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UAE में CBSE 12वीं के छात्रों के लिए अनिश्चितता: परीक्षा रद्द, भविष्य पर सवाल

यूएई में 10,000 भारतीय छात्रों के लिए अनिश्चितता: CBSE ने 12वीं की परीक्षा रद्द की

दुबई: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में लगभग 10,000 भारतीय प्रवासी छात्र उस समय अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं, जब सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने मध्य पूर्व के सात देशों में 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं रद्द करने का फैसला किया है। यह निर्णय हालिया भू-राजनीतिक तनावों के कारण लिया गया है, जिसने छात्रों की सुरक्षा और परीक्षा की सुचारू व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इस फैसले से छात्रों के बीच चिंताएं भी बढ़ गई हैं कि उनके परीक्षा परिणाम का मूल्यांकन कैसे होगा और यह उनके उच्च शिक्षा के अवसरों को कैसे प्रभावित करेगा।

परीक्षा रद्द करने का निर्णय और छात्रों की चिंताएँ

CBSE ने 15 मार्च 2026 को एक सर्कुलर जारी कर घोषणा की कि बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में 16 मार्च से 10 अप्रैल 2026 के बीच होने वाली सभी 12वीं कक्षा की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। यह निर्णय छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और क्षेत्रीय तनावों के मद्देनजर लिया गया है। CBSE के परीक्षा नियंत्रक डॉ. सयम भारद्वाज द्वारा हस्ताक्षरित इस सर्कुलर ने छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों के बीच तत्काल चिंता पैदा कर दी है।

छात्रों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनके अंतिम परिणाम का मूल्यांकन किस आधार पर किया जाएगा। कई छात्र चिंतित हैं कि बोर्ड द्वारा अपनाई जाने वाली मूल्यांकन नीति उनकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं हो सकती है, खासकर उन छात्रों के लिए जिन्होंने परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद में कड़ी मेहनत की थी।

“हमने पूरे साल 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में बिताया, व्यक्तिगत समय, शौक और सामाजिक गतिविधियों का त्याग किया, केवल अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए। परीक्षा रद्द होने से मिली-जुली भावनाएं हैं। एक ओर, हमें निराशा महसूस होती है क्योंकि बोर्ड…। हम उम्मीद करते हैं कि CBSE की मूल्यांकन विधि निष्पक्ष और उचित होगी, और परिणाम हमारे विश्वविद्यालय के आवेदनों या भविष्य की योजनाओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित नहीं करेंगे। अभी, हम अंकन योजना और अगले चरणों के बारे में स्पष्ट संचार की प्रतीक्षा कर रहे हैं।” – यश अब्राहम विनोद, शारजाह के एक 12वीं कक्षा के छात्र।

CBSE की वैकल्पिक मूल्यांकन नीति: एक ऐतिहासिक संदर्भ

यह पहली बार नहीं है जब CBSE को परीक्षाओं को रद्द या स्थगित करना पड़ा है। 2021 में, COVID-19 महामारी के कारण, CBSE ने 10वीं और 12वीं दोनों की बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी थीं। उस समय, बोर्ड ने एक वैकल्पिक मूल्यांकन नीति अपनाई थी, जिसमें छात्रों के पिछले तीन वर्षों के प्रदर्शन को ध्यान में रखा गया था।

2021 के लिए CBSE की मूल्यांकन मानदंड इस प्रकार थे:

  • कक्षा 10: बोर्ड परीक्षा 2019 के सर्वश्रेष्ठ 3 प्रदर्शन करने वाले विषयों के आधार पर 30% वेटेज।
  • कक्षा 11: 2020 की वार्षिक परीक्षा के आधार पर 30% वेटेज।
  • कक्षा 12: 2021 की यूनिट टेस्ट/मिड-टर्म/प्री-बोर्ड परीक्षाओं के आधार पर 40% वेटेज।

यह ध्यान देने योग्य है कि 2021 की स्थिति COVID-19 महामारी के कारण उत्पन्न हुई एक स्वास्थ्य आपातकाल थी, जिसने पूरे भारत और विदेशों में सभी छात्रों को समान रूप से प्रभावित किया था। वर्तमान स्थिति, हालांकि, भू-राजनीतिक तनावों से प्रेरित है और विशेष रूप से मध्य पूर्व क्षेत्र तक सीमित है।

वर्तमान स्थिति का विश्लेषण और भविष्य की राह

मध्य पूर्व में CBSE 12वीं की परीक्षा रद्द होने का निर्णय, 2021 की COVID-19 महामारी के दौरान अपनाई गई नीति से अलग है। उस समय, परीक्षा रद्द करना एक राष्ट्रव्यापी स्वास्थ्य संकट का परिणाम था। आज, यह एक भौगोलिक रूप से सीमित संघर्ष का परिणाम है।

यह स्थिति उन छात्रों के लिए एक अनूठी चुनौती पेश करती है जो भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश लेना चाहते हैं। उन्हें उन छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी जिन्होंने भारत में अपनी बोर्ड परीक्षाएं पूरी कर ली हैं।

CBSE ने यह पुष्टि की है कि प्रभावित छात्रों के लिए परिणाम घोषित करने की पद्धति के बारे में एक अलग अधिसूचना जारी की जाएगी। यह संभव है कि बोर्ड 2021 में अपनाई गई मूल्यांकन नीति के समान ही कोई योजना अपनाए, जिसमें स्कूल-आधारित आंतरिक मूल्यांकन, प्री-बोर्ड परीक्षाओं के अंक और पिछले वर्षों के प्रदर्शन को शामिल किया जा सकता है।

यूएई में भारतीय छात्रों की बड़ी संख्या को देखते हुए, यह महत्वपूर्ण है कि CBSE एक पारदर्शी और निष्पक्ष मूल्यांकन प्रक्रिया सुनिश्चित करे। यूएई में भारतीय छात्र दुबई के उच्च शिक्षा क्षेत्र में सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय समूह बनाते हैं, जो कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों का 43% है। यह इस क्षेत्र में भारतीय शिक्षा प्रणाली के महत्व को रेखांकित करता है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और मध्य पूर्व के छह अन्य देशों में लगभग 10,000 भारतीय प्रवासी छात्रों की CBSE 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं।
  • यह निर्णय क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनावों के कारण छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए लिया गया है।
  • छात्रों के बीच अपने परीक्षा परिणामों के मूल्यांकन और उच्च शिक्षा में प्रवेश को लेकर अनिश्चितता और चिंता है।
  • CBSE ने घोषणा की है कि प्रभावित छात्रों के लिए परिणाम घोषित करने की पद्धति के बारे में एक अलग अधिसूचना जारी की जाएगी।
  • संभावित मूल्यांकन विधियों में स्कूल-आधारित आंतरिक मूल्यांकन, प्री-बोर्ड परीक्षाओं के अंक और पिछले वर्षों के अकादमिक रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं, जैसा कि 2021 में COVID-19 महामारी के दौरान किया गया था।
  • यह स्थिति 2021 की COVID-19 महामारी के कारण परीक्षा रद्द करने से भिन्न है, जो एक स्वास्थ्य आपातकाल था।
  • यूएई में भारतीय छात्रों की बड़ी संख्या को देखते हुए, एक निष्पक्ष और पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया की उम्मीद है।
  • CBSE की आधिकारिक वेबसाइट (cbse.gov.in) पर नवीनतम अपडेट की उम्मीद है।

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