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विशाखापत्तनम: जीवीएमसी नीतियों के खिलाफ निवासियों का विरोध प्रदर्शन

विशाखापत्तनम में जीवीएमसी नीतियों के खिलाफ निवासियों का बढ़ता असंतोष

विशाखापत्तनम के निवासी ग्रेटर विशाखापत्तनम म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (जीवीएमसी) की नीतियों से नाखुश हैं, जिसके कारण शहर भर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।VARWA (विशाखापत्तनम अपार्टमेंट रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) और NIVAS (ग्रेटर विशाखा रेजिडेंट कॉलोनी एसोसिएशन फेडरेशन) जैसे नागरिक समूहों के नेताओं ने करों में वृद्धि, बिगड़ती नागरिक सुविधाओं और सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण की चिंताओं को उजागर किया है। निवासियों की मांग है कि इन शुल्कों को वापस लिया जाए और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

करों में वृद्धि और नागरिक सुविधाओं की उपेक्षा

हाल के वर्षों में, जीवीएमसी ने संपत्ति कर और अन्य शुल्कों में उल्लेखनीय वृद्धि की है। यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब शहर में नागरिक सुविधाओं की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। निवासियों का आरोप है कि बढ़ी हुई करों के बावजूद, उन्हें सड़कों, सीवेज, जल आपूर्ति और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं में कोई सुधार नहीं दिख रहा है।

संपत्ति कर में वृद्धि का बोझ

जीवीएमसी ने 2021 से संपत्ति कर को बाजार मूल्य के आधार पर लागू करना शुरू किया है, जो पहले किराये के मूल्य पर आधारित था। इस बदलाव के कारण संपत्ति कर में कई गुना वृद्धि हुई है। उदाहरण के लिए, एक 300 वर्ग फुट के घर का वार्षिक संपत्ति कर लगभग ₹15,000 तक पहुंच सकता है, जो पहले की तुलना में तीन से पांच गुना अधिक है। इस वृद्धि ने विशेष रूप से मध्यम वर्ग और निम्न-आय वर्ग के निवासियों पर भारी वित्तीय बोझ डाला है।

कूड़ा संग्रहण शुल्क पर विवाद

कूड़ा संग्रहण के लिए उपयोगकर्ता शुल्क लागू करने के प्रस्ताव ने भी निवासियों के बीच नाराजगी पैदा की है। VARWA और NIVAS जैसे संगठनों ने इस शुल्क को लागू करने का विरोध किया है, खासकर जब वे मानते हैं कि मौजूदा कूड़ा संग्रहण सेवाएं संतोषजनक नहीं हैं। उनका तर्क है कि जब तक सेवाओं में सुधार नहीं होता, तब तक अतिरिक्त शुल्क लगाना अनुचित है।

सार्वजनिक संपत्तियों का निजीकरण

निवासियों और नागरिक समूहों ने जीवीएमसी की सार्वजनिक संपत्तियों, जैसे खेल स्टेडियमों, कॉम्प्लेक्सों और यहां तक कि विशाखापत्तनम स्टील प्लांट (VSP) के कुछ हिस्सों के निजीकरण की ओर झुकाव पर भी चिंता व्यक्त की है। उनका तर्क है कि ये संपत्तियां जनता के करों से बनाई गई हैं और इन्हें निजी हाथों में सौंपने से आम आदमी की पहुंच सीमित हो जाएगी और शुल्क में वृद्धि होगी।

“ये स्टेडियम और कॉम्प्लेक्स लोगों द्वारा चुकाए गए करों से बनाए गए थे, लेकिन बाद में इन्हें निजी एजेंसियों को सौंप दिया गया। ये एजेंसियां लोगों से खेलने या किसी भी गतिविधि के आयोजन के लिए भारी राशि वसूल रही हैं। मध्यम वर्ग के लोग इतनी भारी राशि का भुगतान नहीं कर पाएंगे।”

— VARWA और NIVAS सदस्य

अन्य नागरिक मुद्दे

करों में वृद्धि और निजीकरण की चिंताओं के अलावा, शहर में अन्य नागरिक मुद्दे भी निवासियों को परेशान कर रहे हैं। इनमें शामिल हैं:

  • प्रदूषण: औद्योगिक गतिविधियों और वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनी हुई है।
  • खुले नाले: कई क्षेत्रों में खुले नाले दुर्गंध और बीमारियों का कारण बन रहे हैं।
  • खराब सड़कें: गड्ढों से भरी और अधूरी सड़कें दुर्घटनाओं को न्योता दे रही हैं।
  • जल संकट: गर्मियों में पानी की कमी एक आम समस्या है।

आगे की राह और निवासियों की मांगें

VARWA और NIVAS जैसे संगठन इन मुद्दों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने जीवीएमसी से निम्नलिखित मांगों को पूरा करने का आग्रह किया है:

  • संपत्ति कर में हालिया वृद्धि को तत्काल वापस लिया जाए।
  • कूड़ा संग्रहण शुल्क को समाप्त किया जाए या सेवाओं में सुधार होने तक स्थगित रखा जाए।
  • सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण पर रोक लगाई जाए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
  • शहर में नागरिक सुविधाओं, जैसे सड़कों, सीवेज, जल आपूर्ति और स्वच्छता में तत्काल सुधार किया जाए।

निवासी इन मुद्दों के समाधान के लिए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और हस्ताक्षर अभियान जैसे कदम उठा रहे हैं। वे जीवीएमसी से जन-समर्थक निर्णय लेने की उम्मीद कर रहे हैं।

मुख्य बिंदु

  • विशाखापत्तनम के निवासी जीवीएमसी की नीतियों, विशेष रूप से कर वृद्धि और नागरिक सुविधाओं में कमी को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
  • VARWA और NIVAS जैसे नागरिक समूह करों में वृद्धि, कूड़ा संग्रहण शुल्क और सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण की चिंताओं को उजागर कर रहे हैं।
  • संपत्ति कर को बाजार मूल्य पर आधारित करने से करों में कई गुना वृद्धि हुई है, जिससे निवासियों पर वित्तीय बोझ बढ़ा है।
  • शहर में प्रदूषण, खुले नाले, खराब सड़कें और जल संकट जैसी अन्य नागरिक समस्याएं भी मौजूद हैं।
  • निवासी करों में वृद्धि को वापस लेने, निजीकरण रोकने और नागरिक सुविधाओं में सुधार की मांग कर रहे हैं।
  • जीवीएमसी ने हाल के वित्तीय वर्षों में कर संग्रह में वृद्धि दर्ज की है, 2025-26 में ₹620 करोड़ का लक्ष्य रखा है, लेकिन निवासियों का असंतोष बढ़ रहा है।

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