते हैं और चावल, दाल, सब्जियां और करी जैसी विभिन्न चीजें पकाने में सक्षम हैं [8, 12]। ये बहु-उपयोगी होने के साथ-साथ एलपीजी की बचत भी करते हैं।
- माइक्रोवेव ओवन और एयर फ्रायर: ये त्वरित स्नैक्स बनाने, रीहीट करने और बेकिंग के लिए उपयोगी हैं। ये एलपीजी पर निर्भरता कम करने में मदद करते हैं, खासकर मुख्य भोजन के लिए [8]।
- सोलर कुकर: सौर ऊर्जा पर चलने वाले ये कुकर पर्यावरण के अनुकूल विकल्प हैं। हालांकि इनमें खाना पकाने में अधिक समय लग सकता है, लेकिन ये एलपीजी की अनुपलब्धता के दौरान एक व्यवहार्य विकल्प प्रदान करते हैं [28]।
- बायोगैस सिस्टम: कुछ ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बायोगैस का उपयोग भी एक स्थायी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
बिजली से चलने वाले खाना पकाने के उपकरणों को अपनाने में कुछ चुनौतियाँ भी हैं, जैसे कि विश्वसनीय बिजली आपूर्ति की आवश्यकता, उपकरणों की प्रारंभिक लागत और खाना पकाने की नई आदतों से तालमेल बिठाना [11]। हालांकि, सरकार ‘गो इलेक्ट्रिक’ जैसे अभियानों के माध्यम से इलेक्ट्रिक खाना पकाने को बढ़ावा दे रही है [16, 22]।
मुख्य बातें
- एलपीजी की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति में कमी ने भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी चुनौती पेश की है।
- वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता एलपीजी की कीमतों में वृद्धि का एक प्रमुख कारण है।
- कालाबाजारी और आपूर्ति में देरी ने स्थिति को और खराब कर दिया है, खासकर छोटे व्यवसायों के लिए।
- भारत एलपीजी की अपनी 60-65% आवश्यकता के लिए आयात पर निर्भर है, जो ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक जोखिम है।
- इंडक्शन कुकटॉप्स, इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर और माइक्रोवेव ओवन जैसे इलेक्ट्रिक खाना पकाने के विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
- सरकार ‘गो इलेक्ट्रिक’ अभियान के माध्यम से इलेक्ट्रिक खाना पकाने को बढ़ावा दे रही है, लेकिन ग्रिड स्थिरता और प्रारंभिक लागत जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
- एलपीजी सब्सिडी और उज्ज्वला योजना जैसी सरकारी पहलें महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनकी प्रभावशीलता और पहुंच पर लगातार ध्यान देने की आवश्यकता है।
- भविष्य में, ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एलपीजी पर निर्भरता कम करके वैकल्पिक और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ना महत्वपूर्ण होगा।













