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आम आदमी पार्टी को झटका: राघव चड्ढा और 6 अन्य सांसद BJP में शामिल

राजनीतिक भूचाल: राघव चड्ढा सहित 7 AAP राज्यसभा सांसद BJP में शामिल, AAP ने “ऑपरेशन लोटस” का लगाया आरोप

नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में एक बड़ा उलटफेर करते हुए, आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और उनके साथ छह अन्य साथी सांसदों ने शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 को पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने का ऐलान किया है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने आप को एक बड़ा झटका दिया है, खासकर पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले। चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है और अब देश के हित में काम नहीं कर रही है।

सांसदों का बीजेपी में शामिल होने का कारण और आप का आरोप

राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा, “आम आदमी पार्टी, जिसे मैंने अपने खून-पसीने से सींचा और जिसके लिए मैंने अपने युवावस्था के 15 साल दिए, अब पूरी तरह से अपने सिद्धांतों, मूल्यों और मूल नैतिकता से भटक गई है। पार्टी अब देश के लिए या राष्ट्रीय हित में काम नहीं कर रही है, बल्कि व्यक्तिगत लाभ के लिए काम कर रही है।” उन्होंने आगे कहा, “मैं खुद को गलत पार्टी में सही आदमी महसूस कर रहा था।”

चड्ढा के साथ, जिन छह अन्य राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ी है, उनमें संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम सहनी और स्वाति मालीवाल शामिल हैं। चड्ढा ने दावा किया कि राज्यसभा में आप के 10 सांसदों में से दो-तिहाई से अधिक ने भाजपा में विलय करने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी बताया कि आवश्यक दस्तावेज राज्यसभा के सभापति को सौंप दिए गए हैं।

इस राजनीतिक घटनाक्रम पर आम आदमी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। आप सांसद संजय सिंह ने भाजपा पर “ऑपरेशन लोटस” चलाने का आरोप लगाया और इसे पंजाब सरकार के खिलाफ एक राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने कहा, “भारतीय जनता पार्टी, नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में, ‘ऑपरेशन लोटस’ लॉन्च किया है, जिसे सस्ती राजनीति का खेल बताया जा रहा है और पंजाब में भगवंत मान सरकार के अच्छे कामों में बाधा डालने का प्रयास किया जा रहा है।” पार्टी ने इन नेताओं पर पंजाब के लोगों को धोखा देने का भी आरोप लगाया।

राज्यसभा में सांसदों का चुनाव और दल-बदल कानून

राज्यसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा नहीं चुने जाते, बल्कि उन्हें राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य चुनते हैं। यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) के माध्यम से होता है। प्रत्येक विधायक अपनी पसंद के उम्मीदवारों को वरीयता क्रम में वोट देता है। राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 245 है, जिसमें 233 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चुने जाते हैं, और 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं।

दल-बदल कानून (Anti-Defection Law), जिसे संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत 1985 में शामिल किया गया था, का उद्देश्य राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना और विधायकों को एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाने से रोकना है। हालांकि, इस कानून में एक प्रावधान है जिसके तहत यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य एक साथ किसी दूसरी पार्टी में विलय करने का निर्णय लेते हैं, तो वे अयोग्यता से बच सकते हैं। राघव चड्ढा और उनके साथियों ने इसी प्रावधान का हवाला देते हुए भाजपा में विलय किया है, जिससे वे दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता से बच गए हैं।

राजनीतिक परिदृश्य पर प्रभाव

यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति में बदलते परिदृश्य का एक और उदाहरण है। हाल के वर्षों में, कई नेताओं और सांसदों ने पार्टियों को बदला है, जिसमें भाजपा अक्सर लाभान्वित पार्टी रही है। यह दल-बदल न केवल पार्टियों की ताकत को प्रभावित करता है, बल्कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर राजनीतिक समीकरणों को भी बदल देता है। 2024 के लोकसभा चुनावों में भी ऐसे कई उदाहरण देखे गए जहाँ उम्मीदवारों ने दल बदल कर चुनाव लड़ा।

सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने से राज्यसभा में भाजपा की ताकत में वृद्धि हुई है, जिससे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का सदन में बहुमत और मजबूत हुआ है। इससे सरकार के लिए विधायी प्रक्रिया में आसानी हो सकती है। वहीं, आम आदमी पार्टी की राज्यसभा में स्थिति कमजोर हुई है, जो आगामी चुनावों के लिए पार्टी के लिए एक चुनौती पेश कर सकता है। भाजपा नेताओं ने इसे आप के भीतर असंतोष का प्रमाण बताया है, जबकि आप नेताओं ने इसे पंजाब सरकार को कमजोर करने की भाजपा की चाल करार दिया है।

यह राजनीतिक फेरबदल भारत की गतिशील राजनीतिक व्यवस्था को दर्शाता है, जहाँ दल-बदल और गठबंधन एक आम बात बन गई है। इसका दीर्घकालिक प्रभाव आगामी चुनावों और राष्ट्रीय राजनीति की दिशा पर देखा जाएगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सांसदों, जिनमें राघव चड्ढा प्रमुख हैं, ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की घोषणा की है।
  • सांसदों का दावा है कि यह निर्णय दल-बदल कानून के तहत दो-तिहाई सदस्यों के विलय के प्रावधान का उपयोग करके लिया गया है, जिससे वे अयोग्यता से बच सकें।
  • राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने का कारण आप का अपने मूल सिद्धांतों से भटकना बताया है।
  • आप ने भाजपा पर “ऑपरेशन लोटस” चलाने और पंजाब सरकार को कमजोर करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है।
  • इस घटनाक्रम से राज्यसभा में भाजपा की ताकत बढ़ेगी और एनडीए का बहुमत मजबूत होगा।
  • यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति में दल-बदल के बढ़ते चलन और राजनीतिक परिदृश्य में हो रहे बदलावों को दर्शाता है।
  • राज्यसभा सांसद अप्रत्यक्ष रूप से राज्य विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं, और दल-बदल कानून ऐसे विलयों को कुछ शर्तों के तहत अनुमति देता है।

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