दक्षिण सूडान में मंडराता अकाल: संयुक्त राष्ट्र की गंभीर चेतावनी
दक्षिण सूडान एक बार फिर गंभीर मानवीय संकट की कगार पर खड़ा है। संयुक्त राष्ट्र के सहायता प्रमुख, टॉम फ्लेचर, ने देश में ‘पूर्ण पैमाने पर अकाल और पतन’ के बढ़ते जोखिम के प्रति आगाह किया है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब देश में लगातार जारी संघर्ष, बढ़ती भुखमरी, और घटते अंतरराष्ट्रीय समर्थन ने स्थिति को और भी विकट बना दिया है। फ्लेचर ने सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि अगर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो जल्द ही अकाल की घोषणा करनी पड़ सकती है।
संघर्ष और भुखमरी का दुष्चक्र
दक्षिण सूडान, दुनिया का सबसे युवा राष्ट्र, अपनी स्थापना के बाद से ही लगातार संघर्षों और अस्थिरता से जूझ रहा है। 2018 में एक शांति समझौते के बावजूद, देश में हिंसा का चक्र थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल के महीनों में, विशेष रूप से जोंगलेई राज्य में, सुरक्षा बलों और विद्रोही समूहों के बीच लड़ाई तेज हो गई है। इस संघर्ष ने लाखों लोगों को विस्थापित किया है और उनकी आजीविका को तबाह कर दिया है।
“दुनिया का सबसे युवा राष्ट्र एक खतरनाक मोड़ पर खड़ा है। संघर्ष बढ़ा है। विस्थापन बढ़ा है। भुखमरी बढ़ी है। बीमारियां बढ़ी हैं। सहायता कर्मियों पर हमले बढ़े हैं। धन में कमी आई है।”
– टॉम फ्लेचर, संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों और आपातकालीन राहत समन्वयक
फ्लेचर ने अपनी हालिया यात्रा के दौरान देश की गंभीर स्थिति का प्रत्यक्ष अनुभव किया। उन्होंने बताया कि कैसे मानवीय सहायता शिविरों को लूटा गया और पोषण केंद्रों को नष्ट कर दिया गया। जोंगलेई राज्य के अकोबो जैसे क्षेत्रों में, 140,000 से अधिक लोग तत्काल सहायता के लिए तरस रहे हैं। यह स्थिति तब और भी चिंताजनक हो जाती है जब हम यह देखते हैं कि इस वर्ष 7.5 मिलियन से अधिक लोगों को खाद्य सहायता की आवश्यकता होगी।
बढ़ती खाद्य असुरक्षा और घटता धन
दक्षिण सूडान में खाद्य असुरक्षा की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों के अनुसार, देश के सभी 10 राज्यों में ‘लीन सीजन’ (फसल कटाई के बाद का वह समय जब भोजन की कमी होती है) के दौरान आपातकालीन स्तर की खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ सकता है। यह अवधि जुलाई के अंत तक जारी रहने की उम्मीद है।
इस गंभीर स्थिति के बावजूद, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से मिलने वाली वित्तीय सहायता में भारी कमी आई है। संयुक्त राष्ट्र की $1.46 बिलियन की मानवीय प्रतिक्रिया योजना का केवल 22% ही वित्त पोषित हुआ है। इस धन की कमी के कारण विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) जैसी संस्थाओं को अपनी सहायता को सीमित करना पड़ रहा है। WFP को उन लोगों की संख्या को घटाकर 3.7 मिलियन करना पड़ा है जिन्हें वे सहायता प्रदान कर सकते हैं, और कुछ क्षेत्रों में तो भोजन की राशन आधी कर दी गई है।
बाढ़ और जलवायु परिवर्तन का दोहरा मार
संघर्ष और भुखमरी के अलावा, दक्षिण सूडान को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का भी सामना करना पड़ रहा है। लगातार आने वाली बाढ़ ने समुदायों को अलग-थलग कर दिया है और उनकी आजीविका को नष्ट कर दिया है। 2025 में एल नीनो के प्रभाव के कारण देश के कुछ हिस्सों में भयंकर बाढ़ आई, जिसने 1.3 मिलियन से अधिक लोगों को प्रभावित किया, जबकि अन्य क्षेत्रों में लंबे समय तक सूखा पड़ा रहा। ये जलवायु झटके समुदायों की पहले से ही कमजोर सहन क्षमता को और भी कम कर रहे हैं।
प्रमुख चुनौतियां और आवश्यक कदम
दक्षिण सूडान में अकाल की स्थिति को रोकने के लिए तत्काल और निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता है। संयुक्त राष्ट्र के सहायता प्रमुख ने सुरक्षा परिषद से तीन प्रमुख क्षेत्रों में तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है:
- मानवीय सहायता के लिए तीव्र और निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करना।
- लचीले धन में वृद्धि करना।
- सभी पक्षों पर अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का सम्मान करने के लिए दबाव डालना।
इसके अतिरिक्त, दीर्घकालिक शांति और स्थिरता के लिए राजनीतिक समाधान की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। जब तक संघर्ष समाप्त नहीं होता और शांति स्थापित नहीं होती, तब तक दक्षिण सूडान के लोग इस दुष्चक्र से बाहर नहीं निकल पाएंगे।
मुख्य बातें
- संयुक्त राष्ट्र के सहायता प्रमुख टॉम फ्लेचर ने दक्षिण सूडान में ‘पूर्ण पैमाने पर अकाल और पतन’ के बढ़ते जोखिम के प्रति आगाह किया है।
- देश में लगातार जारी संघर्ष, बढ़ती भुखमरी, और घटते अंतरराष्ट्रीय समर्थन ने स्थिति को विकट बना दिया है।
- 7.5 मिलियन से अधिक लोगों को इस वर्ष खाद्य सहायता की आवश्यकता होगी, और जुलाई तक आपातकालीन स्तर की खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ सकता है।
- $1.46 बिलियन की मानवीय प्रतिक्रिया योजना का केवल 22% ही वित्त पोषित हुआ है, जिससे सहायता कार्यों में बाधा आ रही है।
- बाढ़ और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव ने भुखमरी की समस्या को और बढ़ा दिया है।
- अकाल को रोकने के लिए मानवीय पहुंच, धन में वृद्धि और शांति प्रयासों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
- 2026 तक, देश की दो-तिहाई आबादी, यानी 10 मिलियन से अधिक लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता पड़ने का अनुमान है।
- 2025 के अप्रैल-जुलाई के ‘लीन सीजन’ के दौरान, 7.56 मिलियन लोगों (लगभग आधी आबादी) को गंभीर भुखमरी का सामना करने की आशंका है।
- संघर्ष, जलवायु झटके और आर्थिक अस्थिरता दक्षिण सूडान में गंभीर भूख संकट के मुख्य कारण हैं।
- 2026 की शुरुआत तक, जोंगलेई राज्य में संघर्ष के बढ़ने से 2 मिलियन लोग सुरक्षा और भोजन की तलाश में विस्थापित होने को मजबूर हो सकते हैं।
- लगभग 2.4 मिलियन दक्षिण सूडानी शरणार्थी हैं, जिनमें से 65% 18 वर्ष से कम आयु के हैं।
- 2026 के मध्य तक, देश के 10 राज्यों में से सभी में खाद्य असुरक्षा के आपातकालीन स्तर की उम्मीद है।
- 1.35 मिलियन लोग जोंगलेई राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हो गए हैं, क्योंकि 26 स्वास्थ्य सुविधाएं नष्ट हो गई हैं या बंद हो गई हैं।













